Daudnagar hospital : दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एफसीएम थेरेपी की शुरुआत कर दी गई है. इस नई चिकित्सा सुविधा का शुभारंभ राज्य स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान खून की कमी से जूझ रही महिलाओं को तेज और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है. स्वास्थ्य विभाग ने इसे मातृ स्वास्थ्य सुधार की दिशा में अहम कदम माना है. खास बात यह है कि यह उपचार गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जिससे कम समय में शरीर में आयरन की पूर्ति करने में मदद मिल सकती है.
एक डोज से हीमोग्लोबिन बढ़ाने की कोशिश
अस्पताल में उपलब्ध कराई गई इस थेरेपी को विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए उपयोगी बताया जा रहा है, जिनका हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम पाया जाता है. प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख में यह डोज दिया जा रहा है, ताकि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित तरीके से उपचार मिल सके. डॉक्टरों के अनुसार, इस थेरेपी के जरिए शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जाता है. इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में जल्दी सुधार आने की संभावना रहती है. अस्पताल में तैनात चिकित्सा पदाधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में यह उपचार कम हीमोग्लोबिन की समस्या को नियंत्रित करने में असरदार साबित हो सकता है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
जांच के बाद तय होगा आगे का उपचार
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर निर्धारित मानक से नीचे पाया जा रहा है, उन्हें यह डोज दिया जा रहा है. उपचार के बाद संबंधित महिलाओं को कुछ दिनों के अंतराल पर फिर से जांच कराने की सलाह दी जा रही है. इसके जरिए यह देखा जाएगा कि शरीर में खून की मात्रा और हीमोग्लोबिन स्तर में कितना सुधार हुआ है. यदि जांच रिपोर्ट बेहतर आती है तो आगे उन्हें सामान्य आयरन टैबलेट लेने की सलाह दी जाएगी. वहीं, अपेक्षित सुधार नहीं होने पर डॉक्टर कारणों की जांच कर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय करेंगे. जरूरत पड़ने पर फिर से डोज देने की व्यवस्था भी रखी गई है.
अस्पताल में 100 यूनिट स्टॉक उपलब्ध
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि एफसीएम इंजेक्शन का पर्याप्त प्रारंभिक स्टॉक अस्पताल को उपलब्ध कराया गया है. फिलहाल 100 यूनिट दवा अस्पताल में रखी गई है, ताकि जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को बिना विलंब इसका लाभ दिया जा सके. इस सुविधा के शुरू होते ही कई महिलाओं को डोज भी दिया गया. अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की समस्या को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके. चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की सुविधाएं नियमित रूप से चलती रहीं, तो क्षेत्र में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी.
इसे भी पढ़ें-बिहार के 43 शहर होंगे व्यवस्थित, बिना पास नक्शे के नहीं उठेगी एक भी ईंट
इसे भी पढ़ें-आईएएस संजीव हंस पर नया घूस केस, 1 करोड़ रुपये लेने का आरोप दर्ज

