Bihar News : मंगेर से सबौर तक प्रस्तावित मरीन ड्राइव परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हो पाई है. बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) द्वारा जिला भू-अर्जन विभाग को भेजा गया प्रस्ताव आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में वापस कर दिया गया है. प्रस्ताव में निर्माण क्षेत्र का नक्शा संलग्न नहीं था, जिसके कारण आगे की कार्रवाई रोक दी गई.
भू-अर्जन विभाग का कहना है कि जब तक प्रस्ताव के साथ स्वीकृत नक्शा उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक अधियाचना स्वीकार नहीं की जा सकती. अब बीएसआरडीसीएल पटना स्तर से संबंधित नक्शा जुटाने में लगा है. नक्शा मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी.
हालांकि, निगम ने अपने स्तर पर सर्वे कर मरीन ड्राइव का फोरलेन अलाइनमेंट तय कर लिया है. इसी आधार पर सड़क निर्माण की योजना तैयार की गई है. नक्शा उपलब्ध होते ही परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज की जाएगी.
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एजेंसी का चयन पूरा, प्रारंभिक तैयारी जारी
मरीन ड्राइव परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और निर्माण एजेंसी का चयन कर लिया गया है. विभाग द्वारा सर्वेक्षण, मापी और कार्य-सीमा निर्धारण से जुड़ा प्रारंभिक ढांचा भी तैयार कर लिया गया है.
दो चरणों में बनेगा मरीन ड्राइव
- पहला चरण: सफियाबाद से सुल्तानगंज तक (लगभग 35 किलोमीटर)
- दूसरा चरण: सुल्तानगंज से सबौर तक (लगभग 40.80 किलोमीटर)
अनुमानित लागत
- पहले चरण पर लगभग 4450.17 करोड़ रुपये.
- दूसरे चरण पर करीब 3842.48 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
भोलानाथ आरओबी: नोटिस जारी करने की तैयारी
भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग अंतिम दौर में पहुंच चुका है. चिन्हित रैयतों को जल्द ही नोटिस भेजे जाएंगे. आपत्तियों के निपटारे के बाद मुआवजा राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी.
पीरपैंती थर्मल पावर प्लांट: सामाजिक प्रभाव का आकलन अंतिम चरण में
प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले सामाजिक प्रभाव अध्ययन का कार्य आद्री संस्था को सौंपा गया है. संस्था की टीम पिछले कुछ दिनों से पीरपैंती क्षेत्र में जनसुनवाई कर रही है. रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितनी जमीन परती है और कितनी उपजाऊ, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
नक्शा उपलब्ध होते ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार के अनुसार मरीन ड्राइव के लिए प्राप्त प्रस्ताव में नक्शा नहीं होने के कारण उसे वापस किया गया है. नक्शा उपलब्ध होते ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. भोलानाथ आरओबी के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा हो चुका है और मुआवजा भुगतान की तैयारी चल रही है. वहीं थर्मल पावर प्लांट के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन का कार्य अंतिम चरण में है.
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