Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर लगभग साफ कर दी है, जबकि सहयोगी दलों के बीच हिस्सेदारी को लेकर चली लंबी कवायद अब थमती दिख रही है.
विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए मुकाबला भले एकतरफा नजर आए, लेकिन अंदरखाने की राजनीतिक हलचल ने इस चुनाव को रोचक बना दिया है.
भाजपा और सहयोगियों के नाम तय, पांचवें चेहरे पर मुहर
एनडीए खेमे से भारतीय जनता पार्टी ने दो उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. प्रदेश अध्यक्ष Nitin Nabin को पार्टी ने राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है. इसके साथ ही सासाराम संसदीय क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहे Shivesh Ram को भी उम्मीदवार बनाया गया है.
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गठबंधन की ओर से एक अहम नाम राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख Upendra Kushwaha का है, जिन्हें एनडीए का आधिकारिक समर्थन मिला है. इस घोषणा के साथ ही पांच सीटों में से तीन पर एनडीए के दावेदार लगभग तय माने जा रहे हैं.
उधर Janata Dal United के खाते में आने वाली संभावित सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक Ramnath Thakur का नाम प्रमुखता से चल रहा है. साथ ही मुख्यमंत्री Nitish Kumar के पुत्र Nishant Kumar को लेकर भी अटकलें जारी हैं, हालांकि औपचारिक घोषणा अभी बाकी है.
19 विधायकों के बावजूद लोजपा-रामविलास को प्रतिनिधित्व नहीं
राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में इस बार Lok Janshakti Party (Ram Vilas) भी रही. विधानसभा में 19 विधायकों के साथ मजबूत उपस्थिति के बावजूद पार्टी को राज्यसभा में सीट नहीं मिल सकी.
पार्टी प्रमुख Chirag Paswan ने गठबंधन के फैसले को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी एनडीए उम्मीदवारों का समर्थन करेगी. पिछले कुछ दिनों से उनकी मां Reena Paswan के राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाएं थीं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से सक्रिय राजनीति में आने से इनकार कर दिया.
विपक्ष की रणनीति और मांझी की मांग
विपक्षी दलों की ओर से भी रणनीति तैयार की जा रही है. Rashtriya Janata Dal के नेता Tejashwi Yadav ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी जल्द ही अपने उम्मीदवार की घोषणा करेगी.
इधर Hindustani Awam Morcha के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने भी अपनी पार्टी के लिए एक सीट की दावेदारी जताई थी. पार्टी के पास पांच विधायक और एक विधान पार्षद हैं, फिर भी इस बार उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया. मांझी ने कहा है कि वे अंतिम निर्णय तक प्रतीक्षा करेंगे, लेकिन किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाएंगे.
16 मार्च को मतदान, सियासी तापमान चरम पर
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित है. इसके बाद 16 मार्च को मतदान होगा. संख्या बल के आधार पर एनडीए को बढ़त मानी जा रही है, लेकिन अंतिम समय तक राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
पांच सीटों का यह चुनाव सिर्फ प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं, बल्कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है.
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