Donald Trump : दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को अपने तीखे और विवादित अंदाज़ की झलक दिखाई. तय समय 45 मिनट था, लेकिन ट्रंप पूरे 70 मिनट तक बोलते रहे. इस दौरान उनका भाषण आत्मप्रशंसा, व्यंग्य और कई देशों व नेताओं पर सीधी टिप्पणियों से भरा रहा. यूरोप से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और नाटो तक, शायद ही कोई बड़ा मुद्दा हो जिस पर ट्रंप ने अपनी राय न रखी हो.
यूरोप को लेकर सख्त रुख: “पहचान खोता जा रहा महाद्वीप”
President Trump teases Macron at Davos and the audience breaks out in laughter:
— The American Conservative (@amconmag) January 21, 2026
"Macron, I watched him yesterday with those beautiful sunglasses. What the hell happened?" pic.twitter.com/M3XKAn9ogl
ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत ही यूरोप पर तीखे प्रहार से की. उन्होंने कहा कि यूरोप के कई इलाके अब वैसे नहीं दिखते जैसे पहले दिखते थे और यह बदलाव बेहतर नहीं, बल्कि चिंता का विषय है. ट्रंप के मुताबिक, यूरोप एक गलत दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वहां के नेता जमीनी हकीकत से कट चुके हैं और अपने ही फैसलों से अपने देशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
रिन्यूएबल एनर्जी पर कटाक्ष, चीन को बताया असली फायदा उठाने वाला
यूरोप की हरित ऊर्जा नीतियों पर भी ट्रंप ने सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी के नाम पर यूरोप दरअसल चीन को फायदा पहुंचा रहा है. ट्रंप के अनुसार, चीन यूरोप को पवन चक्कियां बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा है और यूरोपीय नेता बिना सोचे-समझे इन्हें अपनाने में लगे हैं. उनका दावा था कि इस पूरी व्यवस्था में यूरोप खुद घाटे में जा रहा है.
मैक्रों के स्टाइल पर तंज, साथ में पुराना हिसाब भी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी ट्रंप की टिप्पणियों से नहीं बच सके. दावोस में मैक्रों के धूप का चश्मा पहनकर भाषण देने पर ट्रंप ने चुटकी ली और कहा कि यह सब देखकर वे हैरान रह गए. हालांकि, इसके बाद ट्रंप ने यह भी माना कि दवाओं की कीमतों के मुद्दे पर मैक्रों सख्त नजर आए. लेकिन यहीं बात खत्म नहीं हुई. ट्रंप ने मैक्रों से यह कहने का दावा किया कि फ्रांस दशकों से अमेरिका का आर्थिक फायदा उठाता रहा है और अब यह रवैया बदलना होगा.
कनाडा को लेकर नाराज़गी, प्रधानमंत्री को चेतावनी
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर भी ट्रंप का गुस्सा फूटा. कार्नी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने अमेरिका की अगुवाई वाली वैश्विक व्यवस्था के कमजोर होने की बात कही थी, ट्रंप ने कहा कि कनाडा को अमेरिका के योगदान को नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने यह तक कह दिया कि कनाडा की सुरक्षा और स्थिरता अमेरिका की वजह से है और कनाडाई नेतृत्व को सार्वजनिक बयान देते वक्त यह बात याद रखनी चाहिए.
रूस-यूक्रेन युद्ध पर बड़ा दावा
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर ट्रंप ने एक बार फिर खुद को समाधानकर्ता के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की—दोनों के संपर्क में हैं. ट्रंप ने दो टूक कहा कि अगर दोनों नेता शांति समझौते से पीछे हटते हैं, तो यह उनकी मूर्खता होगी. उनके मुताबिक, यह टिप्पणी किसी एक के लिए नहीं बल्कि दोनों पर समान रूप से लागू होती है.
नाटो, ग्रीनलैंड और अमेरिकी बोझ
नाटो को लेकर ट्रंप ने पुराना राग दोहराया. उन्होंने संगठन पर अमेरिका के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया. साथ ही ग्रीनलैंड का मुद्दा उठाते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका न सिर्फ ग्रीनलैंड बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा करता है. ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका इतना बड़ा जिम्मा उठा रहा है, तो ग्रीनलैंड को लीज पर लेकर उसकी सुरक्षा और बेहतर तरीके से क्यों न की जाए.
डेनमार्क पर तीखा हमला, दूसरे विश्व युद्ध का हवाला
डेनमार्क पर ट्रंप की टिप्पणी सबसे ज्यादा विवादित रही. उन्होंने डेनमार्क को ‘एहसान फरामोश’ बताते हुए इतिहास का हवाला दिया. ट्रंप ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान डेनमार्क जर्मनी के सामने कुछ ही घंटों में हार गया था. उनके मुताबिक, डेनमार्क न तो खुद की रक्षा करने में सक्षम है और न ही ग्रीनलैंड की, जबकि सुरक्षा की असली जिम्मेदारी अमेरिका निभा रहा है.
कुल मिलाकर, दावोस में ट्रंप का यह भाषण वैश्विक मंच पर एक बार फिर उनके आक्रामक, बेबाक और टकराव भरे राजनीतिक अंदाज़ की पहचान बन गया, जिसने समर्थकों और आलोचकों—दोनों को बोलने का मौका दे दिया.
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