US Sand Iran Warship IRIS Dena: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हालिया मौत के बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ा दिया है. इसी तनावपूर्ण माहौल में हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाया. इस हमले में कम से कम 87 नौसैनिकों की मौत हुई और 32 लोग जीवित बचाए गए. अनुमानित रूप से जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे, जिनमें कई अभी भी लापता हैं.
यह हमला हिंद महासागर में अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन का संकेत है और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों को भी प्रभावित कर सकता है.
इसे भी पढ़ें-ईरान में सत्ता का नया चेहरा: मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर
संकट संदेश: IRIS Dena ने सुबह 5:30 बजे अलर्ट भेजा
ईरानी नौसेना के साउदर्न फ्लीट का फ्रिगेट IRIS Dena सुबह 5:30 बजे संकट संदेश भेज चुका था. उस समय जहाज श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 40 समुद्री मील दूर था.
https://t.co/PiqQpVIrMu pic.twitter.com/Wc1e0B0um7
— Department of War 🇺🇸 (@DeptofWar) March 4, 2026
श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, जिसमें गश्ती जहाज, हेलीकॉप्टर और समुद्री निगरानी यंत्र शामिल थे. नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपथ ने बताया कि जहाज डूबने के बाद समुद्र की सतह पर केवल तेल का धब्बा दिखाई दिया. उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो फुटेज सार्वजनिक नहीं की गई क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय बल शामिल थे.
अमेरिकी पनडुब्बी और टॉरपीडो हमले की पुष्टि
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि यह हमला अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किया गया. पेंटागन ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें जहाज के पास भारी विस्फोट और जहाज के डूबने की प्रक्रिया साफ दिखाई देती है.
अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि यह 1945 के बाद पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने किसी दुश्मन युद्धपोत को एक ही MK-48 टॉरपीडो से डुबाया. सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला अमेरिकी नौसैनिक क्षमता और रणनीति का प्रभावशाली प्रदर्शन है और हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को बदल सकता है.
IRIS Dena का तकनीकी विवरण और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक सहभागिता
IRIS Dena हाल ही में कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रमों में शामिल रही थी. फरवरी में यह इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के स्वागत समारोह में शामिल हुआ. भारतीय नौसेना ने इसके आगमन पर औपचारिक स्वागत किया था.
यह फ्रिगेट ईरान के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र के माउंट डेना के नाम पर रखा गया है. इसे गश्त और युद्ध अभियानों के लिए आधुनिक हथियार और रडार सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया है. इसमें एंटी-शिप मिसाइलें, 76 मिमी तोप, टॉरपीडो लॉन्चर, हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड और रडार सिस्टम लगे हुए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इसमें आधुनिक लक्षित मिसाइलें और तेज़ प्रतिक्रिया वाले टारगेटिंग सिस्टम भी हैं, जो इसे क्षेत्रीय अभियानों के लिए सक्षम बनाते हैं.
हिंद महासागर का रणनीतिक महत्व और वैश्विक प्रभाव
श्रीलंका का दक्षिणी समुद्री क्षेत्र हिंद महासागर के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों के पास स्थित है, जो एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ता है. इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है.
हालांकि श्रीलंका ने इस संघर्ष में तटस्थ रुख अपनाया है, लेकिन यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए अहम माना जाता है. अमेरिकी और ईरानी नौसैनिकों के बीच यह हमला न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर भी असर डाल सकता है.
IRIS Dena पर यह हमला हिंद महासागर में अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन का संकेत है और ईरान की नौसैनिक गतिविधियों पर बड़ा दबाव डालेगा.
लापता व्यक्तियों की खोज जारी
श्रीलंका की नौसेना के अनुसार, संकट संदेश मिलने के एक घंटे के भीतर जहाज को बचाने का प्रयास किया गया. बावजूद इसके जहाज पूरी तरह डूब चुका था. समुद्र पर केवल तेल का धब्बा दिखाई दिया. बचाव अभियान में 32 लोग जीवित बचे और 87 की मौत की पुष्टि हुई. लापता व्यक्तियों की खोज अभी जारी है.
इसे भी पढ़ें-US सेना का आया बयान; कुवैत ने अनजाने में तीन F-15E विमान गिराए
इसे भी पढ़ें-दुनिया की अहम तेल सप्लाई लाइन पर ड्रोन हमला, सऊदी ऑयल टर्मिनल में भड़की आग
इसे भी पढ़ें-ईरान में तबाही का ऑपरेशन: 1000 ठिकानों पर अमेरिका का प्रहार, जानिए किन घातक हथियारों से हुआ हमला

