UK Suspends Study Visa: ब्रिटेन ने छात्र वीजा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए चार देशों के नागरिकों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. ब्रिटिश प्रशासन का कहना है कि कुछ लोग पढ़ाई के लिए मिलने वाले वीजा का इस्तेमाल बाद में स्थायी शरण लेने के लिए कर रहे हैं. इसी वजह से सरकार ने इस पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है.
सरकार के मुताबिक यह कदम शरण के लिए बढ़ते आवेदनों को नियंत्रित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है. फिलहाल यह प्रतिबंध अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के नागरिकों पर लागू किया गया है. साथ ही अफगान नागरिकों के लिए स्किल्ड वर्क वीजा को भी अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की गई है.
26 मार्च से लागू होंगे नए वीजा नियम
ब्रिटेन के आव्रजन नियमों में बदलाव करते हुए इन प्रतिबंधों को लागू किया जा रहा है. बताया गया है कि यह व्यवस्था 26 मार्च से प्रभावी होगी. ब्रिटिश गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) के अनुसार हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जिनमें लोग वैध वीजा लेकर ब्रिटेन पहुंचते हैं और बाद में शरण का दावा कर देते हैं.
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गृह मंत्रालय का कहना है कि इसी वजह से चार देशों के नागरिकों के लिए पहली बार ‘इमरजेंसी ब्रेक’ जैसी व्यवस्था लागू की गई है. सरकार का मानना है कि इस कदम से शरण प्रणाली के दुरुपयोग को कम किया जा सकेगा.
2021 के बाद बढ़े शरण के आवेदन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2021 से अब तक करीब 1.35 लाख लोग वैध वीजा के माध्यम से ब्रिटेन पहुंचे और बाद में शरण के लिए आवेदन कर दिया. सरकार का दावा है कि 2025 के दौरान छात्र वीजा धारकों द्वारा किए गए शरण दावों में लगभग 20 प्रतिशत कमी आई है, लेकिन कुल शरण आवेदनों में उनकी हिस्सेदारी अभी भी करीब 13 प्रतिशत बनी हुई है.
सरकार के अनुसार अफगानिस्तान, कैमरून, सूडान और म्यांमार के नागरिकों द्वारा किए गए शरण आवेदन 2021 से 2025 के बीच 470 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ा है.
चार देशों से आने वालों के दावों में तेज वृद्धि
रिपोर्टों के मुताबिक जिन देशों को इस फैसले में शामिल किया गया है, वहां से आने वाले कई आवेदकों ने शरण मांगने के पीछे आर्थिक कठिनाइयों को प्रमुख कारण बताया है. फिलहाल इन चार देशों के लगभग 16 हजार लोगों को ब्रिटेन में सहायता प्रदान की जा रही है.
आंकड़े बताते हैं कि छात्र वीजा के जरिए ब्रिटेन पहुंचे लगभग 95 प्रतिशत अफगान नागरिकों ने बाद में शरण के लिए आवेदन कर दिया. वहीं म्यांमार के छात्रों के शरण दावों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कैमरून और सूडान के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है.
नए नियमों में क्या बदला
पहले के नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति को शरणार्थी का दर्जा मिल जाता था तो उसे पांच वर्षों तक ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिलती थी. इसके बाद वह स्थायी निवास और नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता था.
अब नए प्रावधानों के अनुसार गृह मंत्रालय शरणार्थियों और उनके साथ आए बच्चों की स्थिति की समीक्षा हर 30 महीने में करेगा. यदि किसी देश को सुरक्षित माना जाता है, तो वहां के नागरिकों से अपने देश लौटने की अपेक्षा की जा सकती है.
हालांकि बिना अभिभावक के आए नाबालिग बच्चों को फिलहाल पांच साल तक रहने की अनुमति मिलती रहेगी, जब तक कि सरकार इस श्रेणी के लिए अलग दीर्घकालिक नीति तय नहीं कर लेती.
यूरोप में भी सख्त हो रहे आव्रजन नियम
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिटेन की नई नीति कुछ हद तक डेनमार्क के मॉडल से प्रभावित मानी जा रही है, जहां शरणार्थियों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाती है. यूरोप के कई देशों में आव्रजन और शरण नीति राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन चुकी है.
ब्रिटेन में भी प्रवासन से जुड़े सवाल लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं और विभिन्न दल इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाते रहे हैं.
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