Iran Attack Bahrain Oil Refinery: मध्य पूर्व में जारी सैन्य टकराव अब खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है. बहरीन सरकार ने बताया है कि देश की सरकारी तेल कंपनी की एक प्रमुख रिफाइनरी के नजदीक मिसाइल आकर गिरी. घटना के बाद परिसर में आग लग गई थी, लेकिन आपातकालीन दलों ने कुछ ही देर में आग पर नियंत्रण पा लिया.
अधिकारियों के मुताबिक रिफाइनरी के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और फिलहाल उत्पादन सामान्य रूप से जारी है. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है.
İran'ın, Bahreyn'de ulusal petrol şirketi BAPCO'ya ait ana rafineriye ve yakınındaki diğer altyapı tesislerine balistik füze saldırısı düzenlediği bildirildi
— Anadolu Ajansı (@anadoluajansi) March 5, 2026
Can kaybı veya yaralanmanın yaşanmadığı saldırı sonrası çıkan yangın, çevredekiler tarafından kaydedildi pic.twitter.com/qHWvKhxBkB
सितरा आईलैंड स्थित ऊर्जा केंद्र बना निशाना
बहरीन के राष्ट्रीय संचार केंद्र के अनुसार जिस रिफाइनरी के पास यह घटना हुई, वह देश के पूर्वी तट पर स्थित सितरा आईलैंड में है. यह इलाका राजधानी मनामा के दक्षिणी हिस्से में पड़ता है और बहरीन के ऊर्जा नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जाता है.
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विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है. अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से कई स्थानों पर जवाबी हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं.
ऊर्जा ढांचे पर हमला होने की स्थिति में न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ सकता है.
सोशल मीडिया पर सामने आए हमले के दृश्य
घटना से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुए हैं. इन वीडियो में रिफाइनरी क्षेत्र के आसमान में मिसाइल जैसी वस्तु गिरती दिखाई देती है, जिसके बाद आग की लपटें उठती नजर आती हैं.
साथ ही बहरीन की वायु रक्षा प्रणाली भी सक्रिय दिखाई देती है, जो अन्य संभावित मिसाइलों को रोकने की कोशिश करती नजर आती है. हमले के बाद आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग छतों और खुले स्थानों पर आकर आसमान में हो रही गतिविधियों को देखते दिखाई दिए.
खाड़ी के अन्य देशों में भी हमलों की खबरें
क्षेत्रीय तनाव के बीच खाड़ी के कई देशों ने ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है. पिछले कुछ दिनों में सऊदी अरब और कतर के ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं.
सऊदी अरब में रास तनुरा तेल रिफाइनरी के आसपास ड्रोन हमले की सूचना दी गई थी. वहीं कतर में रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी जैसे प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्रों पर भी हमले के प्रयास का दावा किया गया.
इन घटनाओं के बाद कई स्थानों पर अस्थायी रूप से परिचालन रोकने के कदम उठाए गए थे ताकि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके.
कई देशों में ड्रोन और मिसाइल अलर्ट
गुरुवार को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया.
सऊदी अरब: रियाद में अमेरिकी दूतावास परिसर को लक्ष्य बनाकर ड्रोन भेजे जाने की सूचना मिली. वायु रक्षा प्रणाली ने अल-खारज इलाके के पास कई ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया.
संयुक्त अरब अमीरात: अबू धाबी में कई विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया. फुजैराह क्षेत्र में भी मिसाइल खतरे को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई गई.
कतर: दोहा की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को कतर की वायु रक्षा प्रणाली ने इंटरसेप्ट करने का दावा किया. कुछ ड्रोन भी मार गिराए गए.
कुवैत: कुवैत के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर के पास जोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद समुद्र में तेल रिसाव की जानकारी सामने आई.
ईरानी युद्धपोत को लेकर अमेरिका-ईरान में तनाव
क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाली एक और घटना हाल ही में सामने आई है. अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि श्रीलंका के पास समुद्र में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो हमले में डुबो दिया गया.
इस दावे के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस घटना के परिणाम अमेरिका को भुगतने पड़ सकते हैं. इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं.
तेल आपूर्ति और समुद्री यातायात प्रभावित
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है. ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है.
दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा इन्हीं समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है. ऐसे में जहाजों पर हमलों और सुरक्षा खतरे के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.
संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब ने भी ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है.
संघर्ष में बढ़ रही जनहानि
मौजूदा सैन्य टकराव को अब एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार ईरान में अब तक 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
लेबनान और इजरायल में भी इस संघर्ष के कारण कई लोगों की जान गई है. क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रह सकता है और इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति तथा ऊर्जा बाजार दोनों पर पड़ेगा.
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