Amit Shah: देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा अब बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है. इस डेडलाइन से ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई, सरकार की नीति और आगे की रणनीति पर विस्तार से अपनी बात रखी. चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ केवल गरीबी, पिछड़ापन या अन्याय नहीं है, बल्कि यह एक सोच और विचारधारा से जुड़ी समस्या है. शाह ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार इस हिंसक विचारधारा को खत्म करने के लिए लगातार सटीक और ठोस कदम उठा रही है. उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा.
आदिवासियों को गुमराह किया गया: अमित शाह
लोकसभा में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि आदिवासी समाज के भोले-भाले लोगों को यह कहकर भटकाया गया कि उनके अधिकार और न्याय की लड़ाई हथियारों के जरिए लड़ी जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो उसका समाधान लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर ही संभव है, हथियार उठाना उसका रास्ता नहीं हो सकता. गृह मंत्री ने साफ कहा कि मोदी सरकार के दौरान ऐसी हिंसक गतिविधियों को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे इलाकों में लंबे समय तक लाल आतंक का असर रहा, जिसकी वजह से वहां के लोग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से दूर रह गए. अब हालात बदल रहे हैं और बस्तर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
#WATCH दिल्ली: लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "…आज़ादी के बाद के 75 सालों में से 60 साल तक सत्ता आपके (कांग्रेस के) हाथों में रही। तो फिर, आज तक आदिवासी समुदाय विकास से वंचित क्यों रहे? असली विकास तो पीएम नरेंद्र मोदी के आने के बाद… pic.twitter.com/qrz5eSi5Gm
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 30, 2026
कांग्रेस पर साधा निशाना, उठाए विकास से जुड़े सवाल
अमित शाह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को भी घेरा. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 75 वर्षों में से करीब 60 साल तक सत्ता कांग्रेस के पास रही, फिर भी आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी विकास क्यों नहीं पहुंच सका. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय तक आदिवासी समुदाय घर, साफ पानी, स्कूल, मोबाइल टावर और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों रहा. शाह ने कहा कि वास्तविक विकास की रफ्तार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही तेज हुई है. उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने इतने वर्षों तक इन क्षेत्रों की अनदेखी की, वही अब जवाब मांग रहे हैं.
#WATCH | Delhi: Speaking in the Lok Sabha on the fight against Naxalism, Union Home Minister Amit Shah says, "…This is our government's policy: talks will be held only with those who lay down their arms; those who use bullets will be answered with bullets." pic.twitter.com/HYyyoBlJfu
— ANI (@ANI) March 30, 2026
हथियार छोड़ने वालों से ही होगी बातचीत
गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की नीति को दोहराते हुए कहा कि सरकार की लाइन बिल्कुल साफ है. उन्होंने कहा कि बातचीत केवल उन्हीं लोगों से की जाएगी जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहेंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग गोली का रास्ता चुनेंगे, उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा. शाह ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार हिंसा और सशस्त्र उग्रवाद के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सलवा जुडूम का भी किया जिक्र
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 5 जुलाई 2011 को नंदिनी सुंदर और अन्य की ओर से दायर याचिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उस समय यह फैसला दिया था कि नक्सलवादियों के खिलाफ राज्य की कार्रवाई गैरकानूनी थी. शाह ने कहा कि इस फैसले के बाद सलवा जुडूम आंदोलन से जुड़े लोगों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया और उनकी हत्याएं की गईं. उन्होंने यह भी कहा कि बाद में सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने. इस संदर्भ में शाह ने कहा कि जो लोग देश में कानून के शासन और व्यवस्था पर भरोसा करते हैं, वे ऐसा चयन नहीं करते.
#WATCH | Delhi: Speaking in the Lok Sabha on the fight against Naxalism, Union Home Minister Amit Shah says, "On July 5, 2011, following a petition filed by Nandini Sundar and others, the Supreme Court, under the leadership of Justice Sudarshan Reddy, ruled that the State's… pic.twitter.com/t1fe9tNCnY
— ANI (@ANI) March 30, 2026
भगत सिंह और बिरसा मुंडा की तुलना पर जताई आपत्ति
गृह मंत्री ने विपक्ष के कुछ सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना नक्सलियों से करना पूरी तरह अनुचित है. उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने उन इलाकों को अपना आधार बनाया जहां शासन-प्रशासन की पहुंच कमजोर थी. शाह ने आरोप लगाया कि वामपंथी उग्रवादियों ने जिन क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाई, वहां विकास को पहुंचने से रोका गया. उन्होंने कहा कि अब मोदी सरकार उन्हीं इलाकों में विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम कर रही है.
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