TMC Candidate List 2026: पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता में लगातार चौथी बार वापसी के लक्ष्य के साथ अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने 291 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान करते हुए साफ संकेत दिया है कि इस बार चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया गया है.
पुराने चेहरों पर आंशिक भरोसा, कई विधायकों का टिकट कटा
घोषित सूची में 135 मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया गया है, जबकि 75 विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं. इसे सत्ता विरोधी माहौल को संतुलित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी इस बार ऐसे उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा जता रही है, जिनकी पकड़ जमीनी स्तर पर मजबूत मानी जाती है.
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विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ चेहरे बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को और प्रभावी बनाने की रणनीति का हिस्सा है.
भवानीपुर सीट पर सीधा मुकाबला, चुनावी तापमान बढ़ा
इस सूची की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर है, जहां से ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरेंगी. इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि भाजपा ने यहां शुभेंदु अधिकारी को उतारा है.
नंदीग्राम में पिछले चुनाव के दौरान मिली हार के बाद यह सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. वहीं नंदीग्राम में पार्टी ने इस बार नए चेहरे पर भरोसा जताया है, जिससे मुकाबला और रोचक होने की संभावना है.
बड़े नेताओं और ‘स्टार’ चेहरों की छुट्टी
इस बार की सूची में कई चर्चित नाम गायब हैं. फिल्म जगत से जुड़े कुछ विधायक और लंबे समय से पार्टी में सक्रिय रहे नेता टिकट से वंचित रह गए हैं. इनमें बारासात, बेलेघाटा और बेहला पश्चिम जैसे क्षेत्रों के पुराने चेहरे शामिल हैं.
इस कदम को पार्टी के भीतर संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि संगठनात्मक सक्रियता और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दी जाएगी.
युवा, खिलाड़ी और नए चेहरों को मौका
पार्टी ने इस बार कई नए चेहरों को टिकट देकर पीढ़ीगत बदलाव का संकेत दिया है. खेल जगत और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े उम्मीदवारों को भी शामिल किया गया है, जिससे युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश दिखती है.
इसके अलावा कुछ नए नेताओं को पहली बार चुनाव मैदान में उतारकर पार्टी ने भविष्य की नेतृत्व टीम तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है.
ताजा चेहरों पर भरोसा, हर वर्ग को साधने की कवायद
| सामाजिक समूह | टीएमसी उम्मीदवार | नयी सोच |
|---|---|---|
| महिलाएं | 52 उम्मीदवार | आधी आबादी पर बड़ा दांव – लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री जैसी योजनाओं के लाभार्थियों को गोलबंद करने की कोशिश. |
| SC-ST वर्ग | 95 उम्मीदवार | भाजपा के ‘आदिवासी कार्ड’ की काट – दलित और आदिवासी समुदायों में पैठ मजबूत करने का लक्ष्य. |
| अल्पसंख्यक वर्ग | 47 उम्मीदवार | मजबूत वोट बैंक को एकजुट – माकपा और कांग्रेस से होने वाले मतों के बिखराव को रोकने की रणनीति. |
| नये चेहरे (प्रोफेशनल और युवा) | 72 उम्मीदवार | ओलिंपियन खिलाड़ी स्वप्ना बर्मन (राजगंज), पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पॉल (तूफानगंज), कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी (उत्तरपाड़ा). |
वरिष्ठ नेताओं पर भरोसा बरकरार
हालांकि बदलाव के बीच पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं पर भरोसा बनाए रखा है. सरकार में अहम जिम्मेदारी निभा रहे मंत्री और अनुभवी चेहरे अपने-अपने क्षेत्रों से दोबारा चुनाव लड़ेंगे.
इससे साफ है कि पार्टी एक तरफ नए चेहरों को मौका दे रही है, तो दूसरी ओर अनुभवी नेताओं के सहारे संतुलन भी बनाए रखना चाहती है.
रणनीति साफ—स्थानीय नेटवर्क पर पूरा जोर
पूरी सूची पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी रणनीति में ग्लैमर की जगह संगठन और स्थानीय नेटवर्क को प्राथमिकता दी है. बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाने और एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए उम्मीदवार चयन में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है.
आने वाले चुनाव में यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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