Rangbhari Ekadashi 2026: फाल्गुन मास की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व वाराणसी में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है, लेकिन काशी में इसकी पहचान “रंगभरी एकादशी” के रूप में है. धार्मिक परंपरा के अनुसार इसी दिन से बाबा विश्वनाथ की नगरी में होली के उत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है. वर्ष 2026 में यह पर्व 27 फरवरी को मनाया जाएगा.
क्या है रंगभरी एकादशी की परंपरा?
लोकमान्यता के अनुसार, विवाह के बाद भगवान शिव माता पार्वती को लेकर पहली बार काशी आए थे. उनके स्वागत में नगरवासियों ने अबीर-गुलाल और पुष्प वर्षा कर उत्सव मनाया. इसी रंगोत्सव की स्मृति में यह तिथि “रंगभरी” कहलायी.
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आज भी इस दिन काशी के मंदिरों में शिव-पार्वती को प्रतीकात्मक रूप से रंग अर्पित किया जाता है. यह आयोजन होली के आगमन का संकेत माना जाता है.
2026 में पूजा के प्रमुख मुहूर्त
धार्मिक आचरण करने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिनभर कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:09 बजे से 05:59 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 बजे से 03:15 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 10:48 बजे से रात्रि तक
इन समयों में पूजा, व्रत संकल्प और आराधना करना शुभ माना जाता है.
काशी में उत्सव का अलग रंग
वाराणसी में यह दिन खास महत्व रखता है. काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव का गौना संपन्न हुआ और वे माता पार्वती के साथ काशी पधारे.
इस अवसर पर मंदिरों में भजन, कीर्तन और रंग-अबीर अर्पण की परंपरा निभाई जाती है. श्रद्धालु इसे शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव मानते हैं.
धार्मिक महत्व और व्रत की मान्यता
एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. इसलिए इस दिन व्रत रखकर विष्णु पूजा का भी विधान है. कई भक्त शिव-पार्वती के साथ भगवान विष्णु की आराधना करते हैं.
धार्मिक विश्वास है कि इस व्रत से दांपत्य जीवन में मधुरता, परिवार में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है. साथ ही यह पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश देता है.
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