Holastak 2026: फाल्गुन मास की शुक्ल अष्टमी से शुरू होने वाला होलाष्टक 8 दिन तक चलता है. इस अवधि में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को टालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन दिनों ग्रहों की उग्र स्थिति के कारण परिणाम अनुकूल नहीं होते. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु इन आठ दिनों में उग्र अवस्था में होते हैं.
होलाष्टक कब शुरू और कब खत्म होगा?
इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी 2026 सुबह 7:02 बजे से शुरू होगा और 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा. इस दौरान दान, पूजा, ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुभ माना जाता है. किसी भी मांगलिक कार्य, शादी, नए व्यवसाय की शुरुआत या भूमि संबंधी सौदे इन आठ दिनों में टालना चाहिए.
होलाष्टक का वैदिक महत्व
श्री स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय के ब्रजमोहन पांडेय के अनुसार, होलाष्टक की रातों में साधना और मंत्र-जप का विशेष महत्व है. इस समय की साधनाओं का असर जल्दी मिलता है और यह नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने में सहायक मानी जाती है.
पौराणिक कथाओं में होलाष्टक
होलाष्टक की पौराणिक मान्यता भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप से जुड़ी है. कथा के अनुसार, होलिका दहन से 8 दिन पहले तक राजा हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए यातनाएं दी. होलिका अग्नि में बैठी, लेकिन वह जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे. इसलिए इन आठ दिनों को अशुभ माना गया.
शिव पुराण में भी होलाष्टक का उल्लेख है. असुर तारकासुर का वध भगवान शिव के पुत्र से होना था, लेकिन देवी सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए. देवताओं ने कामदेव और रति को भेजा, जिससे शिवजी क्रोधित हुए और तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया. शिवजी को मनाने में देवताओं को आठ दिन लगे, जिसे होलाष्टक माना गया.
होलाष्टक में क्या करें और क्या न करें
- शुभ कार्य टालें: विवाह, भूमि लेन-देन, नए व्यवसाय की शुरुआत आदि.
- शुभ साधनाएँ करें: दान, ध्यान, भगवान विष्णु, शिव, राम और हनुमान की आराधना.
- अर्थसिद्धि और पूजा: इस अवधि में दान करना और मंत्र-जप शुभ माने जाते हैं.
- सावधानियाँ: गुस्सा, झगड़ा और विवाद से दूर रहें.
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च सोमवार 05:18 बजे से 3 मार्च मंगलवार 04:33 बजे
- भद्रा समय: 2 मार्च 05:19 से 3 मार्च 04:56
- होलिका दहन का समय: 3 मार्च सुबह 04:57 से 1 घंटा 4 मिनट
होलिका दहन पूजा-विधि
- संकल्प लेकर पूजा शुरू करें.
- भगवान गणेश और भक्त प्रह्लाद का ध्यान करें.
- अग्नि में फूल, अक्षत, चंदन, हल्दी, गुलाल, पांच प्रकार के अनाज, गेहूं की बालियां, गन्ना और चावल अर्पित करें.
- कच्चा सूत लपेटकर होलिका के चारों ओर तीन परिक्रमा करें.
- होलिका मंत्र –
‘असूक्याभयसंत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिषैः…’
का उच्चारण करते हुए अग्नि को जल का अर्घ्य दें. - राख माथे और पूरे शरीर पर लगाएं, इससे जातक रोग-मुक्त और खुशहाल रहता है.
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