Bihar News : बिहार में संवेदनशील अपराधों की जांच और निगरानी को और सशक्त बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. अब महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और मानव तस्करी से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी विशेष पुलिस उपाधीक्षकों को सौंप दी गई है, जिससे इन केसों पर अधिक फोकस संभव हो सकेगा.
पहले किसके पास थी जिम्मेदारी
अब तक इन मामलों की मॉनिटरिंग अनुमंडल स्तर के पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाती थी. लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और आपराधिक जिम्मेदारियों के कारण वे इन विशेष श्रेणी के मामलों को अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे थे. इसी स्थिति को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है.
2018 में बनाए गए थे विशेष पद
राज्य सरकार ने कुछ वर्ष पहले ही अपराध अनुसंधान तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में विशेष अपराध से जुड़े पुलिस उपाधीक्षक के पद सृजित किए थे. कुल 132 पदों पर नियुक्ति कर उन्हें पूरे जिले में काम करने का अधिकार दिया गया था. अब इन अधिकारियों की भूमिका और व्यापक कर दी गई है.
इन इकाइयों को भी किया गया शामिल
नई व्यवस्था के तहत महिला थाना, एससी-एसटी थाना और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के मामलों की निगरानी भी अब यही विशेष डीएसपी करेंगे. साथ ही, मानव तस्करी निरोध इकाइयों को महिला थाना परिसर में ही संचालित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे बेहतर समन्वय हो सके.
क्या होगा फायदा
इस बदलाव से उम्मीद है कि संवेदनशील मामलों की जांच में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा. साथ ही, अभियोजन की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और संगठित तरीके से आगे बढ़ेगी.
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