Bihar Rail : रेलवे पटरियों को सीधे पार करने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर नई योजना पर काम शुरू कर दिया है. अब ऐसे इलाकों की पहचान की जाएगी, जहां रोजमर्रा की जरूरतों के कारण बड़ी संख्या में लोग ट्रैक पार करने को मजबूर होते हैं. इन स्थानों पर सुरक्षित और उपयोगी रेल पुलियाओं का निर्माण कराया जाएगा, ताकि लोगों को जान जोखिम में डालकर पटरियां पार न करनी पड़ें. इस दिशा में आगे की रणनीति तय करने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में अधिकारियों के साथ एक विशेष कार्यशाला की और देशभर में इस योजना को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए.
जहां रोज गुजरते हैं लोग, वहां बनेगा सुरक्षित रास्ता
रेलवे की योजना उन इलाकों पर केंद्रित है, जहां ट्रैक के एक ओर रिहायशी बस्ती और दूसरी ओर खेत, स्कूल, श्मशान, बाजार या अन्य जरूरी स्थान मौजूद हैं. ऐसे स्थानों पर लोग सुविधा के अभाव में अक्सर पटरियां पार करते हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है. अब रेलवे इन जगहों पर व्यवस्थित पुलिया बनाकर लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना चाहता है. मंत्रालय का मानना है कि यदि लोगों को आसान और व्यावहारिक विकल्प मिलेगा, तो वे ट्रैक पार करने का जोखिम कम उठाएंगे.
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रेल मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यह केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा अभियान है. इसलिए प्राथमिकता उन स्थानों को दी जानी चाहिए, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग ट्रैक के आर-पार आते-जाते हैं. रेलवे चाहता है कि यह व्यवस्था ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में भी उतनी ही उपयोगी हो, जितनी भीड़भाड़ वाले शहरों में.
साइकिल और बाइक के साथ भी आसानी से हो सकेगा आवागमन
नई रेल पुलियाओं के डिजाइन को लेकर भी खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं. इन्हें इस तरह विकसित किया जाएगा कि लोग केवल पैदल ही नहीं, बल्कि साइकिल, मोटरसाइकिल और अपने कामकाज से जुड़ी छोटी जरूरी चीजों के साथ भी आसानी से आ-जा सकें. रेलवे का उद्देश्य यह है कि पुलिया लोगों के लिए बोझिल या असुविधाजनक न लगे, बल्कि वह रोजमर्रा के जीवन का सहज हिस्सा बन जाए.
अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि संरचना ऐसी हो, जिसे इस्तेमाल करने में लोगों को झिझक न हो. कई बार ऊंचाई, ढलान, संकरी जगह या खराब पहुंच जैसी वजहों से लोग बने हुए रास्तों का उपयोग नहीं करते और सीधे पटरियां पार कर लेते हैं. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए अब उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजाइन पर जोर दिया जा रहा है. रेलवे का मानना है कि जब तक सुविधा आसान नहीं होगी, तब तक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाएगी.
12 घंटे में निर्माण योग्य मॉडल पर जोर
रेल मंत्रालय इस परियोजना को बड़े पैमाने पर और तेज रफ्तार से आगे बढ़ाना चाहता है. इसी वजह से ऐसी तकनीक और डिजाइन पर काम किया जा रहा है, जिसके जरिए पटरियों के आर-पार पुलिया का निर्माण बहुत कम समय में पूरा किया जा सके. अधिकारियों को इस दिशा में ऐसे मॉडल तैयार करने को कहा गया है, जिन्हें सीमित समय में स्थापित किया जा सके और जिनसे रेल परिचालन भी ज्यादा प्रभावित न हो.
रेल मंत्री ने इस पूरी योजना को अगले पांच से छह वर्षों के भीतर ठोस परिणाम देने वाली पहल के रूप में देखने की बात कही है. उनका मानना है कि यदि सही स्थानों की पहचान, मजबूत डिजाइन और तेज क्रियान्वयन पर एक साथ काम किया गया, तो ट्रैक पार करते समय होने वाली बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है. इसके साथ ही जलजमाव जैसी स्थानीय समस्याओं को भी ध्यान में रखते हुए निर्माण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बरसात या अन्य मौसमीय परिस्थितियों में भी पुलिया उपयोगी बनी रहे.
रेलवे के भीतर इस विषय पर पिछले कुछ समय से लगातार विचार-विमर्श चल रहा था. अब इसे एक संगठित और दीर्घकालिक समाधान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. मंत्रालय की कोशिश है कि आम लोगों की जरूरतों को समझते हुए ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार किया जाए, जो आने वाले वर्षों तक सुरक्षित, सरल और भरोसेमंद बना रहे. यदि यह योजना जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो ट्रैक पार करने के दौरान होने वाली जानलेवा घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है.
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