Bihar News : भारतीय रेलवे ने जमालपुर-रतनपुर रेलखंड पर तीसरी सुरंग बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. यह परियोजना 1094 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होगी और तकनीकी दृष्टि से अनोखी मानी जा रही है. नई सुरंग बनने के बाद भागलपुर-किऊल रूट के ट्रैफिक में बड़े स्तर पर सुधार आएगा और ट्रेनों की आवाजाही अधिक तेज और सुगम हो जाएगी.
वन विभाग के साथ संयुक्त सर्वे
मालदा रेलमंडल ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग के साथ ज्वाइंट सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि निर्माण कार्य के लिए सभी औपचारिकताओं को जल्द पूरा किया जा सके. अधिकारियों का मानना है कि जमीन पर कार्य शुरू होने से यह सुरंग जल्द ही वास्तविकता बन जाएगी.
पहाड़ों के बीच आधुनिक सुरंग
तीसरी सुरंग की लंबाई लगभग 903 फीट होगी, जबकि इसकी चौड़ाई 26 फीट और ऊंचाई 23 फीट रखी गई है. इसका डिज़ाइन हाई-स्पीड ट्रेनों और भारी मालगाड़ियों की आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. सुरंग के अंदर आधुनिक लाइटिंग, वेंटिलेशन सिस्टम और इमरजेंसी निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिससे इसे देश की सुरक्षित सुरंगों में शुमार किया जा सके.
ब्रिटिश काल से जुड़ा गौरवशाली रहा है इतिहास
जमालपुर की सुरंगों का इतिहास 1861 में ब्रिटिश शासन से जुड़ा है. पहली सुरंग ने करीब 150 वर्षों तक इस रूट का भार संभाला, जबकि 2022 में दूसरी सुरंग शुरू की गई. तीसरी सुरंग के बनने से यहां ‘ट्रिपल ट्रैक’ जैसी स्थिति बनेगी, जिससे ट्रेनों का वेटिंग टाइम और क्रॉसिंग टाइम लगभग शून्य हो जाएगा.
पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी में सुधार
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाले मुख्य रेल मार्ग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. जैसे ही फॉरेस्ट विभाग से एनओसी प्राप्त होगी, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
तीसरी सुरंग बनने से यात्रियों का समय बचेगा, मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी और रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि होगी. इसके साथ ही नई पैसेंजर ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी आसान होगा.
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