Malda Judicial Officers Attack NIA Investigation: मालदा में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घेराबंदी और हमले की घटना ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सामने आये इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ा रुख दिखाते हुए जांच सीधे NIA को सौंप दी. सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिया कि यह कोई साधारण कानून-व्यवस्था की चूक नहीं, बल्कि ऐसा मामला है जिसकी तह तक जाना जरूरी है. शीर्ष अदालत ने राज्य प्रशासन के रवैये पर भी नाराजगी जतायी और कहा कि संस्थागत जवाबदेही कमजोर पड़ना चिंताजनक स्थिति है. कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद मामला अब और ज्यादा संवेदनशील हो गया है.
मुख्य सचिव की भूमिका पर अदालत नाराज
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला के आचरण को लेकर तीखी टिप्पणी की. अदालत ने इस बात पर असंतोष जताया कि जब मालदा में न्यायिक अधिकारी गंभीर हालात में फंसे हुए थे, उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कॉल का जवाब नहीं दिया गया. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर प्रशासनिक चूक माना. साथ ही मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया कि वे इस मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से तत्काल माफी मांगें. अदालत का मानना था कि ऐसी स्थिति में प्रशासनिक तंत्र को अधिक सक्रिय और संवेदनशील होना चाहिए था.
गिरफ्तार 26 लोगों से अब NIA करेगी पूछताछ
मामले में पहले से गिरफ्तार 26 आरोपियों से पूछताछ का अधिकार अब NIA को मिल गया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि आरोपी न्यायिक हिरासत में भी हैं, तब भी एजेंसी उनसे सवाल-जवाब कर सकती है. अदालत ने इस पूरी घटना को अचानक भड़की भीड़ की हरकत मानने के बजाय एक सोची-समझी योजना की आशंका से जोड़ा. कोर्ट ने माना कि न्यायिक अधिकारियों को लंबे समय तक रोककर रखना और उन पर दबाव बनाना अपने आप में गंभीर संकेत है. इसी वजह से जांच को राज्य एजेंसियों से हटाकर केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का फैसला लिया गया.
मतदाता दावों की सुनवाई के बीच हुई थी घटना
जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कार्य में लगे हुए हैं. इन अधिकारियों पर मतदाता सूची से बाहर हुए 60 लाख से ज्यादा लोगों के दावे और आपत्तियों की सुनवाई की जिम्मेदारी है. मालदा में भी यही प्रक्रिया चल रही थी, जब 7 न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर घंटों तक रोके रखा गया. बताया गया कि यह स्थिति करीब 9 घंटे तक बनी रही और इसी दौरान तनावपूर्ण हालात उत्पन्न हुए. सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू को भी बेहद गंभीर मानते हुए मामले में सख्त हस्तक्षेप किया.
सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश, जजों की सुरक्षा सर्वोपरि
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा, गरिमा और स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर किसी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. कोर्ट की टिप्पणी और NIA जांच के आदेश के बाद राज्य प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है. अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकता है.
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