Mamata Banerjee : नई दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद सियासत तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस फैसले के बहाने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है.
‘बांग्ला’ प्रस्ताव पर अब तक फैसला नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कई बार पश्चिम बंगाल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव केंद्र को भेज चुकी है. विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है, लेकिन अब तक उस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया. उनका सवाल था कि जब अन्य राज्यों के नाम परिवर्तन के प्रस्तावों को स्वीकृति मिल सकती है, तो बंगाल के मामले में देरी क्यों?
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उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता की भावना और विधानसभा के संकल्प का सम्मान होना चाहिए. नाम परिवर्तन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है.
केरल के नाम परिवर्तन के पीछे भाजपा और वाम दलों की बढ़ती नजदीकियां दिख रही हैं. अब यह राजनीतिक समझदारी छिपी नहीं रह गई है. बंगाल को आखिर हर बार उपेक्षा क्यों झेलनी पड़े? सत्ता स्थायी नहीं होती—जब हालात बदलेंगे, हम अपने राज्य का नाम भी बदलवा लेंगे.—ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
माकपा-भाजपा समीकरण पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने यह आरोप भी लगाया कि केरल में सत्तारूढ़ वाम दल और भाजपा के बीच समझदारी ने वहां के नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों के साथ अलग व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है.
हालांकि, उन्होंने केरल के लोगों को ‘केरलम’ नाम को मंजूरी मिलने पर शुभकामनाएं भी दीं और कहा कि हर राज्य को अपनी पहचान तय करने का अधिकार है.
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