SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. दक्षिण 24 परगना जिले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ कथित उत्पीड़न को लेकर कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं. स्थानीय पुलिस के अनुसार, मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
सात लोगों ने दी लिखित शिकायत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जीवनतला थाने में कुल सात लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं. इनमें कैनिंग पूर्व से विधायक Shaokat Molla का नाम भी शामिल है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उन्हें प्रशासनिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा.
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हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिकायतें दर्ज हुई हैं, लेकिन आरोपों की सत्यता की जांच अभी बाकी है.
33 हजार नाम हटाने का दावा
तृणमूल कांग्रेस के विधायक शौकत मोल्ला ने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के भीतर लगभग 33 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की सिफारिश की गई है. उनका कहना है कि इससे वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन लोगों के नाम हटाने की बात सामने आई है, उनमें से कई ने आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे और SIR की सुनवाई में भाग भी लिया था.
अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर आरोप
विधायक का आरोप है कि हटाए जाने वाले नामों में बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय के लोगों की है. उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में पक्षपात का संकेत देते हुए कहा कि यह कदम राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकता है.
भाजपा ने दावों पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, स्थानीय भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि जब तक निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक सूची जारी नहीं होती, तब तक इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाने की जानकारी कैसे सार्वजनिक हो सकती है. भाजपा ने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का दावा कानूनी रूप से संदिग्ध है.
बढ़ता राजनीतिक टकराव
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राज्य में पहले से ही सियासी तनाव बना हुआ है. सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है. चुनावी तैयारियों के बीच SIR को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है.
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