Bihar News: भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद फिर बढ़ी है. इस परियोजना के लिए जरूरी दस्तावेज नेपाल सरकार को सौंपे जा चुके हैं और अब उसकी ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने का इंतजार किया जा रहा है. जैसे ही यह मंजूरी मिलती है, इस अंतरराष्ट्रीय रेल परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है.
रेल मंत्रालय की एजेंसी ने तैयार की पूरी रिपोर्ट
इस प्रस्तावित रेल लाइन को लेकर सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है. यह काम भारतीय रेल मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी RITES Limited ने किया है. तैयार रिपोर्ट के अनुसार, रक्सौल से काठमांडू तक बिछाई जाने वाली रेल लाइन की कुल लंबाई लगभग 136 किलोमीटर रखी गई है.
पहाड़ी भूभाग के कारण निर्माण होगा चुनौतीपूर्ण
यह रेल मार्ग सामान्य मैदानी रूट की तरह नहीं होगा, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरेगा. इसी वजह से परियोजना में बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों का निर्माण प्रस्तावित किया गया है. योजना के तहत 39 सुरंगें, 41 बड़े पुल, 259 छोटे पुल, 32 रोड ओवरब्रिज और 53 अंडरपास बनाए जाने हैं. इस पूरी परियोजना पर 60 हजार करोड़ रुपये से 70 हजार करोड़ रुपये तक खर्च आने का अनुमान जताया गया है.
दिल्ली से नेपाल की राजधानी तक रेल नेटवर्क जोड़ने की योजना
इस परियोजना को सिर्फ सीमावर्ती शहरों के बीच रेल संपर्क तक सीमित नहीं माना जा रहा है. इसका उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच रेल संपर्क को और मजबूत करना है. इसी सोच के तहत इसे आगे चलकर दिल्ली और काठमांडू के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी की दिशा में भी अहम माना जा रहा है. इस परियोजना को लेकर भारत और नेपाल के बीच वर्ष 2016 में समझौता हुआ था. उस समय नेपाल में के.पी. शर्मा ओली की सरकार थी.
इस रूट पर प्रस्तावित हैं 13 स्टेशन
रक्सौल से काठमांडू तक प्रस्तावित रेल मार्ग पर कुल 13 स्टेशनों के विकास की योजना बनाई गई है. इनमें रक्सौल, वीरगंज, बगही, पिपरा, डुमरवाना, चंद्रपुर, शिखरपुर, सिसनेरी और काठमांडू जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं. इस लाइन के शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई को भी सुविधा मिल सकती है.
यात्रा समय में आएगी बड़ी कमी
अभी रक्सौल से काठमांडू तक पहुंचने में सड़क मार्ग से लगभग 6 घंटे का समय लगता है. लोग बस या निजी वाहन से यह दूरी तय करते हैं. लेकिन यदि यह रेल सेवा शुरू होती है, तो यही सफर करीब 2 से 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. इसके साथ ही संभावित किराया 200 से 300 रुपये के बीच रहने की उम्मीद है. इससे यात्रा कम समय में और कम खर्च में संभव हो सकेगी.
व्यापारिक गतिविधियों को भी मिल सकता है फायदा
वर्तमान में रक्सौल से लगभग 6 किलोमीटर दूर नेपाल के वीरगंज में स्थित सिरिसिया ड्राई पोर्ट तक मालगाड़ियों का संचालन होता है. इस पोर्ट तक कोलकाता, विशाखापट्टनम और गुजरात जैसे इलाकों से सामान पहुंचता है. यदि नई रेल लाइन शुरू होती है, तो भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक आवाजाही को और रफ्तार मिल सकती है.
सांसद संजय जायसवाल ने दी जानकारी
पश्चिम चंपारण के सांसद संजय जायसवाल ने बताया है कि परियोजना की DPR नेपाल सरकार को सौंप दी गई है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है. साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि नेपाल में नई सरकार बनने के बाद इस परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
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