Ramadan 2026 Rules: 19 फरवरी 2026 से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है. इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना माने जाने वाला रमजान आत्मशुद्धि, इबादत और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता है. चांद दिखने के साथ ही इसकी शुरुआत मानी जाती है और पूरे महीने रोजेदार विशेष अनुशासन का पालन करते हैं.
क्यों खास है रमजान का महीना?
रमजान को बेहद पवित्र महीना माना जाता है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार इसी महीने में अल्लाह ने हजरत मोहम्मद साहब को अपना पैगंबर चुना था. यही वह महीना है जिसमें पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुई. इसलिए यह महीना इबादत, दुआ और नेकी का महीना माना जाता है. रमजान में की गई इबादत का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है. लोग इस दौरान जरूरतमंदों की मदद भी करते हैं और जकात (दान) देते हैं.
रोजा: आत्मसंयम की साधना
रोजा का अर्थ है फज्र से लेकर मग़रिब तक भोजन और पानी से दूर रहना. लेकिन इसका मकसद सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि अपनी सोच, व्यवहार और भाषा पर भी नियंत्रण रखना है.
रोजा इंसान को सब्र सिखाता है, अहंकार से दूर रखता है और गरीबों की तकलीफ का एहसास कराता है. यह आध्यात्मिक रूप से खुद को मजबूत बनाने और अल्लाह के करीब जाने का जरिया माना जाता है.
सेहरी और इफ्तार की परंपरा
रमजान में रोजा शुरू होने से पहले जो भोजन किया जाता है, उसे सेहरी कहा जाता है. फज्र की अजान से पहले सेहरी समाप्त कर ली जाती है.
सूर्यास्त के बाद मग़रिब की नमाज के साथ रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहते हैं. परंपरागत रूप से खजूर और पानी से इफ्तार करने की सुन्नत मानी जाती है.
रोजा रखते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक खान-पान से परहेज.
- बुरी बातों, विवाद और गलत आचरण से दूरी.
- समय पर पांचों वक्त की नमाज अदा करना.
- जरूरतमंदों की मदद और दान करना.
- दिल और दिमाग दोनों को सकारात्मक रखना.
रमजान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला महीना है. यह इंसान को अपने अंदर झांकने और बेहतर बनने का अवसर प्रदान करता है.
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