Bihar Government: बिहार सरकार ने मंत्रियों, जजों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए खरीदी जाने वाली सरकारी गाड़ियों की अधिकतम कीमत में इजाफा कर दिया है. नए फैसले के बाद अब राज्य के वीआईपी पदों पर बैठे लोगों के लिए पहले की तुलना में ज्यादा महंगी और बेहतर सुविधाओं वाली गाड़ियां खरीदी जा सकेंगी. सरकार ने यह बदलाव बढ़ती ऑटोमोबाइल कीमतों और नई तकनीक से लैस वाहनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए किया है. लंबे समय से गाड़ियों की पुरानी खरीद सीमा लागू थी, लेकिन बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण अब उसे संशोधित करना जरूरी माना गया.
सबसे बड़ा बदलाव मंत्रियों के वाहन बजट में किया गया है. पहले मंत्रियों के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये तक की सरकारी गाड़ी खरीदने की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 37 लाख रुपये कर दिया गया है. यानी अब उनके लिए पहले से अधिक प्रीमियम श्रेणी के वाहन खरीदने का रास्ता साफ हो गया है.
अलग-अलग पदों के लिए नई सीमा तय
सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों के लिए अलग-अलग नई कीमत सीमा तय की है. जिलाधिकारी और उनके समकक्ष अधिकारियों के लिए अब 22 लाख रुपये तक की गाड़ी खरीदी जा सकेगी. इससे पहले यह सीमा 20 लाख रुपये थी. वहीं पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के लिए यह सीमा 16 लाख रुपये से बढ़ाकर 18 लाख रुपये कर दी गई है.
इसके अलावा निचले स्तर के अधिकारियों को भी इस फैसले से राहत मिली है. अब वे भी 16 लाख रुपये तक की सरकारी गाड़ी ले सकेंगे. सरकार ने पूरी व्यवस्था को पांच अलग-अलग कैटेगरी में बांटा है, ताकि पद और जिम्मेदारी के हिसाब से वाहन खरीद का दायरा तय किया जा सके.
बैठक के बाद जारी हुई नई व्यवस्था
यह फैसला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक के बाद लिया गया. बैठक में अधिकारियों की जरूरत, पुरानी सीमा और बाजार में गाड़ियों की मौजूदा कीमतों पर चर्चा की गई. इसके बाद नई सीमा को मंजूरी दी गई. वित्त विभाग ने इस फैसले को लागू करने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है.
सरकार का तर्क है कि बदलते समय के साथ सरकारी बेड़े को भी अपडेट करना जरूरी है. पुरानी गाड़ियों की जगह नई, सुरक्षित और तकनीकी रूप से बेहतर गाड़ियों का इस्तेमाल प्रशासनिक कामकाज को सुगम बनाएगा. अधिकारियों की लंबी दूरी की यात्रा और फील्ड विजिट को भी इससे सुविधा मिलने की बात कही जा रही है.
फैसले पर शुरू हुई बहस
हालांकि इस निर्णय के बाद सवाल भी उठने लगे हैं. आलोचकों का कहना है कि यह कदम सरकारी खर्च से लग्जरी बढ़ाने जैसा है और इसे आम लोगों की प्राथमिकताओं के मुकाबले अलग नजर से देखा जा सकता है. वहीं सरकार का कहना है कि यह कोई विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत के हिसाब से किया गया व्यावहारिक बदलाव है.
नई सीमा लागू होने के बाद आने वाले समय में बिहार की सड़कों पर अधिकारियों के काफिले में बदलाव साफ दिखाई दे सकता है. अब तक जिन पदों पर इनोवा या फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां आम तौर पर दिखती थीं, वहां आगे और ज्यादा प्रीमियम मॉडल शामिल होने की संभावना बढ़ गई है.
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