Cyber Fraud: पटना के शास्त्री नगर इलाके में पुलिस ने साइबर फ्रॉड से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है. कार्रवाई के दौरान एक रिहायशी अपार्टमेंट के फ्लैट से ऐसा सेटअप मिला, जिसे आरोपियों ने कथित तौर पर डिजिटल ठगी के ऑपरेशन सेंटर में बदल रखा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यहां से लोगों को ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और आकर्षक ऑफर के नाम पर फंसाकर उनके खातों से रकम निकाली जा रही थी. पुलिस को इस नेटवर्क की गतिविधियों की भनक गुप्त सूचना के जरिए लगी, जिसके बाद टीम ने बिना देरी कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी और कई अहम सुराग हाथ लगे.
छापेमारी के दौरान पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सक्रिय मोबाइल कनेक्शन, बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज और अन्य तकनीकी सामग्री मिली है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर ठगी को अंजाम दे रहा था. अब पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है.
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फ्लैट के भीतर मिला हाई-टेक सेटअप
पुलिस की टीम जब शिवपुरी स्थित बी. राय रेसिडेंसी के फ्लैट नंबर 404 में दाखिल हुई, तो वहां का इंतजाम देखकर मामला सामान्य नहीं लगा. अंदर कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और बैंकिंग उपयोग की सामग्री एक साथ बरामद हुई. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से इस ठिकाने से साइबर अपराध को संचालित कर रहे थे.
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि लोगों को पहले लालच भरे संदेशों और ऑनलाइन ऑफर्स के जरिए संपर्क किया जाता था. इसके बाद उन्हें गेमिंग या सट्टेबाजी जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय करने की कोशिश की जाती थी. एक बार भरोसा बन जाने पर पैसों के लेन-देन की आड़ में कथित तौर पर उनके खातों तक पहुंच बनाई जाती थी.
दक्षिण भारत के लोगों को बनाया जा रहा था निशाना
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस गिरोह की गतिविधियां सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं थीं. शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि यह नेटवर्क खास तौर पर दक्षिण भारत के कई राज्यों में रहने वाले लोगों को टारगेट कर रहा था. इसका मतलब यह है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर की ठगी नहीं, बल्कि एक व्यापक साइबर ऑपरेशन का हिस्सा हो सकता है.
बरामद सामान में 21 स्मार्टफोन, 24 सक्रिय सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक और दो लैपटॉप शामिल बताए जा रहे हैं. पुलिस अब इन डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच कराकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने लोगों को निशाना बनाया गया और ठगी का दायरा कितना बड़ा था.
मासिक वेतन पर काम कर रहे थे युवक
इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच युवकों को हिरासत में लिया है. पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं. बताया जा रहा है कि गिरोह में शामिल युवकों को बाकायदा तय रकम पर रखा गया था और उन्हें साइबर ठगी से जुड़े काम सौंपे गए थे. जानकारी के अनुसार, इन्हें हर महीने 15 हजार से 30 हजार रुपये तक भुगतान किया जाता था.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शशांक शेखर, मनीष कुमार, सूर्यदीप राज, रिशु कुमार और सचिन कुमार के रूप में हुई है. ये औरंगाबाद, गया और रोहतास जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन युवकों की भूमिका सिर्फ कॉलिंग और टेक्निकल ऑपरेशन तक सीमित थी या वे पैसे के लेन-देन और खातों के इस्तेमाल में भी शामिल थे.
फरार सरगना की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का कथित मुख्य संचालक अंकित कुमार बताया जा रहा है. छापेमारी के दौरान वह मौके से निकल भागने में सफल रहा. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है.
सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने संकेत दिया है कि जांच अब सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी. बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल कनेक्शन और डिवाइस डेटा की गहराई से जांच की जा रही है. पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह किसी बड़े इंटर-स्टेट नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और इसके तार दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं.
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