West Asia : वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा और जरूरी संसाधनों की स्थिति पर गहन समीक्षा शुरू कर दी है. 22 मार्च को हुई उच्चस्तरीय बैठक में पेट्रोलियम उत्पाद, कच्चा तेल, गैस आपूर्ति, बिजली उत्पादन और खाद की उपलब्धता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. इस बैठक में वैश्विक हालात के संभावित असर का आकलन किया गया और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि देश में सप्लाई चेन प्रभावित न हो. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न मंत्रालयों को अलर्ट मोड में रखा गया है और जरूरत पड़ने पर त्वरित फैसले लेने की रणनीति तैयार की गई है.
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At 2 PM today, Prime Minister Narendra Modi will speak in the Lok Sabha on key aspects of the ongoing West Asia conflict. pic.twitter.com/DisWargi3C
— ANI (@ANI) March 23, 2026
संसद में सरकार का रुख होगा स्पष्ट
बजट सत्र के बीच सोमवार दोपहर 2 बजे प्रधानमंत्री लोकसभा में इस पूरे मसले पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करेंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक परिदृश्य की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए इस संकट का भारत पर क्या असर पड़ सकता है और उससे निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.
#WATCH | Delhi | On PM Modi chaired CCS meeting to review ongoing West Asia Conflict, Congress MP Mallu Ravi says, "The Prime Minister should have called for an All-Party meeting in the beginning so that the problem regarding LPG could have been avoided. Now it looks like a… pic.twitter.com/BEWqjdtBuj
— ANI (@ANI) March 23, 2026
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके. खासतौर पर ऊर्जा क्षेत्र को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
#WATCH | Delhi | On PM Modi chaired CCS meeting to review ongoing West Asia Conflict, JDU MP Sanjay Kumar Jha says, "There is no idea till when the conflict will last. The PM reviewed the entire matter. Everything seems under control with regard to the LPG situation, and the PM… pic.twitter.com/BKSZqo7keI
— ANI (@ANI) March 23, 2026
विपक्ष ने उठाए सवाल, सर्वदलीय बैठक की मांग
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि सरकार को शुरुआत में ही सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए था. उनका मानना है कि यदि पहले चर्चा होती तो एलपीजी जैसी समस्याओं को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था.
वहीं, कांग्रेस के ही सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने भी बैठक के नतीजों को सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं और आर्थिक संसाधनों का किस तरह उपयोग किया जा रहा है.
#WATCH | Delhi | On PM Modi chaired CCS meeting to review ongoing West Asia Conflict, Congress MP Ujjwal Raman Singh says, "The people want to know what is the outcome of the meeting and that why it did not take place earlier… We demand that during the Parliament session, the… pic.twitter.com/xPQnYCOysJ
— ANI (@ANI) March 23, 2026
सरकार ने स्थिति को बताया नियंत्रण में
दूसरी ओर, सत्तापक्ष ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है. जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव की अवधि को लेकर अभी कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि फिलहाल एलपीजी और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और यदि भविष्य में हालात बिगड़ते हैं, तो उससे निपटने के लिए सरकार तैयार है. सरकार का दावा है कि देश के भीतर आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर स्तर पर तैयारी की जा रही है.
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