Nitish Kumar Resignation: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली पहुंचने के बाद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर ऐसे संकेत दे गए हैं, जिनसे अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है. लंबे समय बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्यसभा को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने बिहार से लेकर दिल्ली तक नई चर्चा छेड़ दी. उन्होंने साफ कहा कि 10 अप्रैल को वह शपथ लेंगे और अब दिल्ली में ही रहेंगे.
साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने लंबे समय तक दिल्ली में काम किया है और अब फिर से वहीं सक्रिय रहेंगे. इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या बिहार की सत्ता में अब बड़ा बदलाव होने वाला है.
दिल्ली में सक्रियता के संकेत, लेकिन बिहार से दूरी नहीं
दिल्ली पहुंचने के बाद नीतीश कुमार ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहने का मतलब यह नहीं है कि उनका बिहार से जुड़ाव खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि बिहार में उन्होंने लंबे समय तक काम किया है और आगे भी यह सिलसिला बना रहेगा. इस बयान को राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि वह दिल्ली की भूमिका में दिख सकते हैं, लेकिन बिहार की राजनीति पर उनकी पकड़ और दखल बनी रह सकती है. ऐसे में उनकी नई भूमिका को लेकर कई तरह की संभावनाएं सामने आने लगी हैं.
निशांत कुमार को लेकर सवाल पर टला सीधा जवाब
नीतीश कुमार के दिल्ली पहुंचने के बाद जब मीडिया ने उनके बेटे निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज किया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि इस बारे में उनकी पार्टी के नेता फैसला करेंगे. उनके इस संक्षिप्त जवाब के बाद जदयू के भीतर भविष्य की नेतृत्व संरचना को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में इसे ऐसे संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है कि आने वाले समय में पार्टी में नई पीढ़ी को आगे लाने पर विचार हो सकता है, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा.
10 अप्रैल को शपथ, 14 अप्रैल को बड़ा फैसला संभव
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दोपहर 12:15 बजे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं. इसके बाद उनके 10 अप्रैल की शाम या फिर 11 अप्रैल की सुबह पटना लौटने की संभावना जताई जा रही है. इसी बीच बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं. सियासी हलकों में यह कयास लगाया जा रहा है कि उसी दिन वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. बताया जा रहा है कि 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें आगे की राजनीतिक रणनीति और संभावित नई सरकार के गठन पर फैसला लिया जा सकता है.
बीजेपी ने दिए समन्वय के संकेत
बिहार में संभावित सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच बीजेपी की ओर से भी बयान सामने आया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा है कि जो भी प्रक्रिया चल रही है, वह पूरी तरह नीतीश Kumar के मार्गदर्शन में ही हो रही है. इस बयान को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बिहार में यदि कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होता है, तो वह अचानक नहीं बल्कि आपसी सहमति और समन्वय के साथ होगा. फिलहाल सबकी नजर अब 10 अप्रैल की शपथ और 14 अप्रैल की संभावित राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.
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