Bihar administrative service Promotions 2026 : बिहार सरकार ने प्रशासनिक महकमे में बड़ा बदलाव करते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा के कई अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दिया है. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 30 मार्च 2026 को जारी अधिसूचनाओं में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को अस्थायी कार्यकारी प्रभार सौंपा गया है. राज्यपाल के आदेश से जारी इस प्रशासनिक फैसले के तहत अधिकारियों को विशेष सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव और अपर समाहर्ता जैसे अहम पदों पर प्रोन्नत किया गया है. इस फैसले को बिहार प्रशासनिक सेवा के भीतर एक बड़े प्रशासनिक पुनर्संयोजन के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कई जिलों और विभागों में कार्यरत अधिकारियों की जिम्मेदारियों का दायरा अब और बढ़ जाएगा.
विशेष सचिव स्तर पर 9 अधिकारियों को मिला नया दायित्व
जारी आदेश के अनुसार, अपर सचिव स्तर पर कार्यरत 9 अधिकारियों को विशेष सचिव के पद पर अस्थायी कार्यकारी प्रभार दिया गया है. इन अधिकारियों को वेतन स्तर-13 ए के अंतर्गत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस सूची में पश्चिम बंगाल से मृणायक दास, पूर्वी चम्पारण से मनोरंजन कुमार, सीवान से विकास कुमार, पटना से डॉ. गगन और जनार्दन कुमार, समस्तीपुर से शाहिद परवेज तथा भोजपुर से अनिता सिंह का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. सरकार के इस फैसले के बाद इन अधिकारियों की प्रशासनिक भूमिका और अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है.
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यह पदोन्नति सिर्फ पद परिवर्तन भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे प्रशासनिक अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर दी गई एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है. इससे राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की कोशिश मानी जा रही है.
11 अधिकारियों को अपर सचिव स्तर पर मिली पदोन्नति
संयुक्त सचिव स्तर पर तैनात 11 अधिकारियों को अपर सचिव एवं समकक्ष पद पर उत्क्रमित करते हुए अस्थायी कार्यकारी प्रभार दिया गया है. यह पदोन्नति वेतन स्तर-13 के अंतर्गत दी गई है. जिन अधिकारियों को यह लाभ मिला है, उनमें नवादा की पूनम कुमारी, रोहतास के मो. उमैर, शिवहर के सुधांशु शेखर, मुंगेर के विनय कुमार साह, नालंदा के कुन्दन कुमार और नवादा के संजय कुमार सिन्हा के नाम प्रमुख हैं.

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक क्षमता और अनुभव को उच्च स्तर पर उपयोग में लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. इन अधिकारियों को अब नीतिगत और विभागीय कार्यों में और अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी. माना जा रहा है कि आने वाले समय में इन पदोन्नतियों का असर विभागीय कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों में भी दिखाई देगा.
13 अधिकारियों को संयुक्त सचिव के रूप में सौंपा गया कार्यकारी प्रभार
अपर समाहर्ता स्तर के 13 अधिकारियों को संयुक्त सचिव के रूप में अस्थायी कार्यकारी प्रभार सौंपा गया है. यह बदलाव भी प्रशासनिक ढांचे में एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. इस सूची में पटना की जया लक्ष्मी शिवम, सीवान के बृन्दा लाल और सुभाष कुमार, वैशाली के तेज नारायण राय और लखीन्द्र पासवान, पश्चिम चम्पारण के दिनेश राम, मो. शफीक और मो. जफर आलम जैसे नाम शामिल हैं.

इन अधिकारियों को अब विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर अधिक बड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी. सरकार की ओर से किया गया यह कदम बताता है कि राज्य प्रशासनिक सेवा में वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर अधिकारियों को क्रमवार आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है. इससे न सिर्फ सेवा संरचना मजबूत होगी, बल्कि विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक समन्वय भी बेहतर होने की उम्मीद है.
अपर समाहर्ता और उप सचिव स्तर पर भी हुई अहम पदोन्नति
सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना में अपर समाहर्ता और उप सचिव स्तर पर भी महत्वपूर्ण पदोन्नतियों का ऐलान किया गया है. अपर समाहर्ता, वेतन स्तर-12 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण और मधुबनी के अनिल कुमार रमण को उप सचिव स्तर से प्रोन्नत करते हुए अपर समाहर्ता का दायित्व दिया गया है.
वहीं उप सचिव, वेतन स्तर-11 के अंतर्गत बिहार प्रशासनिक सेवा के 4 अधिकारियों को अस्थायी कार्यकारी प्रभार सौंपा गया है. इनमें मुकेश कुमार “मुकुल”, बिरेन्द्र कुमार, शिवशंकर पासवान और नीलम कुमारी का नाम शामिल है. इन पदोन्नतियों को प्रशासनिक सेवा में नई जिम्मेदारियों के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है.

प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े पुनर्गठन के संकेत
30 मार्च 2026 को जारी इन अधिसूचनाओं ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सक्रिय, अनुभवी और जिम्मेदार ढांचे में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है. एक साथ कई स्तरों पर अधिकारियों को पदोन्नति और कार्यकारी प्रभार दिए जाने से यह संकेत भी मिला है कि आने वाले समय में विभागीय कार्यप्रणाली और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की कोशिश होगी.

बिहार प्रशासनिक सेवा के भीतर इस तरह का व्यापक प्रमोशन आदेश कई अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. वहीं शासन स्तर पर इसे एक रणनीतिक प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य की नौकरशाही में कार्यकुशलता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा सकता है.
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