West Bengal : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने पहचान दस्तावेजों के संबंध में महत्वपूर्ण स्पष्टता दी है. अदालत ने कहा है कि माध्यमिक (कक्षा 10) का एडमिट कार्ड जन्म तिथि और पारिवारिक पहचान के समर्थन में प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन इसे अकेले पूर्ण पहचान प्रमाण नहीं माना जाएगा.
एडमिट कार्ड की सीमाएं तय
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अगुवाई वाली पीठ, जिसमें जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi शामिल थे, ने वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू द्वारा मामले का उल्लेख किए जाने के बाद यह आदेश पारित किया.
सुनवाई के दौरान यह आशंका जताई गई कि क्या 10वीं का प्रवेश पत्र अपने आप में संपूर्ण पहचान दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है. इस पर अदालत ने दोटूक कहा कि पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है—एडमिट कार्ड केवल सप्लीमेंट्री यानी पूरक दस्तावेज रहेगा. इसे वैध प्रमाण पत्रों के साथ ही प्रस्तुत करना होगा.
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24 फरवरी के आदेश का हवाला
पीठ ने 24 फरवरी 2026 के अपने आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अनुच्छेद 3(3) में उल्लिखित सभी दस्तावेज, जो 15 फरवरी से पहले प्राप्त हुए लेकिन अभी तक अपलोड नहीं किए गए हैं, उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर पीठासीन न्यायिक अधिकारियों के समक्ष पेश किया जाए.
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अनुच्छेद 3(3)(सी) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि माध्यमिक परीक्षा के एडमिट कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र और पारिवारिक पहचान के समर्थन में वैध दस्तावेजों के साथ जोड़ा जा सकता है.
80 लाख दावों-आपत्तियों की निगरानी
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर दायर लगभग 80 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए अदालत ने विशेष व्यवस्था को मंजूरी दी है. पश्चिम बंगाल के करीब 250 जिला जजों के अलावा झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को भी इस प्रक्रिया की निगरानी और सत्यापन में लगाया जाएगा.
अदालत का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर आई आपत्तियों के निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारे के लिए न्यायिक निगरानी आवश्यक है, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से गलत तरीके से न हटे.
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