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नकली बायोमैट्रिक से खातों की सफाई, करोड़ों की ठगी में सीएसपी संचालक गिरफ्तार

Bihar Crime News : बिहार में भागलपुर जिले के पीरपैंती और कटिहार इलाके के कई बैंक खातों से रकम गायब होने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. जांच के दौरान एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो फर्जी बायोमैट्रिक के सहारे लाभुकों के खातों तक पहुंच बना रहा था. कार्रवाई में भारी मात्रा में संदिग्ध बैंकिंग सामग्री और नकली फिंगरप्रिंट बरामद किए गए हैं.

Bihar Crime News : बिहार के भागलपुर में साइबर ठगी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश कर हुआ है. जिला पुलिस ने एक सीएसपी संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. आरोप है कि उसने सरकारी योजनाओं के लाभुकों समेत कई खाताधारकों के बैंक खातों से लंबे समय तक अवैध निकासी की. पुलिस के अनुसार, यह काम बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें नकली बायोमैट्रिक पहचान का इस्तेमाल कर बैंकिंग सिस्टम को धोखा दिया जाता था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए पीरपैंती और कटिहार क्षेत्र के अनेक खातों को निशाना बनाया गया. इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध के ऐसे तौर-तरीकों को लेकर पुलिस और भी सतर्क हो गई है.

छापेमारी में खुला बड़ा खेल

मामले की शुरुआत तब हुई जब पीरपैंती क्षेत्र के एक व्यक्ति ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि डीबीटी और अन्य रकम खातों से बिना अनुमति निकल रही है. शिकायत को गंभीर मानते हुए वरीय अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई. इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध ठिकाने की निगरानी की और फिर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया.

जांच टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां से कई ऐसे सामान बरामद हुए, जिन्होंने पूरे खेल की परतें खोल दीं. पुलिस ने मौके से 320 सिलिकॉन आधारित बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट, 120 एटीएम कार्ड, 70 पासबुक, दो फिंगरप्रिंट कैप्चर मशीन, चार कैश रजिस्टर, एक खाता खोलने से जुड़ा रजिस्टर और एक लैपटॉप जब्त किया. पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित जालसाजी तंत्र का हिस्सा हो सकता है.

सरकारी लाभुकों से लेकर आम खाताधारकों तक बने शिकार

पूछताछ और प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शुरुआत में सिर्फ डीबीटी की रकम को निशाना बनाया जाता था. लेकिन बाद में जिस खाते तक पहुंच बन जाती थी, उसमें आने वाली हर राशि को निकासी के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा. इसमें सरकारी सहायता, परिवार द्वारा भेजी गई रकम, कर्ज की राशि और अन्य निजी लेनदेन भी शामिल थे.

पुलिस को आशंका है कि इस तरीके से कई जरूरतमंद लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया गया, क्योंकि लाभुकों के खाते अक्सर छोटे-छोटे भुगतान के लिए इस्तेमाल होते हैं. जब उनमें से पैसे गायब हुए, तब लोगों को काफी देर बाद इसकी जानकारी मिली. अब तक करीब 35 लोगों ने लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

दूसरे शहर से बनवाए जाते थे नकली अंगूठे

पूछताछ में आरोपी ने यह स्वीकार किया है कि सिलिकॉन से तैयार किए गए नकली बायोमैट्रिक प्रिंट बाहर से मंगवाए जाते थे. पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि इस काम के लिए दूसरे शहरों में मौजूद ऐसे लोगों से संपर्क रखा जाता था, जो किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट की नकल तैयार कर सकते हैं. इस तकनीक का इस्तेमाल कर बैंकिंग प्रक्रिया को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी.

अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई बार भटकाने की कोशिश की, लेकिन लगातार सवाल-जवाब और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई अहम जानकारियां हासिल कर लीं. अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां दूसरे जिलों और राज्यों तक जुड़ने की संभावना को भी खंगाला जा रहा है. फरार एक अन्य संदिग्ध की तलाश भी तेज कर दी गई है.

दो साल से चल रहा था खेल, अब संपत्ति पर भी नजर

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह अवैध गतिविधि पिछले करीब दो वर्षों से चल रही थी. इस दौरान आरोपी ने कितनी रकम निकाली, कितने खातों को प्रभावित किया और उस पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया, इसकी परत-दर-परत जांच की जा रही है. पुलिस अब सिर्फ आपराधिक कृत्य तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उससे अर्जित संभावित संपत्ति का भी हिसाब जुटा रही है.

सूत्रों के मुताबिक, यदि यह साबित होता है कि साइबर धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों से चल-अचल संपत्ति बनाई गई है, तो जब्ती की कार्रवाई का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया जा सकता है. वहीं, पीड़ितों के लिए राहत की बात यह है कि जांच टीम आरोपी के बैंक खातों, लेनदेन और संपत्ति का रिकॉर्ड खंगालकर गुम हुई रकम का सुराग तलाश रही है. इससे कुछ पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलने की संभावना भी बनी हुई है.

पुलिस की अगली चुनौती

यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में बैंकिंग सेवाओं के दुरुपयोग की गंभीर चेतावनी भी है. सीएसपी केंद्रों पर भरोसा करने वाले लोगों के लिए यह घटना चिंता बढ़ाने वाली है. पुलिस अब यह भी देख रही है कि कहीं इस तरह के और केंद्र या एजेंट इसी तरीके से लोगों के खातों तक पहुंच तो नहीं बना रहे.

जांच आगे बढ़ने के साथ कई और खुलासे होने की उम्मीद है. फिलहाल पुलिस का जोर फरार सहयोगियों की गिरफ्तारी, तकनीकी साक्ष्य जुटाने और पीड़ितों की आर्थिक क्षति का पूरा हिसाब निकालने पर है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम या नए कनेक्शन सामने आ सकते हैं.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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