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Jharkhand Train Accident: झारखंड ट्रेन हादसे में 2 यात्रियों की मौत, 30 से ज्यादा घायल, मुआवजे का एलान

Jharkhand Train Accident: झारखंड में 30 जुलाई मंगलवार को बड़ा रेल हादसा हो गया. हावड़ा से मुंबई जाने वाली मुंबई-हावड़ा मेल की कुल 18 बोगियां करीब 04:00 बजे बेपटरी हो गईं. इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गये. घटना के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया, जबकि कई ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है.

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Jharkhand Train Accident: मंगलवार को हावड़ा से मुंबई जाने वाली मुंबई-हावड़ा मेल की कुल 18 बोगियां बेपटरी हो गईं. हादसे में 2 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि 30 से ज्यादा घायल हैं. घटना की सूचना मिलते ही सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया गया. जिन्हें मामूली चोटे आईं, उनका मौके पर ही प्राथमिक उपचार किया गया.

बेपटरी हुए 18 डिब्बे, दो लोगों की मौत

ट्रेन दुर्घटना में हावड़ा-मुंबई मेल (ट्रेन संख्या 12810) के कुल 18 डिब्बे बेपटरी हो गए. इसके अलावा, मालगाड़ी का एक डिब्बा भी प्रभावित हुआ है. इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई और घायल हुए करीब 18 लोग को चक्रधरपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके साथ ही दो यात्री गंभीर रूप से घायल हैं. जिनका उपचार चल रहा है. दुर्घटना में प्रभावित अन्य सभी यात्रियों को बसों, रिजर्व एंबुलेंस और विशेष ट्रेन के माध्यम से चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया, ताकि वे अपनी आगे की यात्रा कर सकें.

इन वजहों से पटरी से उतरती हैं ट्रेनें

  • ट्रेन के पटरी से उतरने की एक वजह नहीं, बल्कि कई वजहें हैं. सबसे मुख्य कारण रेलवे ट्रैक पर मैकेनिकल फॉल्ट यानी रेलवे ट्रैक पर लगने वाले उपकरण का खराब हो जाने को माना जाता है.
  • इसके अलावा ये हादसे उस वक्त होते हैं, जब पटरियों पर दरार पड़ जाती हैं. वहीं, ट्रेन के डिब्बों को बांध कर रखने वाले उपकरण का ढीला होना भी इसका एक कारण हो सकता है.
  • इसके अलावा एक्सेल जिस पर ट्रेन की बोगी रखी होती है, उसका टूटना भी ट्रेन के डिरेल होने की एक संभावित वजह हो सकता है.
  • लगातार चलते रहने के कारण ट्रेन की पटरियों से पहियों का घिस जाना भी ट्रेन के पटरी से उतरने की वजह हो सकता है.
  • गर्मी के मौसम में पटरियों के स्ट्रक्चर में कई बार बदलाव आ जाता है. इसके अलावा तेज चलती ट्रेन को तेज स्पीड से मोड़ना या फिर ब्रेक लगा देना भी ट्रेन के पटरी छोड़ने की वजह हो सकता है.
  • इसे रोकने का एक ही तरीका है मरम्मत कार्य चलता रहे। थोड़ी भी गड़बड़ी नजर आने पर उसे तुरंत ठीक किया जाए.

2022 में रेल दुर्घटनाओं में 38.2% की बढ़ोत्तरी
इस मामले में अगर 2022 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट को देखें, तो साल 2022 की तुलना में 2021 में रेल दुर्घटनाओं में 38.2 फीसदी की वृद्धि देखी गई. रिपोर्ट के अनुसार, 17,993 दुर्घटनाओं में से 19.4 फीसदी महाराष्ट्र में हुई, इसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर रहा है. ज्यादातर हादसों की बड़ी वजह ड्राइवर की गलती, रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़, सिग्नलमैन की लापरवाही और मशीनरी खराबी आदि रहे हैं.

हर साल किया जा रहा है 8 हजार किमी ट्रैक को अपग्रेड
संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई अनुसार, साल 2022 में लगभग 5,200 किमी नई पटरियां बिछाई गईं है. मंत्री ने कहा कि हर साल 8,000 किमी ट्रैक को अपग्रेड किया जा रहा है. वैष्णव ने बताया था कि 100 किमी/घंटा तक की गति से चलने वाली ट्रेनों को समायोजित करने के लिए अधिकांश पटरियों को अपग्रेड किया जा रहा था. एक बड़े हिस्से को 130 किमी/घंटा तक की गति के लिए बढ़ाया जा रहा था, और एक महत्वपूर्ण खंड को अपग्रेड किया जा रहा था। 160 किमी/घंटा तक की हाई स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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