Aurangabad News : औरांगाबाद में मदनपुर प्रखंड के बादम जंगल स्थित रानीकोला इलाके में अवैध अफीम की खेती की खबर मिलने पर वन विभाग और उत्पाद विभाग हरकत में आए. अधिकारियों को लगातार संकेत मिल रहे थे कि घने जंगलों के भीतर बड़े पैमाने पर अफीम बोई गई है. सूचना की पुष्टि के लिए विभागीय स्तर पर मंथन हुआ और संयुक्त टीम गठित की गई. टीम ने इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए योजनाबद्ध तरीके से अभियान तय किया. स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रखा गया ताकि कार्रवाई के दौरान कोई बाधा न आए. अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई जरूरी होती है. इसी रणनीति के तहत आगे की पूरी रूपरेखा तैयार की गई.
तस्वीरों के आधार पर जगहों की पहचान हुई पक्की
कार्रवाई से पहले आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया और ड्रोन से पूरे जंगल क्षेत्र की निगरानी कराई गई. ड्रोन कैमरों में कई स्थानों पर संदिग्ध खेती के स्पष्ट दृश्य सामने आए. तस्वीरों के आधार पर उन जगहों की पहचान पक्की की गई जहां अफीम लगी थी. इसके बाद टीम पैदल और वाहनों से चिन्हित स्थानों तक पहुंची. दुर्गम रास्तों और जंगली इलाकों के कारण अभियान आसान नहीं था. फिर भी अधिकारियों ने सतर्कता के साथ इलाके को घेरा. पुष्टि होते ही अवैध फसल नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
चार एकड़ में लगी फसल उजाड़ी
डीएफओ रूचि सिंह के नेतृत्व में पहुंचे दल ने रानीकोला के पास फैली अफीम की फसल को नष्ट किया. विभागीय आकलन के अनुसार करीब चार एकड़ क्षेत्र में अफीम की खेती की गई थी. टीम ने मौके पर ही पौधों को उखाड़कर और रौंदकर पूरी फसल खत्म कर दी. अधिकारियों का कहना है कि अवैध खेती को किसी भी हाल में पनपने नहीं दिया जाएगा. अभियान के दौरान वनपाल रौनक कुमार समेत कई वनरक्षी मौजूद रहे. कार्रवाई पूरी होने तक इलाके की निगरानी जारी रखी गई. इसके बाद टीम ने अन्य संभावित ठिकानों की ओर रुख किया.
अन्य इलाकों पर भी नजर
ढेलवा दोहर, धमधमा, फटिया, लंगूराही, परसा, बजारी, सागरपुर और पोथनिया समेत कई स्थानों को भी चिन्हित किया गया है. इन इलाकों में समय-समय पर तलाशी और नष्टिकरण अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जंगल क्षेत्रों का लगातार ड्रोन से निरीक्षण होगा. मदनपुर थाना क्षेत्र में इससे जुड़े कई मामले पहले भी दर्ज किए जा चुके हैं. प्रशासन अवैध खेती करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है. स्थानीय लोगों से भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की गई है. विभाग ने साफ किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा.
अवैध कमाई पर किया चोट
जानकारों के मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में अफीम की खेती अवैध कमाई का जरिया रही है. इस धंधे से मिलने वाले पैसे का उपयोग हथियार और रसद जुटाने में किया जाता था. सुरक्षा दबाव बढ़ने के बाद ऐसे नेटवर्क कमजोर पड़े हैं. इसके बावजूद कुछ स्थानों पर चोरी-छिपे खेती की कोशिशें होती रहती हैं. प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय मान रहा है. लगातार हो रही कार्रवाई से ऐसे तत्वों में हड़कंप है. अधिकारियों का कहना है कि अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना लक्ष्य है.
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