Nitish Kumar Resignation Update : बिहार की राजनीति इस समय बेहद गर्म हो चुकी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सियासी हलकों में अटकलों का दौर तेज हो गया है. माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य की राजनीति से आगे बढ़कर केंद्र में अधिक सक्रिय रूप में दिखाई दे सकती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और बिहार के मुख्यमंत्री पद को लेकर आगे की तस्वीर कब साफ होगी. फिलहाल, उनके इस फैसले ने सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व बदलाव की चर्चा को नई रफ्तार दे दी है. अब सबकी नजर इसी पर टिकी है कि बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में कौन सा बड़ा घटनाक्रम सामने आता है.
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पहले चरण की प्रक्रिया पूरी
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार का सक्रिय राज्य राजनीति से अलग होने का यह कदम एक तय रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा है. इस प्रक्रिया का पहला चरण अब पूरा हो चुका है. उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. यह कदम राज्यसभा की सदस्यता बनाए रखने की प्रक्रिया से जुड़ा माना जा रहा है. पहले से ही यह चर्चा थी कि उन्हें 14 दिनों के भीतर विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी और अब ऐसा हो भी गया है. इस तरह राजनीतिक रूप से उनका पहला औपचारिक कदम पूरा हो चुका है.
अब दूसरे चरण पर सबकी नजर
अब सबसे ज्यादा चर्चा दूसरे और निर्णायक चरण को लेकर हो रही है. पहले यह संकेत सामने आए थे कि नीतीश कुमार 6 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की प्रक्रिया पूरी करेंगे. हालांकि अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कुछ नया अपडेट सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में एक बार फिर उत्सुकता बढ़ा दी है.
शपथ को लेकर क्या है नई जानकारी
ताजा जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य चुने जाने के बाद शपथ लेने के मामले में उपलब्ध समयसीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करेंगे. नियम के तहत उनके पास शपथ लेने के लिए छह महीने तक का समय है. उनका कार्यकाल 10 अप्रैल से प्रभावी माना जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उनके पास औपचारिक शपथ के लिए पर्याप्त समय मौजूद है. इसी संदर्भ में पुराने उदाहरणों की भी चर्चा हो रही है, जहां निर्वाचित सदस्य ने निर्धारित समयसीमा के भीतर बाद में शपथ ली थी.
क्या कुछ और समय तक सीएम बने रहेंगे?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार इस छह महीने की समयसीमा का उपयोग करते हुए कुछ और समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं. लेकिन जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार ऐसा होने की संभावना नहीं मानी जा रही है. संकेत यही हैं कि वे इस विकल्प को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं हैं और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी की जा सकती है.
अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक बदल सकती है तस्वीर
मिली जानकारी के अनुसार बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो सकती है. कहा जा रहा है कि 14 अप्रैल तक नई सरकार के गठन की स्थिति बन सकती है, यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ा. संभावना जताई जा रही है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद बिहार लौटेंगे और उसके बाद यहां नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी. इस तरह बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का एक बड़ा अध्याय अप्रैल के मध्य तक सामने आ सकता है.
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