Bhagalpur News: टीएनबी कॉलेज में नामांकन निःशुल्क करने को लेकर जारी नोटिस के बाद छात्र राजनीति तेज हो गई है. कॉलेज प्रशासन की ओर से नोटिस सामने आते ही इस मुद्दे पर छात्र राजद और एबीवीपी आमने-सामने आ गए हैं. एक तरफ एबीवीपी इसे अपने आंदोलन की जीत बता रही है, तो दूसरी ओर छात्र राजद का कहना है कि इस मामले में पहले ही सहमति बन चुकी थी और कुछ लोग इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं. इसी विवाद के बीच कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि विश्वविद्यालय के पत्र के आधार पर कुछ वर्गों के छात्रों से नामांकन शुल्क नहीं लिया जाएगा और जिनसे शुल्क लिया जा चुका है, उन्हें राशि लौटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
कॉलेज प्रशासन ने किसे दी है शुल्क में राहत
कॉलेज के प्राचार्य डॉ दीपो महतो की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि विश्वविद्यालय से 21 जनवरी 2026 को जारी पत्र के अनुसार कॉलेज के सभी यूजी और पीजी सेमेस्टर में सामान्य पाठ्यक्रम में पढ़ने वाली सभी कोटि की छात्राओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं से नामांकन शुल्क नहीं लिया जाएगा. इस फैसले के बाद कॉलेज में पहले से नामांकन करा चुके पात्र छात्रों के लिए भी राहत की बात सामने आई है.
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों से पहले ही नामांकन शुल्क लिया जा चुका है, उनकी राशि वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस फैसले के बाद कॉलेज परिसर में राहत और राजनीति, दोनों का माहौल एक साथ दिखाई देने लगा है.
छात्र राजद ने कहा- पहले ही हो चुकी थी सहमति
छात्र राजद के टीएनबी कॉलेज अध्यक्ष देव सूरज ने दावा किया कि इस मुद्दे पर तीन अप्रैल को कॉलेज प्राचार्य ने छात्र संगठनों की बैठक बुलाई थी. उनके अनुसार, इस बैठक में छात्र राजद समेत अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. बैठक के दौरान ही प्राचार्य ने यह आश्वासन दे दिया था कि सरकार के पत्र के अनुसार स्नातक और पीजी स्तर पर निःशुल्क नामांकन लागू किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि तीन अप्रैल को सरकारी अवकाश रहने के कारण उसी दिन नोटिस जारी नहीं हो सका था और चार अप्रैल को इसे जारी करने की बात कही गई थी. छात्र राजद की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ छात्र संगठन इस पूरे मामले में अनावश्यक राजनीति कर रहे हैं और खुद को इसका मुख्य चेहरा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
ABVP ने किया प्रदर्शन, कहा- आंदोलन के बाद जारी हुआ आदेश
दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस मुद्दे को लेकर कॉलेज परिसर में धरना-प्रदर्शन किया. शनिवार को परिषद के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कॉलेज पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. उनकी मुख्य मांग थी कि सरकार की योजना के तहत सभी वर्ग की छात्राओं और एससी-एसटी वर्ग के छात्रों का नामांकन पूरी तरह निःशुल्क किया जाए. इसके साथ ही जिन छात्रों से शुल्क लिया जा चुका है, उन्हें वह राशि वापस की जाए.
प्रदर्शन के बाद परिषद नेताओं ने कहा कि कॉलेज प्रशासन से इस विषय पर स्पष्ट नोटिस जारी करने की मांग की जा रही थी. संगठन के कॉलेज अध्यक्ष सुमित सिंह और लक्ष्मण कुमार ने कहा कि प्रशासन ने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय से दिशा-निर्देश के आधार पर जिन छात्रों से शुल्क लिया गया है, उनकी राशि लौटाई जाएगी. प्राचार्य की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने अपना धरना समाप्त कर दिया.
नोटिस को लेकर दोनों संगठनों ने जताया अपना दावा
एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडे ने कहा कि कॉलेज में धरना-प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन ने निःशुल्क नामांकन को लेकर नोटिस जारी किया. उनका कहना है कि तीन अप्रैल को हुई वार्ता में सभी पक्षों के बीच सकारात्मक माहौल जरूर था, लेकिन उसके बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से स्वत: नोटिस जारी नहीं किया गया. ऐसे में आंदोलन करना जरूरी हो गया था.
उन्होंने यह भी कहा कि परिषद लंबे समय से कॉलेजों और पीजी विभागों में सभी वर्ग की छात्राओं और एससी-एसटी छात्रों के लिए निःशुल्क नामांकन की मांग उठाती रही है. अब नोटिस जारी होने के बाद यह मुद्दा छात्र हित के साथ-साथ श्रेय की राजनीति का विषय भी बन गया है. कॉलेज में फिलहाल राहत के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज बनी हुई है.
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