Dhanbad Municipal Election Results: धनबाद की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. बीजेपी के बागी और चर्चित उम्मीदवार संजीव सिंह ने नगर निगम चुनाव में जोरदार जीत हासिल की. संजीव सिंह की वापसी इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि वे डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड मामले में लंबे समय जेल में रहे थे, लेकिन अदालत ने उन्हें इस केस से बरी कर दिया.
सालों तक सलाखों के पीछे रहने के बाद संजीव सिंह ने सियासी मैदान में वापसी की और मेयर पद के लिए चुनावी दावेदारी पेश की. उन्होंने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को समर्थन के लिए पत्र लिखा, लेकिन पार्टी ने उन्हें समर्थन देने की बजाय अपने उम्मीदवार संजीव कुमार को आगे किया.
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इसी बीच, बीजेपी के कद्दावर नेता चंद्रशेखर अग्रवाल ने पार्टी से अलग होकर झामुमो का दामन थाम लिया. झामुमो ने उनका समर्थन किया, जबकि कांग्रेस ने शमशेर आलम को अपना उम्मीदवार घोषित किया. ऐसे राजनीतिक समीकरणों में संजीव सिंह ने बिना किसी बाहरी समर्थन के मैदान में उतरने का साहसिक निर्णय लिया.
मतगणना में साफ बढ़त और निर्णायक जीत
मतगणना के दौरान संजीव सिंह ने शुरुआती राउंड से ही बढ़त बनाई और अंत तक इसे बरकरार रखा. अंतिम परिणाम में संजीव सिंह को 1,43,362 वोट मिले, जबकि पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को 82,460 वोट प्राप्त हुए. कांग्रेस समर्थित शमशेर आलम 59,079 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे और बीजेपी के संजीव कुमार 57,895 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे.
साफ देखा गया कि संजीव सिंह की बढ़त लगातार मजबूत होती रही और अंत में निर्णायक साबित हुई. यह जीत धनबाद की राजनीति में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है.
युवाओं और सोशल मीडिया ने बदला चुनावी परिदृश्य
विशेष रूप से युवाओं की भूमिका इस जीत में अहम रही. चुनावी समय में सोशल मीडिया पर संजीव सिंह के समर्थन में जबरदस्त अभियान चला. युवा न केवल ऑनलाइन प्रचार में सक्रिय रहे, बल्कि बूथ स्तर पर भी उन्हें सपोर्ट किया. इसका प्रत्यक्ष असर मतदान प्रतिशत और नतीजों में दिखाई दिया.
विशेषज्ञों का मानना है कि संजीव सिंह की व्यक्तिगत छवि, बागी राजनीति और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा समर्थन ने मिलकर उन्हें जीत दिलाई. उनकी इस जीत ने यह भी साबित किया कि पार्टी लाइन से हटकर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी व्यापक जन समर्थन से शानदार सफलता हासिल कर सकते हैं.
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