France Seizes Russian Oil Tanker : फ्रांस ने रूस से जुड़े एक तेल टैंकर के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए उसे भूमध्य सागर में रोक लिया है. फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा था और रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था. यह कार्रवाई गुरुवार को फ्रांसीसी नौसेना द्वारा खुले समुद्र में की गई.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुद इस ऑपरेशन की जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस किसी भी हाल में अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कमजोर नहीं होने देगा और नियम तोड़ने वाले जहाजों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी.
‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े होने का शक
मैक्रों के मुताबिक, रोका गया जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की सूची में शामिल था और आशंका है कि यह रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा है. इस नेटवर्क के जहाज अक्सर अपनी असली पहचान छिपाने के लिए किसी दूसरे देश का झंडा लगाकर तेल की ढुलाई करते हैं. जहाजों की निगरानी करने वाली वेबसाइटों MarineTraffic और Vesselfinder के अनुसार, इस टैंकर पर कोमोरोस देश का झंडा लगा हुआ था.
We will not tolerate any violation.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) January 22, 2026
This morning, the French Navy boarded an oil tanker coming from Russia, subject to international sanctions and suspected of flying a false flag.
The operation was conducted on the high seas in the Mediterranean,… pic.twitter.com/zhXVdzPx1r
समुद्र में रोका गया, जांच शुरू
राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि फ्रांसीसी नौसेना ने सुबह के समय रूस से आ रहे इस तेल टैंकर को रोका. यह कार्रवाई भूमध्य सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई, जिसमें फ्रांस के कुछ सहयोगी देशों ने भी सहयोग किया. उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत की गई है. जांच शुरू कर दी गई है और फिलहाल जहाज को दूसरी दिशा में भेज दिया गया है.
मैक्रों ने यह भी कहा कि फ्रांस प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उनका कहना है कि शैडो फ्लीट के जरिए होने वाली कमाई का इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में कर रहा है.
जहाज पर मौजूद हैं भारतीय क्रू मेंबर
समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर फ्रांसीसी समुद्री अधिकारियों ने बताया कि ‘ग्रिंच’ नाम का यह जहाज गलत झंडा लगाकर परिचालन कर रहा था. यह टैंकर वर्ष 2004 में बनाया गया था और इसका कोमोरोस से कोई सीधा संबंध नहीं है, बावजूद इसके यह उसी देश का झंडा लगाए हुए था.
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस जहाज पर काम करने वाले क्रू मेंबर भारतीय नागरिक हैं. टैंकर को पश्चिमी भूमध्य सागर में स्पेन के दक्षिणी शहर अलमेरिया के पास रोका गया. फिलहाल फ्रांसीसी नौसेना इसे सुरक्षित तरीके से एक बंदरगाह तक ले जा रही है, ताकि मामले की गहन जांच की जा सके.
ब्रिटेन की अहम भूमिका
France 24 की रिपोर्ट के अनुसार, यह टैंकर स्पेन और मोरक्को के बीच समुद्री क्षेत्र में रोका गया. जहाज रूस के आर्कटिक क्षेत्र स्थित मुरमान्स्क बंदरगाह से रवाना हुआ था. ‘ग्रिंच’ नाम का यह टैंकर ब्रिटेन के प्रतिबंधों के दायरे में है, जबकि इसी पहचान नंबर से जुड़े ‘कार्ल’ नामक एक अन्य जहाज पर अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंध लागू हैं.
एपी के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में ब्रिटेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ब्रिटेन ने पहले से जानकारी जुटाकर फ्रांस के साथ साझा की, जिसके बाद फ्रांसीसी नौसेना समय रहते कार्रवाई कर सकी.
तेल की कमाई से चल रहा है यूक्रेन युद्ध
पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की अर्थव्यवस्था में तेल से होने वाली आय की बड़ी भूमिका है. इसी पैसे के जरिए रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध पर भारी खर्च कर पा रहा है, बिना अपने देश में महंगाई बढ़ाए या आर्थिक दबाव झेले. इस कार्रवाई के संबंध में मैक्रों ने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें एक फ्रांसीसी सैन्य हेलीकॉप्टर टैंकर के ऊपर उड़ता नजर आ रहा है.
मैक्रों ने दोहराया कि शैडो फ्लीट से होने वाली कमाई सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल की जा रही है, इसलिए इस नेटवर्क पर कार्रवाई बेहद जरूरी है.
जेलेंस्की ने की फ्रांस की सराहना
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने फ्रांस की इस कार्रवाई का स्वागत किया और राष्ट्रपति मैक्रों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह कदम रूस को युद्ध के लिए फंड मिलने से रोकने की दिशा में बेहद अहम है.
जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा कि रूस के तेल से होने वाली कमाई को रोकने के लिए ऐसे मजबूत और निर्णायक कदम जरूरी हैं. उन्होंने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे अपने आसपास चल रहे रूसी टैंकरों पर सख्त नजर रखें, शैडो फ्लीट के जहाजों को रोका जाए और उनमें मौजूद तेल को जब्त किया जाए.
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब फ्रांस ने रूस से जुड़े तेल जहाजों के खिलाफ कदम उठाया हो. France 24 के मुताबिक, सितंबर के अंत में फ्रांस ने ‘बोराके’ नाम के एक अन्य टैंकर को भी रोका था, जो खुद को बेनिन का जहाज बता रहा था. उस समय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फ्रांस की इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ करार दिया था.
बताया जाता है कि रूस की शैडो फ्लीट में 400 से अधिक जहाज शामिल हैं, जो अलग-अलग तरीकों से प्रतिबंधों को चकमा देने की कोशिश करते हैं. फ्रांस और उसके सहयोगी देश अब इस नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कसने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
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