Jharkhand Naxal Encounter : झारखंड के घने और दुर्गम सारंडा जंगल एक बार फिर सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच निर्णायक टकराव का केंद्र बने. पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोरानागरा और करीबुरू थाना क्षेत्र से सटे कुमडी और बहादा जंगल में चल रहे ऑपरेशन मेघाबुरू के तहत सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के एक बड़े दस्ते को घेरकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. इस अभियान में कुल 13 नक्सली मारे गए, जिन पर 4 करोड़ 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था. मारे गए नक्सलियों में एक महिला माओवादी भी शामिल है.
37 घंटे तक चला ऑपरेशन, कई चरणों में हुई भीषण फायरिंग
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन एक-दो घंटे का नहीं बल्कि लगातार 37 घंटे से अधिक समय तक चला. गुरुवार को शुरू हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को पूरी तरह घेर लिया. जंगल के भीतर नक्सलियों की मजबूत मौजूदगी के चलते बार-बार फायरिंग होती रही, जिससे पूरा सारंडा इलाका थर्रा उठा. शुक्रवार सुबह तक सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी रहा.
झारखंड की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
पहले दिन 15 शव बरामद, बाद में संख्या स्पष्ट
गुरुवार को मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने 15 नक्सलियों के शव बरामद किए थे. इसके बाद इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया गया. शुक्रवार सुबह की कार्रवाई के बाद स्थिति स्पष्ट हुई, जिसमें 13 नक्सलियों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की गई. लगातार फायरिंग और दुर्गम इलाके के कारण संख्या के सत्यापन में समय लगा.
महिला नक्सली मुवति होनहांगा भी मारी गई
शुक्रवार सुबह हुई कार्रवाई में माओवादी दस्ते की सक्रिय सदस्य मुवति होनहांगा मारी गई. उस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था. सुरक्षाबलों के मुताबिक, वह इलाके में संगठन की गतिविधियों और मूवमेंट में अहम भूमिका निभा रही थी. इस कार्रवाई की पुष्टि सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह और एसआरपीएफ आईजी अनूप बिरथरे ने की है.
जोनल कमांडर रापा मुंडा का भी हुआ खात्मा
इस अभियान में मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम जोनल कमांडर रापा उर्फ पॉवेल उर्फ रापा मुंडा का है. रापा पर झारखंड सरकार की ओर से 10 लाख रुपये और ओडिशा सरकार की ओर से 25 लाख रुपये, यानी कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
रापा मुंडा अप्रैल 2025 के उस आईईडी ब्लास्ट में शामिल था, जिसमें झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हुआ था, जबकि कोबरा का एक जवान गंभीर रूप से घायल हुआ था. वह ओडिशा–झारखंड सीमा क्षेत्र के रोपकोय गांव का रहने वाला था.
शव निकालना भी बना अलग ऑपरेशन
मुठभेड़ के बाद शवों को जंगल से बाहर लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया. कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 8 से अधिक बीडीओ और सीओ को मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया गया.
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई, लेकिन जंगल में फायरिंग जारी रहने के कारण दोपहर में लौटना पड़ा. शाम 4:45 बजे फायरिंग थमने के बाद छह ट्रैक्टरों के साथ टीम दोबारा जंगल में दाखिल हुई और शवों को बाहर लाया गया.
नाकेबंदी के कारण गांवों का संपर्क पूरी तरह कटा
मुठभेड़ स्थल तक किसी की पहुंच न हो, इसके लिए कुमडीह और सेडल नाका पर कड़ी नाकेबंदी कर दी गई. इस रास्ते से ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह बंद रही.
इलाके के गांवों में रहने वाले करीब 20 परिवार लगातार हो रही गोलीबारी के कारण घरों में दुबके रहे. सेडल गेट से लेकर घटनास्थल तक आम नागरिकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया.
20 से ज्यादा नक्सली थे मौजूद, कुछ अब भी फरार
सुरक्षाबलों के आकलन के अनुसार, मुठभेड़ स्थल पर नक्सलियों के दस्ते में 20 से अधिक माओवादी मौजूद थे. इसमें माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल की मौजूदगी की भी सूचना है.
लगातार फायरिंग और जंगल की आड़ के कारण आशंका जताई जा रही है कि कुछ हार्डकोर नक्सली अब भी जंगल में छिपे हो सकते हैं. इसी वजह से ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं किया गया है.
हार्डकोर नक्सलियों पर केंद्रित रणनीति
2.35 करोड़ के इनामी अनल उर्फ तूराम समेत कई बड़े माओवादी नेताओं के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है. अब एजेंसियों के रडार पर एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, असीम मंडल उर्फ आकाश, अजय महतो, मोछू उर्फ मेहनत, मदन महतो और संजय महतो जैसे नाम हैं.
10 महीनों में तीसरा बड़ा झटका
पिछले 10 महीनों में नक्सलियों को यह तीसरा बड़ा झटका माना जा रहा है.
- अप्रैल 2025: बोकारो के लुगूबुरू पहाड़ में एक करोड़ के इनामी प्याग मांझी समेत 8 नक्सली ढेर
- सितंबर 2025: हजारीबाग में सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश समेत 3 इनामी नक्सली मारे गए
- जनवरी 2026: सारंडा ऑपरेशन में एक साथ कई बड़े नक्सलियों का सफाया
31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा किया जाएगा. सारंडा में चला यह अभियान उसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
सुरक्षाबलों का कहना है कि सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
इसे भी पढ़ें-रांची में खुले नाले में गिरने से 2 साल के बच्चे की मौत, मां ने एक बेटे को बचाया
इसे भी पढ़ें-रांची ईडी ऑफिस पर पुलिस कार्रवाई, आरोप और राजनीतिक बहस तेज; हेमंत सरकार पर लगा बड़ा आरोप

