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Train Accident Prevention : कवच सिस्टम से सुरक्षित होंगी ट्रेनें, रांची रेल डिवीजन में सर्वे शुरू

Train Accident Prevention: रांची रेल डिवीजन में ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कवच प्रणाली लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. रेलवे ने इसके लिए सर्वेक्षण कार्य आरंभ कर दिया है. कवच सिस्टम का उद्देश्य ट्रेन टक्कर और मानवीय भूल से होने वाले हादसों को रोकना है.

Train Accident Prevention: रांची रेल डिवीजन में रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. यहां स्वदेशी ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की स्थापना के लिए सर्वेक्षण कार्य आरंभ कर दिया गया है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह आधुनिक तकनीक ट्रेनों की टक्कर रोकने और मानवीय चूक से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से विकसित की गई है.

कवच एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो लोको पायलट को सिग्नल उल्लंघन या तय गति सीमा से अधिक रफ्तार होने पर तुरंत चेतावनी देती है. यदि पायलट समय पर प्रतिक्रिया नहीं करता, तो यह सिस्टम खुद ही ट्रेन की गति को नियंत्रित कर सकता है.

सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता: डीआरएम

डीआरएम करुणानिधि सिंह ने बताया कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि रही है. ट्रेनों की आमने-सामने या पीछे से टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कवच प्रणाली को देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. इसी क्रम में रांची रेल मंडल में सर्वे का काम शुरू हुआ है. उन्होंने कहा कि यह तकनीक तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन को भी अधिक सुरक्षित बनाती है और जोखिम की स्थिति में रीयल-टाइम अलर्ट देकर ट्रेन को स्वतः रोकने में सक्षम है.

इन रूटों पर लागू होगी कवच प्रणाली

कवच सिस्टम को रांची, आद्रा, खड़गपुर और चक्रधरपुर रेल मंडलों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख रेल खंडों पर लगाया जाना है. इसमें रांची-टोरी, खड़गपुर-आद्रा, आसनसोल-आद्रा-चांडिल, पुरुलिया-कोटशिला-मुरी और कोटशिला-बोकारो स्टील सिटी सेक्शन शामिल हैं. इन सभी रूटों की कुल लंबाई लगभग 1563 किलोमीटर है.

इस तरह काम करता है कवच

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक कवच प्रणाली रेडियो संचार और उन्नत सिग्नल प्रोसेसिंग तकनीक पर आधारित है. यदि किसी ट्रेन के सामने या पीछे निर्धारित दूरी के भीतर दूसरी ट्रेन मौजूद होती है, तो यह सिस्टम स्वतः हस्तक्षेप कर ट्रेन को रोक देता है. कवच को सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 का प्रमाणन प्राप्त है, जिसे सुरक्षा मानकों में सर्वोच्च श्रेणी माना जाता है.

इस तकनीक के लागू होने से न केवल आमने-सामने की टक्कर, बल्कि पीछे से टक्कर और सिग्नल की अनदेखी जैसी घटनाओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा. कवच प्रणाली को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चलने वाली ट्रेनों के लिए मंजूरी दी गई है और परीक्षणों में यह तीनों प्रमुख जोखिम स्थितियों में प्रभावी साबित हुई है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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