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सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल कर्मचारियों के लिए सुनाया फैसला: बकाया डीए का भुगतान अनिवार्य

DA Case in Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है. राज्य सरकार को बकाया महंगाई भत्ता (डीए) एरियर सहित भुगतान करना होगा. अदालत ने इसके लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने और समयबद्ध भुगतान का निर्देश दिया है.

DA Case in Supreme Court: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) भुगतान करना होगा. अदालत ने कहा कि डीए उनके कानूनी अधिकार में शामिल है और इसे समय पर भुगतान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने आदेश दिया कि 31 मार्च तक बकाया डीए का 25 प्रतिशत कर्मचारियों को दिया जाए और शेष 75 प्रतिशत का भुगतान 15 मई तक पूरा किया जाना चाहिए. इसके अलावा, अदालत ने कहा कि शेष भुगतान के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की जाएगी, जो किस्तों और भुगतान के तरीकों का निर्धारण करेगी.

चार सदस्यीय समिति का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने समिति में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष नियुक्त करने और तीन अन्य सदस्यों को शामिल करने का निर्देश दिया. इस समिति का काम होगा कि बकाया राशि का भुगतान किस किस्त में और किस तरीके से किया जाएगा. अदालत ने कहा कि यह कदम सुनिश्चित करेगा कि कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकार का पूरा लाभ मिले.

पूर्व उच्च न्यायालय के फैसले और देरी

इस मामले की सुनवाई पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में हुई थी, जिसने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था. राज्य सरकार ने इसे चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही छह सप्ताह का समय देकर बकाया डीए का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य सरकार समय पर भुगतान नहीं कर पाई.

बंगाल में डीए की वर्तमान स्थिति

पश्चिम बंगाल सरकार कर्मचारियों को वर्तमान में 18 प्रतिशत दर से महंगाई भत्ता देती है, जबकि केंद्रीय कर्मचारियों को यह 58 प्रतिशत मिलता है. इस अंतर के कारण राज्य कर्मचारियों का भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों के मुकाबले काफी कम रह गया है. कई वर्षों से भुगतान अनियमित रहा है, जिससे कर्मचारियों ने अदालत का रुख किया.

बजट घोषणाएं और डीए का इतिहास

पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि महंगाई भत्ता में 300 प्रतिशत वृद्धि की जाएगी. इसके बाद 1 अप्रैल से कर्मचारियों को नई दर का भुगतान शुरू हुआ. राज्य कर्मचारियों के अलावा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, पंचायत और नगरपालिका कर्मचारी भी इसी दर से डीए पाते हैं.

केंद्र और राज्य कर्मचारियों के बीच अंतर

केंद्र सरकार ने पिछले साल जुलाई में डीए को 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया. अगर आठवां वेतन आयोग लागू होता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के भत्ते में और वृद्धि होगी, जिससे राज्य और केंद्र के बीच अंतर और बढ़ जाएगा.

कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकार के अनुसार डीए मिलने की प्रक्रिया सुनिश्चित हो गई है. चार सदस्यीय समिति के गठन और समयबद्ध भुगतान से राज्य सरकार अब कर्मचारियों के बकाया भत्ते को निपटाने के लिए बाध्य होगी.

इसे भी पढ़ें-भारत–बांग्लादेश सीमा पर कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी, नई रेल लाइन परियोजनाएं शुरू

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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