Bengal Election: पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. आयोग ने 23 विधानसभा क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों को बदलने का आदेश जारी किया है. जादवपुर, कांथी, हल्दिया, मैना और सोनामुखी समेत कई सीटों पर अब नए अधिकारी चुनावी जिम्मेदारी संभालेंगे. गुरुवार देर रात जारी निर्देश में साफ कहा गया कि जिन अधिकारियों की नई तैनाती की गई है, उन्हें प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपना पदभार संभाल लेना होगा. इस फैसले को चुनावी निष्पक्षता और प्रशासनिक नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की पूरी प्रक्रिया को संचालित करने में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.
भवानीपुर को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता
इस बदलाव के बीच भवानीपुर सीट खास तौर पर चर्चा में आ गई है. यह सीट इस बार राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यहां मुकाबला हाई-प्रोफाइल होने की वजह से हर प्रशासनिक नियुक्ति पर भी राजनीतिक नजर बनी हुई है. तृणमूल कांग्रेस की ओर से खास तौर पर एक अधिकारी की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे. पार्टी ने आरोप लगाया था कि संबंधित अधिकारी की तैनाती निष्पक्ष चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है. इसी कारण भवानीपुर को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. माना जा रहा है कि इसी दबाव और आपत्ति के बाद आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया.
सुरजीत रॉय की नियुक्ति पर तृणमूल ने जताई आपत्ति
पिछले दिनों आयोग ने 73 रिटर्निंग अधिकारियों को बदलने का फैसला किया था. उसी सूची में सुरजीत रॉय का नाम भी शामिल था. वे पहले नंदीग्राम में बीडीओ के रूप में कार्यरत थे. तृणमूल कांग्रेस ने उनके भवानीपुर में रिटर्निंग ऑफिसर बनाए जाने पर कड़ा विरोध जताया. पार्टी का कहना था कि यह नियुक्ति सामान्य प्रशासनिक बदलाव से अलग दिखाई देती है और इससे राजनीतिक संदेश भी निकलता है. तृणमूल की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही सीटें इस बार राज्य की राजनीति के केंद्र में हैं. पार्टी इस पूरे मामले को लेकर शुरू से सतर्क रुख अपनाए हुए है.
ममता की चिट्ठी के बाद आयोग ने मांगे तीन नाम
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर सीधे चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने अपने पत्र में कहा था कि संबंधित अधिकारी की तैनाती निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े करती है और इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. इसके बाद आयोग ने मामले पर तेजी से कार्रवाई शुरू की. जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस ने दिल्ली स्थित चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, दोनों को अलग-अलग पत्र भेजे थे. इसके बाद आयोग ने राज्य सरकार से नए विकल्पों की मांग की. सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव से तीन संभावित नाम भेजने को कहा गया है, ताकि भवानीपुर समेत संवेदनशील सीटों पर नियुक्तियों को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सके.
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