Bihar Bijli: बिहार में निर्बाध बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. बक्सर जिले के चौसा में बन रहे थर्मल पावर प्लांट की दूसरी यूनिट को जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है. इसके चालू होते ही राज्य को बिजली उत्पादन के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. जानकारों का मानना है कि इस यूनिट के संचालन में आने से बिहार की बिजली व्यवस्था पहले के मुकाबले और मजबूत होगी. इससे बाहर से बिजली खरीदने की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है और उपभोक्ताओं को सप्लाई में स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी.
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दूसरी ओर, राज्य में बिजली उपभोग और बिलिंग के तरीके में भी बदलाव होने जा रहा है. 1 अप्रैल से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले लाखों उपभोक्ताओं के लिए नई दर प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे बिजली खर्च का हिसाब पहले से अलग तरीके से तय होगा.
दूसरी यूनिट चालू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी
चौसा थर्मल पावर परियोजना की एक यूनिट 660 मेगावाट क्षमता की है और दूसरी यूनिट के शुरू होने के बाद यहां कुल उत्पादन क्षमता 1320 मेगावाट तक पहुंच जाएगी. इस परियोजना में बिहार की हिस्सेदारी भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में राज्य को स्थानीय स्तर पर अधिक बिजली उपलब्ध हो सकेगी. ऊर्जा क्षेत्र के जानकार इसे बिहार के लिए एक अहम उपलब्धि मान रहे हैं, क्योंकि इससे आने वाले समय में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और भरोसेमंद बनाया जा सकता है. खासकर बढ़ती खपत और गर्मी के मौसम में यह परियोजना राज्य के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
लंबे समय तक अटका रहा था चौसा प्रोजेक्ट
यह परियोजना कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से निर्माणाधीन रही है. इसकी शुरुआत कई साल पहले हुई थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर उठे विवादों ने इसकी रफ्तार को कई बार धीमा कर दिया. किसानों के विरोध और प्रशासनिक स्तर पर आई अड़चनों के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी. हालांकि अब धीरे-धीरे इसका काम आगे बढ़ा और पहली यूनिट के बाद दूसरी यूनिट को भी चालू करने की दिशा में तैयारी तेज हुई है. यही वजह है कि अब इस प्रोजेक्ट को बिहार की बिजली व्यवस्था के लिए निर्णायक माना जा रहा है.
एसजेवीएन कर रही है परियोजना का निर्माण
चौसा पावर प्रोजेक्ट का निर्माण एसजेवीएन की ओर से कराया जा रहा है. यह केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार से जुड़ा संयुक्त उपक्रम है. परियोजना की पहली यूनिट पहले ही राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ी जा चुकी है और उसके बाद अब दूसरी यूनिट की शुरुआत पर ध्यान दिया जा रहा है. यह संयंत्र सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित बताया जा रहा है, जिसे सामान्य थर्मल तकनीक की तुलना में अधिक प्रभावी और अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाने वाला माना जाता है. इस बीच बिहार सरकार भी ऊर्जा क्षेत्र में सिर्फ पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है.
1 अप्रैल से बिजली बिल का तरीका बदल जाएगा
बिहार के लाखों उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल से बिजली उपयोग का अनुभव बदलने वाला है. राज्य में 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं पर नई बिलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी. इसके तहत अब पूरे दिन बिजली की कीमत एक जैसी नहीं रहेगी. बिजली की दर समय के हिसाब से तय होगी. यानी दिन के किस हिस्से में आपने बिजली का इस्तेमाल किया, इसका असर आपके खर्च पर पड़ेगा. इस नई प्रणाली को ‘टाइम ऑफ डे’ यानी ToD टैरिफ कहा जा रहा है.
अब समय देखकर कटेगा बैलेंस
नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्मार्ट मीटर यह दर्ज करेगा कि उपभोक्ता किस समय कितनी बिजली खर्च कर रहा है. उसी आधार पर उसके बैलेंस से कटौती होगी. आसान भाषा में समझें तो अब सिर्फ यूनिट खर्च मायने नहीं रखेगा, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बिजली का उपयोग दिन या रात के किस समय किया गया. इस व्यवस्था का मकसद खपत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करना और लोड मैनेजमेंट को संतुलित बनाना माना जा रहा है. हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव शुरुआत में समझने वाला जरूर होगा.
बिहार की बिजली व्यवस्था में एक साथ दो बड़े बदलाव
एक ओर चौसा की दूसरी यूनिट से बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नई दर व्यवस्था लागू हो रही है. ऐसे में बिहार की बिजली व्यवस्था इस समय दो बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है. यदि उत्पादन और बिलिंग दोनों स्तर पर ये बदलाव प्रभावी तरीके से लागू हुए, तो आने वाले समय में राज्य के उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर बिजली आपूर्ति और नई उपयोग प्रणाली दोनों का अनुभव होगा.
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