Bihar Politics : बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई. राहुल गांधी को लेकर तीखी टिप्पणी करने के बाद उन्होंने दावा किया कि उनकी जान और संपत्ति को खतरा हो सकता है. शकील अहमद का आरोप है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के संकेत पर उनके पटना और मधुबनी स्थित आवास को निशाना बनाया जा सकता है.
इन आरोपों के सामने आते ही न सिर्फ राज्य की राजनीति गरमा गई है, बल्कि कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान भी सार्वजनिक मंच पर आ गई है. दरअसल, यह स्थिति राहुल गांधी को ‘डरपोक’ और ‘असुरक्षित’ नेता बताने के बाद सामने आयी है.
अभी अभी काँग्रेस के कुछ साथियों ने गुप्त रूप से मुझे ख़बर किया है कि काँग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने बिहार कांग्रेस / युवा काँग्रेस को यह आदेश दिया है कि कल दिनांक 27 जनवरी को पुतला दहन के बहाने मेरे पटना और मधुबनी निवास पर आक्रमण किया जाय।
— Dr Shakeel Ahmad (@Ahmad_Shakeel) January 26, 2026
यह जनतंत्र के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है।
सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई सियासी बेचैनी
शकील अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि उन्हें गोपनीय सूचना मिली है. उनके अनुसार, 27 जनवरी को पुतला दहन के नाम पर बिहार कांग्रेस और युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर हमला करने के निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने इस कथित साजिश को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि विचारों की असहमति को हिंसा के जरिए दबाने की कोशिश किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जा सकती.
राहुल गांधी की नेतृत्व शैली पर सीधा हमला
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में शकील अहमद ने राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पार्टी के भीतर उन नेताओं से असहज हो जाते हैं, जिनकी अपनी राजनीतिक पकड़ और स्वतंत्र पहचान है.
उनका आरोप था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केवल औपचारिक भूमिका में हैं, जबकि असल फैसले राहुल गांधी ही लेते हैं. शकील अहमद के मुताबिक, राहुल गांधी उन्हीं लोगों के साथ सहज महसूस करते हैं, जहां उन्हें सर्वेसर्वा होने का भाव मिलता है.
पॉडकास्ट बयान से भड़का पूरा मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत एक पॉडकास्ट से हुई, जिसमें शकील अहमद ने राहुल गांधी को ‘असुरक्षित नेता’ करार दिया था. इसके बाद पार्टी के भीतर से उनके खिलाफ प्रतिक्रियाएं आने लगीं.
इसी क्रम में उन्होंने अपने घरों पर संभावित हमले की बात कही, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया.
‘संविधान बचाओ’ अभियान पर भी उठाए सवाल
शकील अहमद ने राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ अभियान को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने दावा किया कि इस अभियान का जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर नजर नहीं आ रहा है.
मुस्लिम समुदाय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ग के भीतर भी राहुल गांधी के बयानों को लेकर एकराय नहीं है. उनका आरोप था कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मुस्लिम नेताओं के साथ मंच साझा करने या फोटो खिंचवाने से भी बचते हैं, क्योंकि उन्हें हिंदू वोट बैंक के नुकसान का डर रहता है.
पार्टी छोड़ने के सवाल पर दिया जवाब
लगातार हो रहे कयासों के बीच शकील अहमद ने यह साफ कर दिया कि वह कांग्रेस छोड़ने नहीं जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी नाराजगी पार्टी से नहीं, बल्कि राहुल गांधी की कार्यशैली से है.
दूसरी ओर, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तंज कसा कि जब कोच खुद मैदान में उतरकर खेलने लगे, तो टीम का संतुलन बिगड़ जाता है.
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर बड़ा सवाल
शकील अहमद के बयान ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व को लेकर चल रही असहजता को उजागर कर दिया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह विवाद बिहार की राजनीति में किसी बड़े सियासी बदलाव की भूमिका तैयार करेगा.
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