Bihar Politics: बिहार में राज्यसभा चुनाव के दौरान अनुपस्थित रहने वाले कांग्रेस के तीन विधायकों पर पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित विधायकों से जवाब-तलब किया है. समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद और सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है. पार्टी का मानना है कि इनकी गैरहाजिरी ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया, जिससे महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा और नतीजे उम्मीद के विपरीत चले गए.
संपर्क नहीं होने से बढ़ा शक
अनुशासन समिति के अनुसार मतदान के समय इन विधायकों से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली. पहले कॉल रिसीव नहीं हुए और बाद में मोबाइल फोन बंद हो गए. इस स्थिति ने पार्टी नेतृत्व के बीच संदेह को और गहरा कर दिया. स्पष्ट किया गया है कि यदि अनुपस्थिति के पीछे ठोस कारण नहीं बताया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
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मनोज विश्वास का बयान, नेतृत्व पर उठाए सवाल
फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास ने इस पूरे मामले पर अलग रुख अपनाते हुए प्रदेश नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि Rajesh Ram ने बैठक में विधायकों को अपने विवेक से मतदान करने की बात कही थी. इसके साथ ही उन्होंने Tejashwi Yadav पर भी निशाना साधा और कहा कि उम्मीदवार चयन में सहयोगी दलों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई, जिससे असंतोष की स्थिति बनी.
प्रदेश अध्यक्ष का जवाब, कार्रवाई के संकेत
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Rajesh Ram ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी विधायक पार्टी लाइन से अलग गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई तय है. साथ ही संकेत दिया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद आगे के कदम उठाए जाएंगे.
चार वोटों ने बदला पूरा परिणाम
राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की स्थिति पहले मजबूत मानी जा रही थी. संख्याबल के आधार पर जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन मतदान के दिन स्थिति बदल गई. अपेक्षित संख्या में वोट नहीं मिलने के कारण समीकरण बिगड़ गया और गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा. कांग्रेस के तीन और एक अन्य सहयोगी विधायक के वोट नहीं मिलने से परिणाम पूरी तरह पलट गया.
एनडीए को मिला सीधा लाभ
इस घटनाक्रम का फायदा सीधे तौर पर एनडीए को मिला. बीजेपी उम्मीदवार शिवेश राम ने जीत हासिल कर ली, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल गए. इस नतीजे ने महागठबंधन के भीतर समन्वय की कमी और अंदरूनी असंतोष को भी उजागर कर दिया है.
अंदरूनी कलह आई सामने
इस पूरे प्रकरण के बाद महागठबंधन के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की स्थितियों को नहीं संभाला गया, तो आने वाले चुनावों में इसका असर और गहरा हो सकता है. फिलहाल सबकी नजर कांग्रेस के अगले कदम और विधायकों के जवाब पर टिकी हुई है.
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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