Bihar News : बिहार के भागलपुर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 619 करोड़ 58 लाख 70 हजार 662 रुपये 50 पैसे का बजट पारित कर दिया है. बजट में 26 लाख 10 हजार 21 रुपये 90 पैसे का लाभ अनुमानित किया गया है. सशक्त स्थायी समिति की बैठक में आय, व्यय, अधूरी योजनाओं, राजस्व बढ़ोतरी और भविष्य की विकास रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई.
बैठक में नगर सरकार और कैबिनेट की मौजूदगी में यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि अब विकास की परिभाषा को केवल सड़क और नाला निर्माण तक सीमित नहीं रखा जायेगा, बल्कि नागरिक सुविधाओं, राजस्व सुदृढ़ीकरण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर विशेष फोकस किया जायेगा.
पिछले साल के अनुभव से सबक
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 847 करोड़ 11 लाख 68 हजार 970 रुपये का बजट पारित किया गया था और 41 लाख 19 हजार 828 रुपये 40 पैसे का लाभ दर्शाया गया था. परंतु आंकड़ों की समीक्षा में सामने आया कि स्वीकृत प्रावधानों के बावजूद वास्तविक खर्च करीब 80 करोड़ रुपये तक ही सिमट गया.
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आय लगभग 188 करोड़ रुपये दर्ज की गयी और मार्च अंत तक 244.9 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया गया. समिति के सदस्यों ने इस पर असंतोष जताया कि जब बजट प्रावधान मौजूद था, तो योजनाएं धरातल पर क्यों नहीं उतर सकीं.
कई सदस्यों ने कहा कि कम खर्च का मतलब यह नहीं कि वित्तीय अनुशासन बेहतर है, बल्कि यह विकास की गति में कमी को भी दर्शाता है. इसीलिए 2026-27 के बजट को “जमीन पर परिणाम” से जोड़ने की जरूरत बतायी गयी.
राजस्व बढ़ेगा तो बढ़ेगा विकास
- नये बजट में राजस्व के स्रोतों को मजबूत करने की स्पष्ट रणनीति सामने आयी है.
- वार्ड स्तर पर विज्ञापन से आय संग्रह का लक्ष्य तीन करोड़ रुपये रखा गया है.
- निगम की गाड़ियों पर भी विज्ञापन लगाकर अतिरिक्त आमदनी की योजना है.
- घर से माइकिंग या दीवार लेखन को भी विज्ञापन की श्रेणी में लाने का निर्णय हुआ है.
- ट्रेड लाइसेंस के लिए 20 हजार दुकानों को ऑन-बोर्डिंग करने और बकाया वसूली की तैयारी है.
- निगम का मानना है कि स्थानीय स्तर पर आय बढ़ेगी तो बाहरी अनुदान पर निर्भरता कम होगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आयेगी.
रोड-नाला से आगे: नागरिक सुविधाओं पर जोर
बैठक में साफ कहा गया कि अब विकास की दिशा बदलेगी. सड़क और नाला निर्माण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शहर की बढ़ती आबादी और जरूरतों को देखते हुए अन्य सुविधाओं पर भी समान रूप से निवेश जरूरी है.
- सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान.
- स्वच्छता रैंकिंग गिरने से बचाने के लिए 10 ट्रैक्टर खरीदने का निर्णय.
- खाली जमीनों की पहचान कर मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना.
- म्यूटेशन शुल्क में संशोधन का प्रस्ताव.
मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने कहा —रोड नाला सिर्फ विकास का पैमाना नहीं. आगे बढ़कर करना होगा काम.
नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने कहा—बजट एक दर्पण है. राज्य और केंद्र से मिलने वाले फंड के साथ स्थानीय अर्निंग को होती है.
स्ट्रीट लाइट योजना: तकनीकी अड़चन से बदलाव तक
लंबित स्ट्रीट लाइट योजना पर बैठक में तीखी चर्चा हुई.
पहले 5068 नये पोलों पर सेंसर युक्त लाइट लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन तकनीकी कारणों से प्रक्रिया अटक गयी. अब सेंसर हटाकर सामान्य लाइट लगाने का निर्णय लिया गया है.
200 नयी लाइटों के लिए कोटेशन तैयार है और निर्देश दिया गया है कि सामान्य बोर्ड बैठक से पहले टेंडर जारी कर मार्च अंत तक लाइट लगाने की शुरुआत हो.
मेंटेनेंस के लिए पूर्व एजेंसी के साथ एग्रीमेंट की भी बात कही गयी.
अतिक्रमण पर कड़ा रुख
- शहर की मुख्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है.
- सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जायेगा.
- बार-बार अतिक्रमण करने वालों पर अधिक दंड लगाया जायेगा.
- जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल की संख्या बढ़ाने और अभियान के लिए वाहन या बाइक खरीदने की छूट दी गयी है.
- नगर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि जुर्माना “औपचारिकता” नहीं होना चाहिए. अगर कोई जुर्माना देकर फिर सड़क घेर लेता है तो यह प्रशासन की विफलता मानी जायेगी.
वार्ड 13 में प्याऊ निर्माण विवाद
वार्ड 13 में प्याऊ निर्माण को लेकर पार्षद रंजीत मंडल ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित स्थल से अलग जगह पर काम कराया जा रहा है और उन्हें जानकारी नहीं दी गयी. साथ ही, उनके द्वारा कराये गये पूर्व कार्यों का भुगतान लंबित होने की शिकायत भी सामने आयी. नगर आयुक्त ने सिटी मैनेजर को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया और लंबित भुगतान की समीक्षा का आश्वासन दिया.
“लाभ है तो काम भी दिखे”
वार्ड 21 के पार्षद संजय सिन्हा ने कहा कि लाभ का बजट जनता के बीच तभी प्रभाव डालेगा जब वार्डों में वास्तविक काम दिखे. उन्होंने कहा कि अगर विकास नहीं हुआ तो जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित होगी और चुनावी परिणाम पर असर पड़ेगा.
निगम का अपना होगा पेट्रोल पंप
नगर निगम ने अपने स्वामित्व में पेट्रोल पंप खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. पहले दीपनगर का सुझाव था, लेकिन अब सिंकदपुर को अधिक उपयुक्त स्थान माना गया है.
- जमीन लीज पर नहीं दी जायेगी.
- कर्मचारी निगम के होंगे.
- प्रारंभिक चरण में तीन से चार स्थानों पर पंप खोलने की योजना.
निगम के पास बड़ी संख्या में वाहन हैं, जिससे नियमित खपत सुनिश्चित होगी और राजस्व का नया स्रोत विकसित होगा.
लीज पर दी जमीनों की समीक्षा
बैठक में लीज पर दी गयी जमीनों की समीक्षा का निर्णय लिया गया. नाथनगर, कंपनीबाग, घंटाघर और भूतनाथ मंदिर रोड क्षेत्र की जमीनों की स्थिति पर चर्चा हुई. निर्देश दिया गया कि सभी लीज मामलों का अध्ययन कर आवश्यकता पड़ने पर निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाये.
अन्य प्रमुख निर्णय
- 580 वर्गफीट से कम क्षेत्रफल पर भी नक्शा अनिवार्य.
- बिना नक्शा बने भवनों को नियमित कराने की प्रक्रिया.
- 10 मार्च तक लैपटॉप टेंडर फाइनल करने का निर्देश.
- ट्रेड लाइसेंस नहीं लेने वाले दुकानों की विशेष जांच.
नगर निगम ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 2026-27 केवल कागजी लाभ का वर्ष नहीं होगा, बल्कि राजस्व सुदृढ़ीकरण, जवाबदेही और जमीनी विकास की कसौटी पर परखा जायेगा.
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