Chaitra Chhath 2026: चैत्र छठ महापर्व की शुरुआत 22 मार्च 2026 से हो चुकी है और चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व का दूसरा दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. 23 मार्च को खरना मनाया जाएगा, जिसे शुद्धता और संयम का प्रतीक माना जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और सूर्यास्त के बाद विधि-विधान से पूजा कर प्रसाद ग्रहण करती हैं. खरना के साथ ही छठ पर्व का मुख्य अनुष्ठान शुरू हो जाता है और घरों में पूरी तरह सात्विक वातावरण बना रहता है. श्रद्धालु इस दिन नियमों का विशेष ध्यान रखते हुए पूजा की तैयारी में जुटे रहते हैं.
खरना का धार्मिक महत्व और पूजा विधि
खरना को आत्मशुद्धि और भक्ति का विशेष दिन माना जाता है. इस दिन व्रती सूर्य देव और छठी मैया का स्मरण करते हुए शाम के समय पूजा करती हैं. सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर दीप प्रज्वलित किया जाता है. इसके बाद गंगाजल और दूध मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है.
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पूजा के दौरान व्रती पूरी श्रद्धा के साथ मंत्रोच्चार करती हैं और फिर प्रसाद अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि खरना के दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी होता है. पूजा पूर्ण होने के बाद व्रती सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करती हैं और फिर परिवार तथा आसपास के लोगों में इसे बांटा जाता है.
खरना के दिन क्या बनता है प्रसाद
23 मार्च सोमवार को खरना के दिन घरों में विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है. पूरे दिन उपवास के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर शुद्ध तरीके से भोजन बनाया जाता है. इस दिन गुड़ की खीर और रोटी प्रमुख प्रसाद के रूप में तैयार की जाती है.
इसके अलावा कई घरों में दाल और अरवा चावल का भात भी बनाया जाता है. प्रसाद बनाने में विशेष सावधानी बरती जाती है, ताकि उसमें किसी प्रकार की अशुद्धि न हो. यही प्रसाद व्रती सबसे पहले ग्रहण करती हैं और फिर इसे सभी में वितरित किया जाता है.
सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा
खरना के दिन सूर्यास्त से पहले सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है. इसके लिए साफ बर्तन में गंगाजल और दूध मिलाकर अर्पित किया जाता है. पूजा के समय दीप जलाना और शांत वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है.
श्रद्धालु इस दौरान पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं, ताकि छठी मैया की कृपा प्राप्त हो सके. यह अनुष्ठान छठ पर्व के आगे के दिनों की तैयारी का भी अहम हिस्सा होता है.
इन नियमों का रखना होता है विशेष ध्यान
खरना के दिन व्रती और परिवार के सदस्यों को कई तरह की सावधानियां बरतनी होती हैं. इस दिन सात्विकता और शुद्धता का विशेष महत्व होता है.
- व्रती के लिए साधारण नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है.
- घर में लहसुन, प्याज और मांसाहार का उपयोग नहीं किया जाता है.
- प्रसाद बनाने के लिए उपयोग होने वाले बर्तन पूरी तरह साफ और शुद्ध होने चाहिए.
- बेहतर होता है कि बर्तन नए हों या केवल छठ पूजा के लिए ही इस्तेमाल किए जाएं.
- घर में शांत और सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी होता है.
- किसी प्रकार का विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए.
आस्था और अनुशासन का पर्व
चैत्र छठ का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि अनुशासन और संयम का प्रतीक भी है. व्रती पूरे नियम और श्रद्धा के साथ इस पर्व को निभाते हैं. खरना के दिन से ही छठ की मुख्य प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो अगले दिनों में और अधिक विधि-विधान के साथ आगे बढ़ती है.
इस पर्व के जरिए प्रकृति, सूर्य देव और छठी मैया के प्रति आस्था व्यक्त की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.
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