TMBU News: टीएमबीयू के विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों और पीजी विभागों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के बीच मानदेय भुगतान को लेकर नाराजगी बढ़ गई है. फरवरी महीने का भुगतान अब तक नहीं होने पर टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार दोनों पर सवाल उठाए हैं. संघ का कहना है कि पहले से चली आ रही देरी ने शिक्षकों की परेशानी बढ़ा रखी थी, लेकिन अब ट्रेजरी स्तर पर भुगतान रुकने की सूचना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. इससे बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं.
10 अप्रैल तक भुगतान रुकने की सूचना से बढ़ी चिंता
अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने बयान जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर पहले ही भुगतान में देरी हो रही थी. अब ट्रेजरी से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार 10 अप्रैल तक किसी भी प्रकार के भुगतान पर रोक लगा दी गई है. संघ ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है.
उनका कहना है कि राज्य स्तर पर इस तरह भुगतान रोकना बेहद निराशाजनक है. संघ ने इसे शिक्षकों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया है. भुगतान में लगातार देरी से कार्यरत शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं.
189 अतिथि शिक्षक प्रभावित, कई महीनों से भुगतान लंबित
टीएमबीयू में फिलहाल 2018, 2024 और 2025 में नियुक्त कुल 189 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जिनका भुगतान अब इस रोक की वजह से और आगे खिसक सकता है. जानकारी के अनुसार, 2018 और 2024 में नियुक्त 129 अतिथि शिक्षकों के फरवरी महीने का मानदेय इस कारण प्रभावित हो रहा है.
वहीं 2025 में बहाल हुए 70 अतिथि शिक्षकों की स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है. संघ के अनुसार, इन शिक्षकों को पिछले 11 महीने से मानदेय नहीं मिला है. ऐसे में लगातार लंबित भुगतान ने उनके बीच असंतोष और चिंता दोनों बढ़ा दी है.
संघ ने की त्वरित भुगतान की मांग
अतिथि शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है. संघ का कहना है कि जो शिक्षक लगातार पढ़ाई का दायित्व निभा रहे हैं, उन्हें समय पर मानदेय मिलना चाहिए. लंबे समय तक भुगतान अटकना किसी भी स्तर पर उचित नहीं माना जा सकता.
संघ ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की जरूरत है, ताकि प्रभावित शिक्षकों को जल्द राहत मिल सके. अब नजर इस बात पर टिकी है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भुगतान को लेकर कब तक कोई ठोस निर्णय सामने आता है.
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