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अब यूं ही नहीं फेंक पाएंगे कचरा, 100KG वालों पर खास नियम, 1 अप्रैल से सख्ती

Bihar Waste Management Rules 2026 : बिहार के नगर निकायों में 1 अप्रैल से कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था लागू होने जा रही है. अब घरों और संस्थानों को कचरा चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देना होगा, जबकि बड़े परिसरों को अपना कचरा खुद निस्तारित करना पड़ेगा. नई नीति का मकसद शहरों को साफ रखना, प्रदूषण कम करना और कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना है.

Bihar Waste Management Rules 2026 : बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए 1 अप्रैल से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है. अब नगर निकायों में कचरा पहले की तरह एक साथ बाहर रख देने से काम नहीं चलेगा. नई व्यवस्था के तहत घरों, अपार्टमेंट, होटलों, दफ्तरों और बड़े परिसरों को तय नियमों के अनुसार कचरा अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देना होगा. इसका मकसद सिर्फ सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और उसके उपयोग को भी बढ़ावा देना है. इस बदलाव के बाद आम लोगों की जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी.

अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो सफाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है. ऐसे में 1 अप्रैल के बाद शहरों में कचरा प्रबंधन का पूरा सिस्टम नई शैली में काम करता नजर आएगा.

बड़े संस्थानों को खुद करनी होगी कचरा व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत उन संस्थानों और परिसरों पर विशेष जिम्मेदारी डाली गई है, जहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है. जो संस्थान रोजाना 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं या जिनका क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा है, उन्हें थोक कचरा उत्पादक की श्रेणी में रखा जाएगा. इसमें बड़े अपार्टमेंट, होटल, सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक परिसर शामिल होंगे. ऐसे परिसरों को अपने परिसर के भीतर ही कचरे के निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी.

खासकर गीले कचरे को वहीं प्रोसेस कर खाद या कंपोस्ट में बदलने की जिम्मेदारी तय की गई है. यानी अब बड़े संस्थान केवल नगर निकायों के भरोसे नहीं रह सकेंगे. उन्हें कचरे की प्रोसेसिंग और निपटान की पूरी व्यवस्था अपने स्तर पर विकसित करनी होगी.

अब चार रंग के डस्टबिन से होगा कचरे का वर्गीकरण

अब तक आम तौर पर लोग केवल गीले और सूखे कचरे को अलग करते थे, लेकिन 1 अप्रैल से यह व्यवस्था और सख्त हो जाएगी. अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य होगा. इसके लिए अलग-अलग रंग के डस्टबिन निर्धारित किए गए हैं. हरे रंग के डस्टबिन में रसोई, सब्जी, फल और अन्य जैविक कचरा रखा जाएगा. नीले रंग के डस्टबिन में प्लास्टिक, कागज, धातु और अन्य रिसाइकिल योग्य सामग्री डाली जाएगी. लाल रंग के डस्टबिन का उपयोग डायपर, नैपकिन और अन्य सैनिटरी वेस्ट के लिए होगा.

वहीं काले रंग के डस्टबिन में ई-वेस्ट, बल्ब, दवाइयां, बैटरी और अन्य खतरनाक या विशेष कचरा रखा जाएगा. इससे हर प्रकार के कचरे को सही तरीके से अलग कर उसके अनुसार निस्तारण संभव हो सकेगा.

नियम तोड़ने पर सफाईकर्मी भी कचरा उठाने से कर सकते हैं इनकार

नई प्रणाली लागू होने के बाद सफाईकर्मियों और कचरा संग्रहण एजेंसियों को भी कुछ अधिकार दिए जा रहे हैं. यदि घरों या संस्थानों से कचरा तय नियमों के अनुसार अलग करके नहीं दिया गया, तो सफाईकर्मी उसे उठाने से इनकार कर सकते हैं. यानी अब जिम्मेदारी केवल नगर निकायों की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी बराबर होगी. घर से कचरा बाहर निकालते समय उसका सही वर्गीकरण करना अनिवार्य होगा. इससे सफाईकर्मियों को भी सुविधा होगी और कचरे की प्रोसेसिंग आसान बनेगी.

नई व्यवस्था के जरिए सरकार और नगर निकाय चाहते हैं कि लोग सफाई व्यवस्था को केवल सेवा नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी के रूप में देखें. आने वाले समय में इसी अनुशासन से शहरों को साफ और व्यवस्थित बनाने की योजना तैयार की गई है.

कचरे से बनेगा ईंधन और खाद, यही है नई नीति का असली फोकस

नई नीति का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि उसे संसाधन में बदलना भी है. गीले कचरे से खाद तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग खेती और बागवानी में किया जा सकेगा. वहीं सूखे कचरे के उपयोगी हिस्से से ईंधन तैयार करने की योजना है, जिसे औद्योगिक इकाइयों, खासकर सीमेंट फैक्ट्रियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इससे कचरे का बोझ कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा. दूसरी ओर नगर निकाय भी कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में हैं.

पटना जैसे बड़े शहरों में कलेक्शन सिस्टम को और प्रभावी बनाने के लिए नए वाहनों की खरीद की योजना बनाई गई है. इस पूरी व्यवस्था का मकसद यही है कि बिहार के शहर अधिक साफ, कम प्रदूषित और संसाधन उपयोग के मामले में ज्यादा सक्षम बन सकें.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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