Kolkata rail : चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाओं को लेकर पूर्व रेलवे ने गंभीर चिंता जतायी है और लोगों से इस खतरनाक प्रवृत्ति को तुरंत रोकने की अपील की है. रेलवे प्रशासन ने कहा है कि यह केवल शरारत या लापरवाही नहीं, बल्कि ऐसा अपराध है जो यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है. ट्रेन की खिड़की, कोच और इंजन पर फेंका गया एक पत्थर किसी मासूम बच्चे, बुजुर्ग, महिला या सामान्य यात्री को गंभीर रूप से घायल कर सकता है. रेलवे ने साफ किया है कि ट्रेनें केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति हैं, जिनकी सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है.
जागरूकता के बावजूद नहीं थम रहीं घटनाएं
पूर्व रेलवे ने बताया कि रेल पटरियों से सटे इलाकों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग खासकर बच्चे और स्थानीय समुदाय इस खतरे को समझ सकें. इसके बावजूद 2026 में अब तक पत्थरबाजी की कई घटनाएं दर्ज की गयी हैं. रेलवे के आंकड़ों के अनुसार हावड़ा मंडल में 6, सियालदह मंडल में 4, आसनसोल मंडल में 6 और मालदा मंडल में 5 घटनाएं सामने आयी हैं. इस तरह कुल 21 मामले दर्ज किये गये हैं. इनमें 11 मामलों का खुलासा किया जा चुका है और 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. केवल पश्चिम बंगाल के भीतर ही 12 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 7 मामलों का पता लगाया गया और 10 लोगों को पकड़ा गया. रेलवे ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए कहा है कि यह केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा से जुड़ा अपराध है.
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बच्चों की शरारत नहीं, जानलेवा खतरा
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कई बार लोग इसे बच्चों की शरारत या मामूली हरकत मान लेते हैं, जबकि हकीकत इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है. तेज रफ्तार से चलती ट्रेन पर फेंका गया पत्थर निश्चित रूप से किसी हिस्से से टकराता है और उसका असर बेहद गंभीर हो सकता है. इससे खिड़कियों के शीशे टूट सकते हैं, कोच को नुकसान हो सकता है और अंदर बैठे यात्रियों को चोट लग सकती है. रेलवे का मानना है कि पटरियों के आसपास रहने वाले परिवारों को इस बारे में खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है. माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को समझायें कि ट्रेन को निशाना बनाना कोई खेल नहीं, बल्कि ऐसा कदम है जो किसी की जिंदगी तबाह कर सकता है.
राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान, समाज को भी चोट
पूर्व रेलवे ने अपनी अपील में यह भी कहा है कि ट्रेनें देश की प्रगति, कनेक्टिविटी और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का बड़ा आधार हैं. इन्हें नुकसान पहुंचाना किसी बाहरी चीज को तोड़ना नहीं, बल्कि अपनी ही राष्ट्रीय संपत्ति को चोट पहुंचाना है. रेलवे प्रशासन ने लोगों से कहा है कि ट्रेन के हर डिब्बे में कोई न कोई परिवार, छात्र, मजदूर, नौकरीपेशा व्यक्ति या बीमार यात्री सफर कर रहा होता है. ऐसे में एक पत्थर सिर्फ लोहे या शीशे पर नहीं लगता, बल्कि किसी इंसान की सुरक्षा और भरोसे पर हमला करता है. रेलवे ने समुदायों से अपील की है कि वे अपने आसपास ऐसे किसी भी व्यवहार को रोकें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभायें.
कानून में सख्त सजा, CCTV से हो रही निगरानी
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन पर पत्थर फेंकना रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. प्रशासन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ट्रेन को नुकसान पहुंचाने या यात्रियों को खतरे में डालने के इरादे से ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है. लापरवाही या जल्दबाजी में की गयी ऐसी हरकत भी कानून की नजर में अपराध है. पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि पटरियों और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और CCTV कैमरों के जरिये गतिविधियों पर नजर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है, इसलिए किसी को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि ऐसी हरकत छिपी रह जाएगी.
लोगों से अपील, पत्थर नहीं जिम्मेदारी उठाइए
पूर्व रेलवे ने लोगों से अपील की है कि यदि वे किसी को ट्रेन की ओर पत्थर उठाते या फेंकने की तैयारी करते देखें, तो उसे तुरंत रोकें और समझायें. प्रशासन का कहना है कि समय रहते किया गया एक छोटा हस्तक्षेप किसी बड़े हादसे को टाल सकता है. रेलवे ने इस मुहिम को केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी सवाल बताया है. अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षित, सुंदर और व्यवस्थित रेलवे व्यवस्था तभी संभव है, जब समाज खुद भी इसकी सुरक्षा में भागीदार बने. रेलवे ने साफ संदेश दिया है कि ट्रेन पर पत्थर फेंकना मजाक नहीं, बल्कि ऐसा अपराध है जिसकी कीमत किसी की जान, किसी का भविष्य और समाज की सुरक्षा से चुकानी पड़ सकती है.
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