Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की खबर ने नई बहस छेड़ दी है. इस चर्चा के सामने आने के बाद पार्टी के कई जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी और भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली. पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर समर्थकों का जमावड़ा लगा, जहां कुछ कार्यकर्ता फैसले पर पुनर्विचार की अपील करते नजर आए.
जनादेश का हवाला देकर उठाई आपत्ति
प्रदर्शन कर रहे जदयू कार्यकर्ताओं का कहना था कि 2025 के विधानसभा चुनाव में लोगों ने Nitish Kumar को मुख्यमंत्री के रूप में पूरे कार्यकाल तक काम करने के लिए समर्थन दिया था. उनका तर्क था कि जनता ने राज्य की बागडोर 2030 तक उनके हाथों में रहने की उम्मीद के साथ वोट किया था.
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समर्थकों का मानना है कि अगर मुख्यमंत्री सक्रिय रूप से राज्य की राजनीति से अलग होते हैं, तो इससे पार्टी संगठन और सरकार दोनों पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से कई कार्यकर्ताओं ने उनसे फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की.
कार्यकर्ताओं ने संवाद की जरूरत बताई
सीएम आवास के बाहर जुटे कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि राज्यसभा के लिए नामांकन की चर्चा से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत की जानी चाहिए थी. उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों की राय भी ऐसे बड़े फैसलों में अहम होती है.
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उनके मुताबिक पिछले दो दशकों में Nitish Kumar के नेतृत्व में राज्य में कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है और इसी वजह से कार्यकर्ताओं के बीच उनका खास प्रभाव रहा है.
संगठन के भविष्य को लेकर जताई चिंता
कुछ जदयू समर्थकों ने यह भी आशंका जताई कि अगर Nitish Kumar राज्य की सक्रिय राजनीति से दूर होते हैं, तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर असर पड़ सकता है. उनका कहना था कि लंबे समय से पार्टी की पहचान उनके नेतृत्व से जुड़ी रही है.
हालांकि कई कार्यकर्ताओं ने यह भरोसा भी जताया कि Nitish Kumar जो भी फैसला लेंगे, वह राज्य और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए ही होगा.
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