Bihar sugar mill : बिहार सरकार ने राज्य के गन्ना आधारित उद्योगों को फिर से मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है. गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों के भीतर बिहार की सभी बंद पड़ी 25 चीनी मिलों को चरणबद्ध तरीके से फिर से चालू करने की योजना पर काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस दिशा में शुरुआती प्रगति भी दिखने लगेगी और मौजूदा वर्ष के दौरान ही दो से तीन मिलों के संचालन की शुरुआत होने की उम्मीद है. मंत्री ने यह बात बुधवार को मुंगेर परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही.
गन्ना आधारित उद्योगों को नया जीवन देने पर जोर
मंत्री ने कहा कि सरकार सिर्फ चीनी मिलों के पुनरुद्धार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि गन्ना आधारित छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसी कड़ी में गुड़ उद्योग को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने बताया कि राज्य में गुड़ उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए लगातार आवेदन लिये जा रहे हैं और इच्छुक उद्यमियों के लिए अभी भी अवसर खुले हुए हैं. सरकार का मानना है कि यदि चीनी मिलों के साथ-साथ गुड़ निर्माण इकाइयां भी तेजी से विकसित होती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा और गन्ना किसानों के लिए बाजार का दायरा बढ़ेगा.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
सब्सिडी और निवेश के सहारे उद्योग विस्तार की तैयारी
संजय कुमार ने कहा कि सरकार ने गन्ना और उससे जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था भी की है. उद्योग लगाने वालों को सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़े और नए निवेश को आकर्षित किया जा सके. उन्होंने कहा कि बिहार में अब औद्योगिक माहौल पहले की तुलना में कहीं बेहतर हुआ है और यही वजह है कि निवेशक यहां संभावनाएं तलाश रहे हैं. सरकार की कोशिश है कि कृषि आधारित उद्योगों को मजबूत कर स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाये और राज्य के विभिन्न जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ायी जाएं.
रोजगार सृजन को लेकर सरकार का बड़ा दावा
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य तय किया है और गन्ना उद्योग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उनके अनुसार, बंद मिलों के दोबारा शुरू होने और गुड़ उद्योग के विस्तार से प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिलने की संभावना बढ़ेगी और पलायन पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यदि ऐसे उद्योग सक्रिय होते हैं, तो उसका असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, व्यापार, भंडारण और छोटे कारोबारों पर भी सकारात्मक पड़ेगा.
बिहार को चीनी और गुड़ उत्पादन में आगे लाने की योजना
सरकार की मंशा केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार को चीनी और गुड़ उद्योग के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने की भी है. मंत्री ने कहा कि यदि राज्य की बंद मिलें फिर से चालू होती हैं और गन्ना आधारित इकाइयों का विस्तार होता है, तो बिहार आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है. साथ ही, उत्पादन बढ़ने पर बाहरी बाजारों में भी राज्य की हिस्सेदारी मजबूत की जा सकती है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बिहार कृषि आधारित उद्योगों के जरिये आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत होकर उभरेगा.
इसे भी पढ़ें-बिहार के 43 शहर होंगे व्यवस्थित, बिना पास नक्शे के नहीं उठेगी एक भी ईंट
इसे भी पढ़ें-आईएएस संजीव हंस पर नया घूस केस, 1 करोड़ रुपये लेने का आरोप दर्ज
इसे भी पढ़ें-बिहार के बिल्डरों को बड़ी राहत, अब पूरे साल खुलेगा प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन का रास्ता

