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Bajaj Pulsar : बजाज पल्सर ने पूरे किए 25 साल, लॉन्च किया सेलिब्रेशन ऑफर – जानें कितना होगा फायदा

Bajaj Pulsar
बजाज पल्सर ने पूरे किए 25 साल.

Bajaj Pulsar : भारत की सबसे चर्चित स्पोर्ट्स बाइक बजाज पल्सर ने इस साल अपने 25 वर्षों के सफर को पूरा किया. इस विशेष अवसर पर कंपनी ने नए साल की शुरुआत “25 ईयर्स ऑफ पल्सर सेलिब्रेशन ऑफर” के साथ की है. इस ऑफर के तहत चुनिंदा मॉडल्स पर ग्राहक ₹15,500 तक का लाभ प्राप्त कर सकते हैं. यह ऑफर केवल सीमित समय के लिए देशभर के अधिकृत बजाज डीलरशिप्स पर उपलब्ध है.

पल्सर की कहानी: सिर्फ माइलेज नहीं, स्पोर्टी लुक

पल्सर के लॉन्च के समय भारतीय मोटरसाइकिल बाजार मुख्यतः रोजमर्रा की सवारी और माइलेज तक सीमित था. पल्सर ने यह सोच बदल दी और युवाओं के लिए स्पोर्टी लुक, दमदार इंजन और वाजिब कीमत का अनूठा मेल पेश किया. यही कारण है कि यह बाइक कॉलेज स्टूडेंट्स और युवा प्रोफेशनल्स की पहली पसंद बन गई.

ऑफर में क्या शामिल है?

कंपनी ने इस ऑफर में मॉडल और रीजन के अनुसार फायदे तय किए हैं. इसमें प्रमुख हैं:

  • सीधी बचत
  • फाइनेंस पर जीरो प्रोसेसिंग फीस
  • पाँच फ्री सर्विस
    इससे शुरुआती मेंटेनेंस की लागत भी कम होगी और बाइक खरीदना और चलाना दोनों ही किफायती बन जाएगा.

नेकेड स्पोर्ट्स सेगमेंट में पल्सर की पहचान

पल्सर ने भारतीय बाजार में नेकेड स्पोर्ट्स बाइक की पहचान बनाई. मस्कुलर डिज़ाइन, प्रिसाइज हैंडलिंग और DTS-i टेक्नोलॉजी ने इसे विशेष बनाया. इसने आम राइडर्स को भी स्पोर्ट्स बाइकिंग का अनुभव आसानी से उपलब्ध कराया.

नई पीढ़ी की पल्सर: NS400Z

पल्सर का सफर लगातार आगे बढ़ा. कंपनी ने समय-समय पर नए मॉडल्स पेश किए और आज NS400Z को ब्रांड की सबसे ताकतवर बाइक माना जाता है. यह मॉडल आधुनिक फीचर्स और बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ पल्सर की विरासत को आगे ले जा रहा है.

ग्राहकों के लिए संदेश

बजाज ऑटो के मोटरसाइकिल बिजनेस यूनिट के प्रेसिडेंट सरंग कानाडे ने कहा कि पल्सर ने भारतीय परफॉर्मेंस बाइकिंग की दिशा तय की है. यह ऑफर ग्राहकों को धन्यवाद कहने और असली वेल्यू देने का तरीका है.

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Vande Bharat Sleeper Train : पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार, जानिए किन 2 राज्यों के बीच दौड़ेगी

बिहार
बिहार के लिए चलेंगी 285 स्पेशल ट्रेनें.

VANDE BHARAT SLEEPER TRAIN READY FOR ROLLOUT : भारतीय रेलवे एक और अहम उपलब्धि की ओर बढ़ते हुए हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने जा रहा है. यह ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम के नौ जिलों से होकर चलेगी और पूर्वी भारत व पूर्वोत्तर के बीच लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी.

पूरी तरह स्वदेशी “मेक इन इंडिया” पहल

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मेक इन इंडिया पहल का शानदार उदाहरण है. इसके तीन प्रमुख सिस्टम—

  • बोगी
  • प्रोपल्शन सिस्टम
  • व्हीकल कंट्रोल सिस्टम

—पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किए गए हैं. इस वजह से यह पूरी तरह से स्वदेशी ट्रेन बन गई है.

हाई-स्पीड और सुरक्षित यात्रा

हाई-स्पीड क्षमता के लिए डिज़ाइन की गई यह ट्रेन 180 किमी प्रति घंटे तक की अधिकतम गति में सक्षम है. हालांकि, सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सेवा 130 किमी प्रति घंटे की गति से चलेगी.

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  • उन्नत सुरक्षा और यात्री सुविधाएँ
  • ट्रेन निम्नलिखित सुविधाओं से लैस है:
  • स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम
  • इमरजेंसी टॉक बैक सिस्टम (संकट में तुरंत संचार)
  • आधुनिक कीटाणुशोधन तकनीक (उच्च स्वच्छता और हाइजीन)
  • उन्नत ड्राइवर कैब नियंत्रण
  • एयरोडायनामिक बाहरी डिज़ाइन (ऊर्जा दक्षता और स्थिरता)
  • स्वचालित बाहरी यात्री दरवाज़े (सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए)

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार

भारतीय रेलवे का यह कदम पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के बीच तेज़, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करेगा. साथ ही, यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई ऊँचाईयों तक ले जाने में मदद करेगा.

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Bhagalpur News : किसानों के ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन में आएगी तेजी; डीएम ने दिए निर्देश

Bhagalpur DM
किसानों के ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन में आएगी तेजी.

Bhagalpur News : भागलपुर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बुधवार को सबौर प्रखंड के राजंदीपुर और फरका पंचायत सहित सन्हौला तारर पंचायत में चल रहे किसानों के ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन (एफआर) कार्य का निरीक्षण किया. जिलाधिकारी ने किसानों से संवाद कर ई-केवाईसी और एफआर कार्य की गति और समस्याओं का फीडबैक लिया.

बिहार के सभी प्रखंडों में हो रहा ई-केवाईसी और एफआर

बिहार के सभी प्रखंडों में किसान सलाहकार, राजस्व कर्मचारी और कृषि संबंधवायक प्रत्येक किसान का ई-केवाईसी और एफआर कर रहे हैं. यह प्रक्रिया किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि सेवाओं का लाभ दिलाने के लिए अनिवार्य है.

ई-केवाईसी और एफआर की प्रक्रिया

ई-केवाईसी और एफआर में किसानों की पहचान आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से की जाती है. अब यह कार्य मोबाइल ऐप या CSC कियोस्क पर भी किया जा सकता है, जिसमें फेस ऑथेंटिकेशन या OTP से घर बैठे भी प्रक्रिया पूरी होती है.

डिजिटल डेटाबेस और पारदर्शिता

एफआर, आधार और भूमि रिकॉर्ड को जोड़कर एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाता है. इससे योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता आती है और काम आसान हो जाता है. इस कार्य के लिए किसानों का आधार नंबर और मोबाइल नंबर होना आवश्यक है.

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Dhurandhar : धुरंधर की कामयाबी पर यश राज फिल्म्स की मुहर, फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में हलचल

Dhurandhar
धुरंधर की कामयाबी पर यश राज फिल्म्स की मुहर.

Dhurandhar : हाल के दिनों में एक हिंदी फिल्म को लेकर सिनेमा से जुड़े लोगों के बीच खास बातचीत देखने को मिल रही है. यह फिल्म है धुरंधर, जिसकी प्रस्तुति और मेकिंग को लेकर इंडस्ट्री के भीतर चर्चाएं चल रही हैं. इसी क्रम में अब यश राज फिल्म्स की प्रतिक्रिया सामने आई है.

बॉलीवुड की जानी-मानी प्रोडक्शन कंपनी यश राज फिल्म्स (YRF) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया. इस पोस्ट में फिल्म से जुड़े निर्माताओं और पूरी टीम के प्रयासों की प्रशंसा की गई.

निर्देशक आदित्य धर के काम की चर्चा

यश राज फिल्म्स ने अपने संदेश में फिल्म के निर्देशक आदित्य धर के काम को उल्लेखनीय बताया. पोस्ट में कहा गया कि फिल्म की कहानी और उसके प्रस्तुतिकरण में स्पष्ट सोच नजर आती है. इसके साथ ही फिल्म के निर्माण में शामिल Jio Studios को भी बधाई दी गई.

YRF की ओर से साझा किए गए संदेश में फिल्म के कलाकारों के अभिनय का भी जिक्र किया गया. कहा गया कि अलग-अलग किरदारों में कलाकारों ने अपने-अपने हिस्से का काम गंभीरता से निभाया है, जिससे फिल्म को मजबूती मिलती है.

तकनीकी पक्ष पर भी दिया गया जोर

पोस्ट में यह भी कहा गया कि फिल्म की गुणवत्ता केवल अभिनय तक सीमित नहीं है. कैमरा वर्क, बैकग्राउंड म्यूज़िक और एडिटिंग जैसे तकनीकी पहलुओं में किया गया काम भी फिल्म को प्रभावी बनाता है.

धुरंधर को लेकर दर्शकों के बीच भी लगातार बातचीत जारी है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग फिल्म के अलग-अलग पहलुओं पर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे यह साफ है कि फिल्म ने ध्यान खींचा है.

इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया को माना जा रहा सकारात्मक संकेत

फिल्म को लेकर यश राज फिल्म्स जैसी बड़ी प्रोडक्शन कंपनी की प्रतिक्रिया को धुरंधर की टीम के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. इंडस्ट्री से मिल रही ऐसी प्रतिक्रियाएं फिल्म की चर्चा को और आगे बढ़ा रही हैं.

आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाओं की उम्मीद

जिस तरह से फिल्म को लेकर बातचीत जारी है, उससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में धुरंधर पर और भी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं. फिलहाल फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों की नजरें इससे जुड़ी अगली गतिविधियों पर टिकी हैं.

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8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग से राज्य कर्मचारियों को कब मिलेगा फायदा, एरियर पर क्या है तस्वीर?

8th Pay Commission
8वें वेतन आयोग से राज्य कर्मचारियों को कब मिलेगा फायदा.

8th Pay Commission : 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर जहां केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं राज्य कर्मचारियों में भी वेतन और पेंशन संशोधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सबसे अहम सवाल यही है कि क्या राज्यों में भी केंद्र की तरह वेतन बढ़ेगा और अगर बढ़ा तो एरियर कब से मिलेगा.

कब से लागू हो सकती हैं 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

केंद्र सरकार की वेतन आयोग परंपरा के अनुसार हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है. इसी क्रम में संकेत दिए गए हैं कि 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जा सकती हैं.
भले ही औपचारिक अधिसूचना बाद में जारी हो, लेकिन वेतन और पेंशन की गणना इसी तारीख से किए जाने की संभावना रहती है.

क्या राज्यों पर केंद्र की सिफारिशें लागू करना जरूरी होता है?

राज्य सरकारों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें मानना बाध्यकारी नहीं होता. वेतन मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, कई राज्य केंद्र के फैसले को आधार बनाते जरूर हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अपने वित्तीय हालात को देखकर लेते हैं.

अक्सर राज्य सरकारें अलग से राज्य वेतन आयोग बनाती हैं, जो राजस्व, खर्च और आर्थिक बोझ का आकलन करने के बाद रिपोर्ट सौंपता है. इसी वजह से कई बार राज्यों में वेतन संशोधन में 1 से 3 साल तक की देरी हो जाती है.

उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों को कब मिल सकता है एरियर?

उत्तर प्रदेश में 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है. ऐसे में अगर राज्य सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अपनाती है, तो 1 जनवरी 2026 से एरियर बनने की संभावना बन सकती है.

नियम के अनुसार, वेतन या पेंशन लागू होने में जितनी देरी होती है, उतनी अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाता है.

क्या सभी राज्यों में एक जैसा वेतन बढ़ेगा?

इसका जवाब साफ तौर पर “नहीं” है. हर राज्य अपनी आर्थिक स्थिति, बजट घाटा, टैक्स आय और विकास योजनाओं को ध्यान में रखकर वेतन बढ़ोतरी तय करता है.

इसी वजह से राज्यों में वेतन आयोगों की संख्या भी अलग-अलग है.
जहां केरल में 11वां राज्य वेतन आयोग बन चुका है, वहीं कर्नाटक अभी 7वें वेतन आयोग के तहत काम कर रहा है. इससे साफ है कि केंद्र और राज्य की वेतन नीति पूरी तरह समान होना जरूरी नहीं.

फिटमेंट फैक्टर क्या है और क्यों अहम माना जाता है?

वेतन बढ़ोतरी का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना फिटमेंट फैक्टर होता है.
इसी के आधार पर पुरानी बेसिक सैलरी को बढ़ाकर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है.

उदाहरण के तौर पर, 7वें केंद्रीय वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. यानी पुरानी बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा कर नई सैलरी तय की गई. हालांकि, उस समय महंगाई भत्ता शून्य कर दिए जाने से कर्मचारियों को वास्तविक फायदा कम महसूस हुआ.

राज्यों ने अलग-अलग फार्मूले क्यों अपनाए?

राज्यों ने अपने हिसाब से फिटमेंट फैक्टर तय किए.
उत्तर प्रदेश ने केंद्र के समान 2.57 अपनाया, जबकि पंजाब ने 2.59 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया.
इससे यह साफ होता है कि राज्यों में वेतन बढ़ोतरी केंद्र से ज्यादा या कम दोनों हो सकती है.

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?

वेतन मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए 8वें वेतन आयोग में 2.6 से 3.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर तय किया जा सकता है.

अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में बड़ा इजाफा संभव है. हालांकि, इससे केंद्र और राज्य सरकारों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा. अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा.

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Watch Video : बांग्लादेश में एक और मौत; तालाब में कूदकर जान गंवा बैठा हिंदू युवक

Bangladesh News
बांग्लादेश में एक और मौत.

Bangladesh News : बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय संसदीय चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं और ताजा मामला एक हिंदू युवक की संदिग्ध मौत से जुड़ा है. इस घटना ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की स्थिति और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तालाब में कूदने के बाद गई युवक की जान

ताजा मामला बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में स्थित नाओगांव जिले के मोहादेवपुर क्षेत्र का है. यहां मिथुन सरकार नामक एक हिंदू युवक की मौत हो गई. आरोप है कि कुछ लोगों ने उसे चोरी के संदेह में घेर लिया और उसका पीछा किया. खुद को बचाने के प्रयास में युवक पास के जलाशय में कूद गया, लेकिन तैरना न आने के कारण वह बाहर नहीं निकल सका और डूब गया.

पुलिस ने क्या बताया?

नाओगांव के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद तारिकुल इस्लाम ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया. पुलिस के अनुसार शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मामले की जांच की जा रही है. फिलहाल किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

चुनाव नजदीक, बढ़ती हिंसा

बांग्लादेश में 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव की तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, वैसे-वैसे सांप्रदायिक तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. हाल के हफ्तों में कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है. हालात उस समय और बिगड़े, जब दिसंबर में एक राजनीतिक मंच से जुड़े व्यक्ति उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इलाज के दौरान उनकी मौत के बाद से हिंसा की घटनाओं में तेजी देखी गई.

बीते दिनों में कई मौतें

पिछले करीब 20 दिनों में कम से कम सात लोगों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं. इनमें एक फैक्ट्री कर्मचारी दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग की घटना भी शामिल है, जिसमें पहले उसे पीटा गया और बाद में उसका शव पेड़ से बांधकर जला दिया गया. इसके अलावा अलग-अलग इलाकों में हिंदू व्यापारियों और आम नागरिकों पर हमले किए गए.

व्यापारियों को बनाया गया निशाना

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नरसिंदी शहर में एक किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक यह घटना देर रात बाजार इलाके में हुई. बताया गया कि मोनी हाल के हफ्तों में मारे गए तीसरे हिंदू कारोबारी थे.
इसके अलावा जेसोर जिले में राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. वह एक स्थानीय अखबार से जुड़े थे और शाम के समय बाजार में मौजूद थे, जब अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला किया.

आगजनी, डकैती और धमकी की घटनाएं

जानलेवा हमलों के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की संपत्तियों को भी निशाना बनाया जा रहा है. लक्ष्मीपुर जिले में एक किसान की धान की फसल में आग लगा दी गई. वहीं चट्टोग्राम, कुमिल्ला और शरियतपुर जैसे इलाकों में घरों में डकैती, लूटपाट और परिवारों को बंधक बनाने की घटनाएं सामने आई हैं.

संगठनों ने जताई चिंता

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, केवल दिसंबर महीने में ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ कम से कम 51 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें हत्याएं, लूट-डकैती, मंदिरों और घरों पर हमले, जमीन पर कब्जा, आगजनी और झूठे आरोपों में गिरफ्तारी के मामले शामिल हैं. संगठन का कहना है कि जनवरी के पहले सप्ताह में भी यह सिलसिला थमा नहीं है.

डर का माहौल

लगातार हो रही इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच डर का माहौल बना दिया है. चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस और प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वे हिंसा की इन घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करें और हालात को काबू में लाएं.

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Bihar School Closed : कटिहार में फिर कक्षा 8 तक के स्कूल 10 जनवरी तक बंद, DM का आदेश जारी

school closed
कटिहार में फिर कक्षा 8 तक के स्कूल.

Bihar School Closed : बिहार के कटिहार जिले में भीषण ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. न्यूनतम तापमान में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है. बच्चों के स्वास्थ्य पर ठंड के संभावित दुष्प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जिला दंडाधिकारी ने विशेष आदेश जारी किया है.

कक्षा 8 तक के विद्यालयों में पढ़ाई स्थगित

जारी आदेश के अनुसार कटिहार जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा 8 तक की पढ़ाई पर 10 जनवरी 2026 तक रोक लगा दी गई है. इस आदेश के दायरे में प्री-स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी शामिल हैं. यानी 9 और 10 जनवरी को इन सभी कक्षाओं के लिए विद्यालय पूरी तरह बंद रहेंगे.

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ऊपरी कक्षाओं के लिए बदला समय

कक्षा 8 से ऊपर के छात्रों के लिए स्कूल पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है. संशोधित आदेश के अनुसार इन कक्षाओं की पढ़ाई सुबह 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक होगी. वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक किया जाएगा, ताकि बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा सके.

पढ़ाई पर रोक, प्रशासनिक काम जारी

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल शैक्षणिक गतिविधियों पर लागू होगा. विद्यालयों के प्रशासनिक कार्य पूर्ववत चलते रहेंगे. हालांकि प्री-बोर्ड, बोर्ड परीक्षाएं और विशेष परीक्षाओं या कक्षाओं को इस आदेश से बाहर रखा गया है.

आदेश की अवधि और सख्त चेतावनी

जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी निर्देश 8 जनवरी 2026 से प्रभावी होकर 10 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा. प्रशासन ने सभी स्कूल प्रबंधन को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. चेतावनी दी गई है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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Patna Metro : पटना मेट्रो में नौकरी के नाम पर ठगी का खेल, बड़ा नेटवर्क उजागर; जानें किस तरह से हो रही थी जालसाजी

Patna Metro
AI जनरेटेड इमेज सांकेतिक तस्वीर.

Patna Metro : पटना मेट्रो में बहाली का सपना दिखाकर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि सरकारी योजनाओं का भी गलत इस्तेमाल कर रहा था. हालिया कार्रवाई में आरोपियों के पास से कई आयुष्मान भारत कार्ड बरामद किए गए हैं, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है.

गिरफ्तारी के बाद खुलने लगी ठगी की परतें

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा 28 दिसंबर 2025 को हुआ, जब जक्कनपुर थाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में सहरसा का नवनीत कुमार, सुपौल का अखिलेश कुमार और नवादा का दिनेश साव शामिल हैं. पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि ये लोग लंबे समय से संगठित तरीके से ठगी कर रहे थे.

फर्जी कंपनी और वेबसाइट के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश

जांच में सामने आया कि गिरोह ने खुद को वैध दिखाने के लिए ‘उर्मिला एजुकेशन एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक कंपनी बनाई थी. इसके साथ ही एक प्रोफेशनल वेबसाइट भी तैयार की गई थी, जिस पर पटना मेट्रो में डाटा एंट्री ऑपरेटर और इलेक्ट्रिशियन जैसे पदों पर भर्ती का विज्ञापन डाला गया. वेबसाइट देखने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किया.

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आवेदन शुल्क से लेकर नौकरी दिलाने तक की ठगी

पुलिस के अनुसार 2500 से अधिक युवाओं ने इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन किया था. हर अभ्यर्थी से करीब 1200 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में वसूले गए. इसके बाद चयन और नियुक्ति का झांसा देकर अलग-अलग चरणों में और पैसे लिए गए. शुरुआती अनुमान के मुताबिक सिर्फ आवेदन शुल्क से ही लाखों रुपये जुटाए गए, जबकि कुल ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.

आयुष्मान भारत योजना के नाम पर दूसरा फर्जीवाड़ा

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को आरोपियों के पास से 19 आयुष्मान भारत कार्ड मिले. शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि गिरोह गांव और कस्बों के लोगों को मुफ्त इलाज का लालच देकर आयुष्मान कार्ड बनवाता था. इसके बाद निजी अस्पतालों से कथित सांठगांठ कर कार्डधारकों के नाम पर इलाज दिखाया जाता था और सरकारी राशि का गलत इस्तेमाल किया जाता था.

निजी अस्पतालों की भूमिका भी जांच के घेरे में

पुलिस को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ निजी अस्पतालों की भी भूमिका हो सकती है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी इलाज दिखाया गया और कितनी सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ.

सरगना की तलाश, रिमांड की तैयारी

इस गिरोह का एक मुख्य सरगना अखिलेश यादव बताया जा रहा है, जिसे जक्कनपुर थाना पुलिस पहले गिरफ्तार नहीं कर पाई थी. बाद में जानकारी मिली कि उसे दानापुर पुलिस ने शराब से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. अब जक्कनपुर थाना पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है और इसके लिए कोर्ट में आवेदन दिया जाएगा.

दो साल से सक्रिय, करोड़ों की ठगी का शक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह करीब दो वर्षों से सक्रिय था और इस दौरान करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने की आशंका है. आरोपियों के पास से लगभग 20 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी बरामद किए गए हैं. इनके जरिए पुलिस ठगी की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

सरकारी योजनाओं के नाम पर भरोसे से खिलवाड़

पटना मेट्रो की नौकरी और आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं के नाम पर किया गया यह फर्जीवाड़ा न सिर्फ आर्थिक अपराध है, बल्कि आम लोगों के भरोसे के साथ किया गया गंभीर धोखा भी है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए हर स्तर पर जांच कर रही है.

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E-Rickshaw Kalyan Yojana : ई-रिक्शा कल्याण योजना से बेरोजगारी होगी दूर, बस उठाएं ये कदम

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ई-रिक्शा कल्याण योजना से बेरोजगारी होगी दूर.

E-Rickshaw Kalyan Yojana : उत्तराखंड सरकार ने बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा कल्याण योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य युवाओं को कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे ई-रिक्शा खरीदकर अपना रोजगार शुरू कर सकें. योजना सहकारिता विभाग के माध्यम से संचालित की जा रही है और इसका लक्ष्य राज्य में युवाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है.

योजना का मकसद

ई-रिक्शा कल्याण योजना का मुख्य उद्देश्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर देना है. इस योजना के जरिए युवा पर्यावरण-अनुकूल वाहनों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.

योजना के लाभ

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है. इसके अलावा, लाभार्थी केंद्र सरकार की बीमा योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं.

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: ₹12 वार्षिक प्रीमियम पर ₹2 लाख तक दुर्घटना बीमा.

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना: 18 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के लाभार्थियों को ₹330 वार्षिक प्रीमियम पर जीवन बीमा.

आवेदन कैसे करें (ऑफलाइन)

ई-रिक्शा खरीदने के लिए ऋण के लिए आवेदक को नजदीकी सहकारी बैंक में आवेदन करना होगा. प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • संबंधित सहकारी बैंक से आवेदन पत्र प्राप्त करें.
  • बैंक में खाता खोलना अनिवार्य है.
  • आवेदक और दो जमानतदार बैंक के नाममात्र सदस्य बने.
  • आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करें.
  • बैंक द्वारा आवेदन की जांच के बाद ऋण स्वीकृत किया जाएगा और राशि सीधे ई-रिक्शा डीलर को जारी होगी.
  • लाभार्थी ऋण की राशि दैनिक या मासिक किस्तों में 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुका सकेगा.

आवश्यक दस्तावेज

  • ई-रिक्शा डीलर का कोटेशन
  • दो जमानतदारों का विवरण
  • उत्तराखंड स्थायी निवासी प्रमाण पत्र
  • आधार कार्ड
  • सहकारी बैंक का बैंक स्टेटमेंट
  • स्थानीय पते वाला वोटर आईडी कार्ड
  • बिजली या पानी का बिल
  • वैध ड्राइविंग लाइसेंस
  • किराए के मकान में रहने वालों के लिए किरायानामा प्रमाण पत्र

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Delhi Bulldozer Action
दिल्ली में अतिक्रमण के खिलाफ बुल्डोजर एक्शन.

Delhi Bulldozer Action : दिल्ली में तुर्कमान गेट के पास MCD ने आज सुबह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की. अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान 4000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले निर्माणों को हटाने के लिए चलाया गया. कार्रवाई के दौरान 32 JCB मशीनों का इस्तेमाल किया गया, ताकि मलबा जल्दी और सुरक्षित तरीके से हटाया जा सके.

पत्थरबाजी की स्थिति को किया नियंत्रित

कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और अधिकारियों पर पत्थर फेंककर अशांति पैदा करने की कोशिश की. ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, सेंट्रल रेंज, मधुर वर्मा ने कहा कि स्थिति तुरंत नियंत्रण में ले ली गई और न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया. किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है.

FIR दर्ज, संदिग्ध हिरासत में

दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट पर हुई पत्थरबाजी के सिलसिले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की. अब तक करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस CCTV फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग की मदद से पत्थर फेंकने वालों की पहचान कर रही है. अधिकारियों ने बताया कि चार-पाँच संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है.

मलबा हटाने का काम जारी

सिटी एसपी जोन (CSPZ) के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने कहा कि अभियान रात भर चला और मलबा हटाने का काम कल तक जारी रहेगा. अधिकारियों ने कार्रवाई की सफलता पर संतोष जताया और कहा कि पुलिस ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया.

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