Congress Notice: कांग्रेस पार्टी और उससे जुड़े संगठनों के उपयोग में आ रहे दो सरकारी परिसरों को खाली करने को लेकर केंद्र सरकार के संपदा विभाग ने औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है. पार्टी को भेजे गये नोटिस में 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड स्थित परिसरों को 28 मार्च तक खाली करने को कहा गया है. यह मामला अब केवल दफ्तर खाली कराने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे लेकर सियासी तकरार भी तेज हो गयी है. कांग्रेस ने इसे विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है, जबकि सरकारी पक्ष इसे प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में देख रहा है.
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#WATCH | Delhi: Congress Leader Pawan Khera says, "Our 24 Akbar Road office and Youth Congress office have received a notice. What is the priority of the entire country today? The priority of the country is that there is no need to get stuck in the LPG lines, no need to buy in… pic.twitter.com/20L26x0LAg
— ANI (@ANI) March 25, 2026
पुराने पते से अब भी चल रहा था पार्टी का कामकाज
कांग्रेस का केंद्रीय दफ्तर लंबे समय तक 24 अकबर रोड से संचालित होता रहा था और यह पता पार्टी की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बन गया था. हालांकि, बाद में पार्टी का मुख्यालय 9ए, कोटला मार्ग स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अकबर रोड स्थित पुराना परिसर संगठनात्मक और दफ्तरी गतिविधियों में उपयोग में बना रहा. इसी तरह 5 रायसीना रोड परिसर का उपयोग युवा कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है. अब सरकार की ओर से इन परिसरों को खाली करने का निर्देश दिये जाने के बाद कांग्रेस संगठन के सामने संचालन व्यवस्था को लेकर नयी चुनौती खड़ी हो गयी है.
#WATCH | Over notice to Congress to vacate its 24 Akbar Road office, party MP Pramod Tiwari says," The BJP government is not a democratic govt. It is unfortunate. Let the notice reach us. We will act on it after holding discussions." pic.twitter.com/S1jKMEYBb2
— ANI (@ANI) March 25, 2026
पवन खेड़ा ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाये सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस नोटिस को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब देश आम लोगों से जुड़े गंभीर आर्थिक और रोजमर्रा के संकटों से जूझ रहा है, तब सरकार विपक्ष के दफ्तरों को निशाना बनाने में ऊर्जा लगा रही है. उनका कहना था कि जनता आज महंगाई, ईंधन की कीमत, रसोई गैस, रोजमर्रा की जरूरतों और किसानों की परेशानी जैसे मुद्दों से परेशान है, लेकिन सत्ता पक्ष की प्राथमिकताएं कुछ और ही दिखाई दे रही हैं. खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विमर्श को भटकाना चाहती है और विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी साफ किया कि नोटिस या प्रशासनिक दबाव से कांग्रेस अपने राजनीतिक रुख से पीछे नहीं हटेगी.
विपक्ष को सीमित करने की कोशिश का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल भवन खाली कराना नहीं, बल्कि विपक्षी दलों की सक्रियता को सीमित करना भी है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि दफ्तरों की कार्यक्षमता प्रभावित होगी तो प्रेस वार्ता, राजनीतिक बैठकें, संगठनात्मक कार्यक्रम और विरोध-प्रदर्शन की तैयारियों पर भी असर पड़ेगा. कांग्रेस इसे व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रही है, जिसमें विपक्ष को लगातार प्रशासनिक और संस्थागत दबाव के जरिये घेरने की कोशिश की जा रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक माहौल को प्रभावित करते हैं और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को असमान बनाते हैं.
इमरान मसूद ने भाजपा दफ्तरों का मुद्दा उठाया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किये और सरकार पर चयनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यदि सरकारी परिसरों के उपयोग को लेकर सख्ती दिखाई जा रही है, तो यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए. मसूद ने सवाल उठाया कि क्या इसी तरह की कार्रवाई उन परिसरों पर भी की गयी है, जिनका उपयोग अन्य दल, खासकर भाजपा, लंबे समय से करती रही है. उनका कहना था कि सरकार मौजूदा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर घिरने के बाद अब ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद खड़े कर रही है. उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस तरह की कार्रवाई से घबराने वाली नहीं है.
नोटिस से बढ़ी सियासी गर्मी
दफ्तर खाली करने के इस निर्देश ने राजधानी की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. प्रशासनिक स्तर पर इसे भले ही नियमित कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा हो, लेकिन कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप और विपक्ष को दबाने की कोशिश करार दिया है. आने वाले दिनों में यह मामला और गर्मा सकता है, खासकर तब जब तय समयसीमा नजदीक आयेगी. फिलहाल कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को केवल संपत्ति प्रबंधन का मामला मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसे राजनीतिक रूप से भी जोरदार ढंग से उठायेगी.
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