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Sheikh Hasina : शेख हसीना को मिली मौत की सजा, बांग्लादेश की ICT का आया फैसला; जानें किस अपराध में ठहराया दोषी

शेख हसीना
शेख हसीना का तीखा बयान.

Sheikh Hasina : बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है. यह फैसला जुलाई–अगस्त 2024 के दौरान हुए आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और हत्याओं के मामलों में दिया गया. शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया.

अपराधों के मुकदमे और अन्य आरोपी

इस मामले में हसीना के अलावा पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून पर भी मुकदमा चला. ICT ने सोमवार को जस्टिस मोहम्मद गोलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता में यह फैसला सुनाया, जिसे लाइव प्रसारित किया गया.

फैसले की विस्तार से जानकारी

जजों ने 453 पन्नों के फैसले के छह हिस्सों में से कई हिस्से पढ़कर सुनाए. इनमें शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में सर्वोच्च दोषी ठहराया गया. वहीं, पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को मौत की सजा से राहत दी गई, क्योंकि उन्होंने सरकारी गवाह के रूप में सहयोग किया.

बांग्लादेश की ICT का फैसला, तीन मुख्य आरोपों में दोषी ठहराया

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई. शेख हसीना और उनके साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल तथा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून के खिलाफ मुकदमा चला.

तीन मुख्य आरोप
ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को तीन आरोपों में दोषी पाया:

  • न्याय में बाधा डालना.
  • हत्याओं का आदेश देना.
  • दंडात्मक हत्याओं को रोकने के लिए कदम न उठाना.

जजों ने कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ढाका में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शेख हसीना ने हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल के आदेश दिए. घायलों को चिकित्सा सुविधा से वंचित किया गया और अस्पताल में भर्ती किए गए पीड़ितों के निशान छिपाए गए. एक डॉक्टर को पोस्ट-मोर्टम रिपोर्ट बदलने की धमकी भी दी गई.

फायरिंग और संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट

कोर्ट में शेख हसीना के एक ऑडियो को प्रस्तुत किया गया, जिसमें वह प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आदेश देती दिखीं. ICT ने अपनी रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें जुलाई–अगस्त 2025 के संघर्ष में 1,400 लोगों के मारे जाने की बात कही गई. फैसला सुनाए जाने पर पीड़ित परिवारों के लोग रोते हुए देखे गए, जबकि कोर्ट में मौजूद अन्य लोग तालियां बजा रहे थे.

2024 चुनाव और बिगड़ता मामला

78 वर्षीय शेख हसीना के खिलाफ मामला जनवरी 2024 में चुनावों के बाद शुरू हुआ. विपक्षी पार्टियों के चुनाव न लड़ने और उनके जीत को तानाशाही का रूप देने के आरोप लगे. अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद बांग्लादेश में हिंसा फैल गई. अंततः शेख हसीना को 5 अगस्त को बांग्लादेश छोड़कर भारत आना पड़ा. उनकी अनुपस्थिति में अंतरिम सरकार ने आवामी लीग को बैन कर दिया.

मुकदमे की प्रक्रिया

ICT-1 ने जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में 453 पन्नों का फैसला पढ़ा. मामून राज्य गवाह बने और अभियोजन ने पांच आरोप दायर किए, जिसमें मृत्युदंड और संपत्ति ज़ब्त करने की मांग की गई. मुकदमे में 81 गवाहों में से 54 ने गवाही दी, जिसमें पूर्व IGP और जांच अधिकारी भी शामिल थे. 23 अक्टूबर को बहस पूरी हुई और ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर को फैसला सुनाया.

अलग-अलग आरोप

  • काउंट 1: हत्या, हत्या का प्रयास, यातना और अन्य अमानवीय कृत्य.
  • काउंट 2: छात्र प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए हथियारों, हेलीकॉप्टर और ड्रोन का आदेश.
  • काउंट 3: बेगम रौकैया विश्वविद्यालय के छात्र अबु सैयद की हत्या.
  • काउंट 4: चांकहरपुल में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या की साजिश.
  • काउंट 5: पांच प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या और एक को घायल करना.

फिलहाल शेख हसीना भारत में, नहीं दिया जा सकता है दंड

शेख हसीना वर्तमान में भारत में हैं. इसलिए उन्हें बांग्लादेश में कोई दंड नहीं दिया जा सकता. अधिकारियों ने कहा कि बांग्लादेश इस मामले को सभी कानूनी विकल्पों के तहत देखेगा.

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Jitan Ram Manjhi : बिहार में नई कैबिनेट का फॉर्मूला तय; मंत्री-बंटवारे पर मांझी का बड़ा बयान, 20 तारीख को शपथ ग्रहण

मंत्री-बंटवारे पर मांझी का बड़ा बयान
मंत्री-बंटवारे पर मांझी का बड़ा बयान.

Jitan Ram Manjhi : बिहार चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की है. इस जीत के बाद नई सरकार के गठन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है. इसी बीच बिहार कैबिनेट को लेकर कयास और चर्चाएं तेज हो गई हैं. नई कैबिनेट में किस पार्टी से कितने मंत्री होंगे, इसका फॉर्मूला क्या होगा और कौन-कौन मंत्री बन सकते हैं, यह सब चर्चा का विषय बन गया है.

जीतन राम मांझी ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अखबारों और मीडिया में पूरी खबर चल रही है. हमें व्यक्तिगत रूप से इस बारे में अभी कुछ नहीं कहना है. 20 तारीख को शपथ ग्रहण समारोह होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वहां उपस्थित रहेंगे. मीडिया में जो नाम सामने आ रहे हैं, उनके अनुसार कैबिनेट में लगभग 35-36 मंत्री शामिल हो सकते हैं. इसमें 16 भाजपा, 14-15 जदयू, 3 लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और 1-1 हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (एस) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मंत्री शामिल हो सकते हैं.”

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जनता की जीत ने सभी दलों को उत्साहित कर दिया

जीतन राम मांझी ने इस अवसर पर बिहार की जनता का तहे दिल से धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि जनता की इस जीत ने सभी दलों को उत्साहित कर दिया है. हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर नई कैबिनेट के गठन की पुष्टि नहीं की, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से पार्टी-wise मंत्री संख्या का अनुमान साझा किया. उन्होंने यह भी बताया कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी होगी.

संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर कयासबाजी जोरों पर

राजनीतिक हलकों में पटना जिले से संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर कयासबाजी जोरों पर है. पार्टी नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच यह उम्मीद है कि इस बार पटना जिले से दो चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. पिछले मंत्रिमंडल में भी पटना जिले से दो-दो मंत्री रहे हैं. पिछली विधानसभा में पटना की 14 सीटों में महागठबंधन ने नौ और भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं. इसके बावजूद पटना सिटी से नंद किशोर यादव और बांकीपुर से नितिन नवीन मंत्री बने थे. बाद में महागठबंधन के साथ मिलकर मंत्रिमंडल का गठन हुआ था.

नई कैबिनेट का आकार लगभग तय

जानकारी के मुताबिक, नई कैबिनेट का आकार लगभग 35-36 मंत्री होगा. भाजपा और जदयू के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए 16 भाजपा और 14-15 जदयू के मंत्री रखे जाने की योजना है. वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से तीन, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (एस) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से एक-एक मंत्री की संभावनाएं हैं. राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह फॉर्मूला एनडीए के भीतर संतुलन और सभी घटक दलों की महत्वता को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है.

शपथ ग्रहण की जारों पर तैयारियां

सूत्रों के अनुसार, 20 नवंबर को गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा. इस कार्यक्रम के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और पंडाल निर्माण समेत अन्य तैयारियां पूरी की जा रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समारोह में मौजूद रहेंगे. समारोह के दौरान सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीय शपथ दिलाई जाएगी.

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CM Resignation
CM Resignation

Bihar News: नई विधानसभा के गठन से पहले बिहार राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की अंतिम बैठक संपन्न हुई. इस बैठक में सरकार के इस्तीफे और विधानसभा भंग करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी. बैठक के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजभवन पहुंचे और अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

इस्तीफा और राजभवन का दौरा

कैबिनेट ने विधानसभा भंग करने और सरकार के इस्तीफे के एजेंडे पर निर्णय लेने के लिए नीतीश कुमार को अधिकृत किया. इसके बाद मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों के साथ राजभवन पहुंचे. उनके साथ समस्त मंत्री, जिसमें सम्राट चौधरी भी शामिल थे, मौजूद रहे. नीतीश कुमार ने राज्यपाल को सरकार और विधानसभा भंग करने की सिफारिश सौंप दी. राज्यपाल ने अगले आदेश तक उन्हें कामकाज संभालने की अनुमति दी.

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कैबिनेट की बैठक में पास हुए तीन प्रस्ताव

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए. पहला, वर्तमान विधानसभा को 19 नवंबर से भंग करने की अनुशंसा. दूसरा, पूरे कार्यकाल में राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के सकारात्मक योगदान और सरकारी नीतियों के सफल क्रियान्वयन की सराहना. तीसरा, एनडीए को हाल के चुनाव में मिली भारी सफलता और नीतीश कुमार के नेतृत्व की प्रशंसा.

नई सरकार का गठन और शपथ ग्रहण की तैयारी

राजभवन सूत्रों के अनुसार, 20 नवंबर को नई सरकार का गठन किया जाएगा. उसी दिन नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं. समारोह की सुरक्षा के लिए पंडाल निर्माण और अन्य तैयारियां पूरी की जा रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस समारोह में शामिल होंगे.

विधायक दल की बैठक और राजनीतिक हलचल

बीजेपी और जदयू विधायक दल की बैठक मंगलवार को आयोजित होगी. इसके बाद एनडीए की संयुक्त बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुना जाएगा. वहीं, राजद के नए निर्वाचित विधायकों और हारे हुए प्रत्याशियों को पटना बुलाया गया है. तेजस्वी यादव उनकी बैठक लेंगे. चुनाव परिणामों के बाद एनडीए में सक्रियता है, जबकि राजद और कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा छाया है. लालू परिवार में कलह जारी है. रोहिणी के बाद उनकी तीन बेटियां—राजलक्ष्मी, चंदा और रागिनी—पटना से दिल्ली मीसा भारती से मिलने चली गई हैं.

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बिहार के मेडिकल कॉलेजों में नीट पीजी की सीटें बढ़ीं, मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत

मेडिकल कॉलेजों में नीट पीजी की सीटें बढ़ीं
मेडिकल कॉलेजों में नीट पीजी की सीटें बढ़ीं

Bihar NEET PG Seats: बिहार से मेडिकल पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पीजी सीटों की संख्या बढ़ाकर अब 204 कर दी गई है. पहले यहां 192 सीटें उपलब्ध थीं, लेकिन हाल ही में 12 नई सीटों को मंजूरी दे दी गई. अलग-अलग जिलों के मेडिकल संस्थानों को इसका लाभ मिलेगा.

हर जिले में बढ़ाई जाएंगी पीजी सीटें

कुल पीजी सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें उन छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी जिन्होंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई बिहार के मेडिकल कॉलेजों से पूरी की है. स्वास्थ्य विभाग की योजना है कि हर जिले के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स उपलब्ध कराया जा सके. सभी संस्थानों से इसके लिए प्रस्ताव मांगने की तैयारी शुरू कर दी गई है.

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इन जिलों में बढ़ीं अलग-अलग विभागों की सीटें

  • दरभंगा मेडिकल कॉलेज: साइकेट्री में 2 नई सीटें
  • सीवान जिला अस्पताल: ओबीजी (Obstetrics & Gynecology) में 2 सीटों की बढ़ोतरी
  • सारण मेडिकल कॉलेज: जनरल मेडिसिन में 2 और एनेस्थिसिया में 2 सीटें
  • मधेपुरा जिला अस्पताल: ओबीजी में 4 नई सीटें

नीट यूजी की तुलना में पीजी सीटें अब भी कम

राज्य के 21 जिलों में पहले से ही मेडिकल पीजी पढ़ाई की मंजूरी है, लेकिन अब सीटें बढ़ने से छात्रों को और विकल्प मिलेंगे. यह भी ध्यान देने योग्य है कि एमबीबीएस यानी नीट यूजी की सीटें बिहार में लगभग 3170 हैं, जो सरकारी और निजी कॉलेजों को मिलाकर तीन हजार से भी अधिक हैं. इसके मुकाबले पीजी सीटों की उपलब्धता कम बनी हुई थी.

DNB के तहत 60 सीटें और बढ़ने की उम्मीद

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (DNB) के तहत 60 और सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) के पास लंबित है. उम्मीद है कि जल्द ही इन सीटों को भी स्वीकृति मिल जाएगी.

हेल्थ सेक्टर को मिलेगी मजबूती

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि पीजी सीटों में बढ़ोतरी से बिहार के एमबीबीएस छात्रों को अब उच्च अध्ययन के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा. इससे प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी काफी हद तक दूर होने की संभावना है.

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सऊदी अरब में दर्दनाक हादसा; उमरा यात्रियों से भरी बस डीजल टैंकर से टकराई, 42 भारतीयों की मौत की आशंका

Saudi Arabia Bus Accident
प्रतिकात्मक तस्वीर.

Saudi Arabia Bus Accident: सऊदी अरब में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई, जब मक्का से मदीना जा रही उमरा यात्रियों की बस एक डीज़ल टैंकर से जा भिड़ी. टक्कर इतनी भयावह थी कि बस देखते ही देखते आग का गोला बन गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसे में 42 भारतीय तीर्थयात्रियों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. यह दुर्घटना भारतीय समयानुसार करीब 1:30 बजे मुफरिहात इलाके में हुई.

बताया जा रहा है कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. सभी तीर्थयात्री हैदराबाद के रहने वाले बताए जा रहे हैं. हादसे के समय बस में करीब 20 महिलाएं और 11 बच्चे सवार थे. कई यात्री सफर के दौरान गहरी नींद में थे, जिस कारण वे बाहर नहीं निकल सके.

मक्का में धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने के बाद सभी यात्री मदीना की ओर जा रहे थे. स्थानीय लोगों ने 42 मौतों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकारी अब भी मृतकों की वास्तविक संख्या और घायलों की स्थिति की जांच कर रहे हैं. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लेकिन इसकी हैलोसिटीज24 पुष्टि नहीं करता है.

मीडिया वन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मीडिया वन के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त बस में कुल 43 यात्री मौजूद थे. इनमें से सिर्फ एक शख्स के जीवित बचने की संभावना जताई गई है, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सभी यात्री मक्का में उमराह की रस्में पूरी करने के बाद मदीना की ओर जा रहे थे. हादसा कैसे हुआ, इसकी वजहें अभी स्पष्ट नहीं हैं. सऊदी प्रशासन भी हालात का आकलन कर रहा है और घटनास्थल की जांच जारी है.

ओवैसी ने जताया दुख, सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस भयावह हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि वे लगातार अधिकारियों से संपर्क में हैं ताकि सही और प्रमाणित जानकारी मिल सके.
ANI से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि उन्होंने दो हैदराबाद-आधारित ट्रैवल एजेंसियों से जुड़े डेटा को रियाद स्थित भारतीय दूतावास और विदेश सचिव के साथ साझा किया है.

उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से आग्रह किया कि मृतकों के शव जल्द से जल्द भारत लाए जाएँ और यदि कोई घायल है तो उसके उपचार की पूरी व्यवस्था हो.

दूतावास से बातचीत, राहत समन्वय तेज

ओवैसी ने रियाद में भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन अबु मैथेन जॉर्ज से भी बात की. उन्होंने जानकारी दी कि दूतावास लगातार घटना से जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर रहा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

तेलंगाना सरकार भी सक्रिय, अधिकारियों को निर्देश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हादसे पर शोक जताते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के कितने लोग इस दुर्घटना में शामिल थे.
सऊदी अधिकारियों ने अभी तक घायल बचे व्यक्ति की स्थिति या कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. राहत टीमें मौके पर तैनात हैं जबकि भारतीय दूतावास लगातार जानकारी जुटाने में लगा हुआ है.

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Muzaffarpur: महिला की हत्या और शव जलाने का सनसनीखेज मामला

Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर में होटल उद्घाटन के दौरान रंगदारी का प्रयास.

Muzaffarpur News : मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध हालात में मौत और शव जलाए जाने का मामला सामने आया है. परिजनों ने ससुराल पक्ष पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

हत्या के बाद शव जलाने का आरोप

सकरा थाना क्षेत्र के मछही गांव में 35 वर्षीय प्रमीला देवी की मौत और शव जलाने की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया. मृतका के पिता राम सकल महतो, जो पियर थाना क्षेत्र के सिमरा गांव निवासी हैं, ने रविवार शाम सकरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई. इसमें पति अनिल महतो, ससुर विरेन्द्र महतो सहित चार लोगों के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने का आरोप लगाया गया है.

विवादों से भरा था वैवाहिक जीवन

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एफआईआर में कहा गया है कि प्रमीला की शादी 15 वर्ष पहले मछही गांव के अनिल महतो से हुई थी. पिता के अनुसार, शादी के बाद से ही परिवार में लगातार विवाद चलता रहा. आरोप है कि इसी विवाद के कारण ससुराल पक्ष ने उसकी हत्या कर शव को जला दिया.

स्थानीय लोगों से मिली सूचना

परिजनों ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें घटना की सूचना दी. जब वे मछही गांव पहुंचे, तो हत्या और शव जलाने की बात सामने आई. घटना के बाद गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है.

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. घटनास्थल और गवाहों के बयान को आधार बनाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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प्रेस दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन.
प्रेस दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन.

Bhagalpur News : संयुक्त निदेशक जनसंपर्क, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में राष्ट्रीय प्रेस दिवस 2025 का आयोजन किया गया. आयोजन का शुभारंभ संयुक्त निदेशक एवं वरिष्ठ संवाददाताओं के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया.

​इस अवसर पर संयुक्त निदेशक ने कहा कि 16 नवंबर 1966 को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना हुई थी. उन्होंने बताया कि 1978 में प्रेस काउंसिल एक्ट बना. इसमें 28 सदस्य होते हैं और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसके अध्यक्ष होते हैं. संयुक्त निदेशक ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को एक स्वायत्त वैधानिक संस्था बताया जो देश में प्रेस की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए काम करती है. यह प्रेस की जिम्मेदारी सुनिश्चित करती है कि पत्रकार एवं मीडिया संस्थान शत प्रतिशत नैतिक रिपोर्टिंग करें.

​संयुक्त निदेशक ने कहा कि इस वर्ष का विषय गलत सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता को बनाए रखना है. उन्होंने जोर दिया कि गलत सूचना एवं अफवाह कई बार सामाजिक सौहार्द बिगाड़ देती है और किसी गंभीर सामाजिक घटना का वाहक भी बन जाती है. इसलिए संवेदनशील मुद्दे सदैव छानबीन करके ही प्रकाशित किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध यदि गंभीर आरोप लगाया जा रहा है उन से भी उनका पक्ष जान लेना चाहिए. खबर सदैव सटीक एवं निष्पक्ष होना चाहिए.

​इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव सिद्धार्थ (आज तक), प्रवीण मिश्रा (नई बात) एवं मो तसनीम कौशल इकबाल (उर्दू) ने भी राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर अपने विचार रखे.

​कार्यक्रम में दैनिक जागरण के वरीय संवाददाता नवनीत मिश्रा, प्रभात खबर के वरीय संवाददाता आरफीन जुबेर, दीपक नौरंगी, विजय कुमार सिन्हा, श्यामानंद सिंह, विकास कुमार, दिलीप कुमार, मनोज गुप्ता, कांतेश कुमार, सैयद इनाम उद्दीन, रईस खान एवं विभिन्न मीडिया संस्थान के मीडिया कर्मी उपस्थित थे.

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NEET PG Counselling: एमसीसी ने बदला पूरा शेड्यूल, जानें राउंड-1 से राउंड-3 तक की नई तिथियां

NEET PG (प्रतीकात्मक तस्वीर)
NEET PG (प्रतीकात्मक तस्वीर)

NEET PG Counselling 2025 Revised Schedule: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नीट पीजी 2025 की काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम घोषित कर दिया है. यह शेड्यूल 50% अखिल भारतीय कोटा (AIQ) सीटों के साथ-साथ डीम्ड और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की 100% सीटों पर लागू होगा. नए कार्यक्रम के तहत पहले राउंड की च्वॉइस फिलिंग 17 नवंबर 2025 से शुरू होने जा रही है.

MCC NEET PG Counselling Schedule: पहले राउंड का पूरा कार्यक्रम

पहले चरण की च्वॉइस फिलिंग 17 नवंबर से शुरू होकर 18 नवंबर 2025 की रात 11:55 बजे तक चलेगी. उम्मीदवार 18 नवंबर को शाम 4 बजे से लेकर रात 11:55 तक च्वॉइस लॉक कर सकेंगे. सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया 19 नवंबर को पूरी होगी, जबकि रिजल्ट 20 नवंबर को घोषित किया जाएगा. इसके बाद 21 से 27 नवंबर 2025 के बीच रिपोर्टिंग और ज्वॉइनिंग की प्रक्रिया संपन्न होगी.

NEET PG 2025 Revised Schedule (प्वॉइंट्स में)

  • च्वॉइस फिलिंग (Round 1): 17 नवंबर 2025 से 18 नवंबर 2025 रात 11:55 PM तक
  • च्वॉइस लॉकिंग: 18 नवंबर 4:00 PM से 11:55 PM तक
  • सीट अलॉटमेंट: 19 नवंबर 2025
  • रिजल्ट जारी: 20 नवंबर 2025
  • रिपोर्टिंग व ज्वॉइनिंग: 21–27 नवंबर 2025

NEET PG Counselling 2025 Round 2: राउंड-2 का शेड्यूल

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दूसरे राउंड की शुरुआत 1 दिसंबर 2025 से वेरिफिकेशन के साथ होगी. 2 से 7 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन और पेमेंट की प्रक्रिया चलेगी (पेमेंट की अंतिम समय सीमा—7 दिसंबर दोपहर 3 बजे). च्वॉइस फिलिंग 3 से 7 दिसंबर तक होगी और 7 दिसंबर को ही लॉकिंग की जाएगी. सीट अलॉटमेंट 8–9 दिसंबर को किया जाएगा, जबकि रिजल्ट 10 दिसंबर को घोषित होगा. रिपोर्टिंग और ज्वॉइनिंग के लिए उम्मीदवारों को 11 से 18 दिसंबर तक का समय मिलेगा.

NEET PG Counselling 2025 Round 3: राउंड-3 का कार्यक्रम

तीसरे चरण की प्रक्रिया 22 दिसंबर को वेरिफिकेशन से शुरू होगी. रजिस्ट्रेशन और पेमेंट 23 से 28 दिसंबर तक किया जाएगा (पेमेंट की समय सीमा—28 दिसंबर दोपहर 3 बजे). च्वॉइस फिलिंग 24 से 28 दिसंबर तक चलेगी और 28 दिसंबर को ही लॉकिंग होगी. सीट अलॉटमेंट 29–30 दिसंबर को प्रोसेस होगा और रिजल्ट 31 दिसंबर को जारी किया जाएगा. रिपोर्टिंग और ज्वॉइनिंग 1 से 8 जनवरी 2026 तक होंगी. इसके बाद संस्थान 9 से 11 जनवरी के बीच ज्वॉइनिंग डेटा एमसीसी को भेजेंगे.

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प्रशांत किशोर
चुनावी हार पर बोले प्रशांत किशोर

Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने कई बड़े दावों की हकीकत साफ कर दी है. जनसुराज प्रमुख प्रशांत किशोर जिन सीटों का अनुमान लगा रहे थे, वह ज़मीन पर बिल्कुल नहीं उतरा. पार्टी का एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका. इसी बीच जेडीयू को लेकर चुनाव से पहले किए गए उनके दावे एक बार फिर सुर्खियों में हैं.

जेडीयू की 85 सीटों पर जीत, एनडीए की सत्ता भी बरकरार

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अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या प्रशांत किशोर अपनी कही बात के अनुसार राजनीति से संन्यास लेंगे. एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि जेडीयू इस बार 25 सीटों से ऊपर नहीं जाएगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह राजनीति छोड़ देंगे. मगर नतीजों में जेडीयू ने 85 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की और एनडीए की सत्ता भी बरकरार रही. इसी कारण उनका पुराना बयान फिर चर्चाओं में है.

पटना में लगाए गए पोस्टर, नई बहस छिड़ गई

जेडीयू के 25 से ज्यादा सीटें मिलने के बाद पटना में एक पोस्टर भी लगाया गया, जिसमें प्रशांत किशोर की बड़ी तस्वीर के साथ उनका मायूस चेहरा दिखाया गया है. पोस्टर पर लिखा है—‘जदयू को 25 सीट से ज्यादा मिलने के कारण प्रशांत किशोर ने राजनीति से लिया संन्यास’। इस पोस्टर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशांत किशोर इस चर्चा पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.

उदय सिंह का बयान : पार्टी चुनाव नतीजों से हताश नहीं

नतीजों के बाद जनसुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा कि पार्टी चुनाव नतीजों से हताश नहीं है. उनका कहना था कि तीन वर्षों से चल रहे जनसंवाद और जमीनी अभियान के बावजूद सीट न मिलना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने दावा किया कि जनता ने पार्टी के मुद्दों को समझा और समर्थन भी दिया, लेकिन अंतिम समय में राजद की संभावित वापसी के डर से बड़ी संख्या में वोट एनडीए की ओर खिसक गए.

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रमीज, रोहिणी आचार्य और संजय यादव. (फाइल फोटो)
रमीज, रोहिणी आचार्य और संजय यादव. (फाइल फोटो)

Lalu Family Dispute : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीतिक मैदान के साथ-साथ लालू परिवार की अंदरूनी स्थिति को भी झकझोर दिया है. राजद की करारी हार के बाद रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से तेजस्वी यादव और उनके करीबी सलाहकारों को निशाना बनाकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. परिवार की दूसरी पीढ़ी के बीच बढ़ती दूरी अब साफ दिखाई देने लगी है और इसे लेकर पूरे बिहार की राजनीति में चर्चा तेज है.

लालू परिवार में बढ़ती दूरियों की शुरुआत

बिहार में इस बार चुनावी नतीजे चौंकाने वाले रहे. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, एनडीए को रिकॉर्ड 202 सीटें मिलीं और दूसरी तरफ राजद अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर में पहुंच गई.
लेकिन हार से ज्यादा ध्यान खींचा—परिवार की फूट ने.

लालू परिवार

सदस्यसंबंधमुख्य जानकारी / परिचय
लालू प्रसाद यादवपिताराष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
राबड़ी देवीमाताबिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री
नामसंबंधमुख्य जानकारी
तेज प्रताप यादवबेटा (बड़ा)पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, विधायक, राजनीति में सक्रिय
तेजस्वी यादवबेटा (छोटा)बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री, RJD नेता, CM उम्मीदवार
नामसंबंधमुख्य जानकारी
मीसा भारतीबड़ी बेटीराज्यसभा सांसद
रोहिणी आचार्यबेटीसामाजिक कार्यकर्ता, राजनीति में सक्रिय भूमिका, पति समरेश सिंह
चंदा यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति विक्रम सिंह
रागिनी यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति राहुल यादव
हेमा यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति विनीत यादव
अनुष्का यादवबेटीनिजी जीवन में, राजनीति से दूर, पति चिरंजीवी राव
राजलक्ष्मी यादवसबसे छोटी बेटीसमाजवादी पार्टी नेता तेज प्रताप सिंह की पत्नी

तेजप्रताप पहले ही पार्टी छोड़कर अलग राह पकड़ चुके थे, लेकिन इस बार रोहिणी आचार्य के आरोप कहीं ज्यादा सख्त और सीधे थे. उनका कहना है कि टिकट बांटने में मनमानी, परिवार की अनदेखी और बाहरी सलाहकारों का दखल पार्टी को कमजोर करने वाली असली वजह बनी.

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क्यों नाराज हैं रोहिणी आचार्य?

लालू प्रसाद यादव के नौ बच्चों में दूसरे नंबर की रोहिणी आचार्य परिवार में हमेशा सम्मानजनक स्थिति रखती हैं. किडनी देकर पिता की जान बचाने के बाद वे “आदर्श बेटी” के रूप में जानी जाती हैं.
रोहिणी चाहती थीं कि उन्हें विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी का टिकट मिले, लेकिन तेजस्वी नेतृत्व ने यह मौका नहीं दिया.

उनका आरोप है कि पार्टी की दुर्दशा की असली वजह वही लोग हैं जिन्होंने टिकट बंटवारे को अपनी निजी रणनीति और निष्ठाओं के आधार पर तय किया.
इसलिए जब चुनाव में करारी हार मिली, तो वे चाहती थीं कि तेजस्वी जिम्मेदारी लें और परिवार में संवाद स्थापित करें.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ और रोहिणी का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा.

वे कहती हैं कि परिवार की बेटियों को हक नहीं दिया जा रहा, जबकि तेजस्वी और उनके दो सलाहकार संगठन और परिवार को अपने मुताबिक चलाना चाहते हैं.

कौन है संजय यादव, जिस पर आरोपों की बौछार हुई?

संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सलाहकार माने जाते हैं.
हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले संजय ने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया.
आईपीएल के दौरान तेजस्वी से उनकी दोस्ती हुई और फिर 2012 में उन्होंने सीधे राजद जॉइन कर ली.

धीरे-धीरे पार्टी में उनका प्रभाव इतना बढ़ा कि तेजस्वी तक पहुंचना बिना संजय के लगभग असंभव माना जाता है.
राज्यसभा 2024 में भेजे जाने के बाद उनकी ताकत और बढ़ गई.

लेकिन पार्टी के भीतर यह आरोप भी लगते रहे कि वे परिवार के असहमत सदस्यों को साइडलाइन करते हैं और फैसलों पर अत्यधिक पकड़ बनाते जा रहे हैं.
इसी पृष्ठभूमि में रोहिणी ने भी उन पर कटाक्ष किया.

रमीज कौन है, और उसका नाम क्यों उछला?

रमीज नेमत खान, तेजस्वी के बचपन और क्रिकेट के दिनों के मित्र हैं.
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से जुड़े रमीज पूर्व सांसद रिजवान जहीर खान के दामाद हैं.
आज की तारीख में वे तेजस्वी के कार्यक्रमों, राजनीतिक कैलेंडर और कई अहम फैसलों के प्रमुख संचालनकर्ता माने जाते हैं.

परिवार में उनकी छवि उतनी सकारात्मक नहीं है. खासकर बेटियां और तेजप्रताप, रमीज के प्रभाव से नाराज बताए जाते हैं.
रोहिणी के बयानों में उनका नाम आने के बाद यह सवाल गहराया कि क्या वे भी राजनीतिक रणनीति में परिवार की राय को कमजोर कर रहे थे.

लालू परिवार के अंदर असली विवाद क्या है?

लालू प्रसाद यादव अब उम्रदराज हो चुके हैं और कानूनी मामलों से घिरे हैं.
पार्टी की कमान उन्होंने तेजस्वी को सौंप दी है, लेकिन परिवार के कई सदस्य—खासतौर पर मीसा भारती, तेजप्रताप और अब रोहिणी—मानते हैं कि उन्हें भी राजनीतिक विरासत में बराबरी से जगह मिलनी चाहिए.

उधर, तेजस्वी अपनी नेतृत्व शैली पर कायम हैं और पार्टी की कमान में अपने भरोसेमंद लोगों को रखना चाहते हैं.
इसी टकराव ने परिवार के भीतर खींचतान को बढ़ाया और चुनावी हार ने इसे और विस्फोटक बना दिया.

सवाल राजनीतिक पदों का ही नहीं, बल्कि संपत्ति और परिवार के अधिकार क्षेत्र का भी है.
इस पृष्ठभूमि में संजय और रमीज की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक था, जिनकी तुलना कुछ लोग ‘जयचंद’ जैसे ऐतिहासिक विश्वासघाती पात्र से करने लगे.

जयचंद की तुलना क्यों?

भारतीय इतिहास में जयचंद एक ऐसे राजा के रूप में प्रसिद्ध है जिसे पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ विश्वासघात करने वाला बताया गया.
हालांकि कई इतिहासकार इस कहानी को अतिरंजित मानते हैं, लेकिन लोकप्रिय संस्कृति में ‘जयचंद’ शब्द आज भी धोखे का प्रतीक है.

रोहिणी के समर्थकों का संकेत है कि संजय और रमीज ने ऐसी भूमिका निभाई जिससे परिवार में अविश्वास बढ़ा, लेकिन यह तुलना राजनीतिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया अधिक लगती है.

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