Bihar News: बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है और इसकी वजह हैं मुख्यमंत्री Nitish Kumar. 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे उच्च सदन की सदस्यता कब ग्रहण करेंगे. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट है कि राज्यसभा जाने के लिए उन्हें वर्तमान में जिस सदन के सदस्य हैं, उससे इस्तीफा देना अनिवार्य होगा. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि वे बिहार विधान परिषद की सदस्यता कब छोड़ेंगे और मुख्यमंत्री पद पर कब तक बने रहेंगे.
नियम के तहत 14 दिन में छोड़नी होगी एक सदस्यता
संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद किसी भी व्यक्ति को 14 दिनों के भीतर एक सदन की सदस्यता छोड़नी होती है. इस आधार पर Nitish Kumar के पास 30 मार्च तक का समय माना जा रहा है. यदि इस अवधि के भीतर वे विधान परिषद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है. इसलिए यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे इस समयसीमा से पहले अपना पहला कदम उठाएंगे.
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दो चरणों में इस्तीफे की चर्चा तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूरा घटनाक्रम दो चरणों में हो सकता है. पहले चरण में वे विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे, ताकि राज्यसभा की सदस्यता सुरक्षित रह सके. इसके बाद दूसरा और बड़ा फैसला मुख्यमंत्री पद को लेकर होगा. हालांकि इस पर अंतिम निर्णय पूरी तरह Nitish Kumar की रणनीति पर निर्भर करेगा.
9 अप्रैल तक मुख्यमंत्री बने रहने की संभावना
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा का नया कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू हो रहा है. वहीं जेडीयू के Harivansh Narayan Singh का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि Nitish Kumar उसी सीट पर जाएंगे. इस स्थिति में माना जा रहा है कि वे 9 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं और उससे पहले बिहार में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
केंद्र की राजनीति में जाने की तैयारी
इन परिस्थितियों को देखते हुए यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में इस संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं. फिलहाल सबकी नजर Nitish Kumar के अगले कदम पर टिकी हुई है, जो बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगा.
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